पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, HRCP की रिपोर्ट ने चिंता जताई

Lahore : 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर ह्यूमन राइट्स (FIDH) और ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) की एक नई रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान की न्याय प्रणाली में भ्रष्टाचार गहराई तक फैला हुआ है, जिससे न्यायिक स्वतंत्रता कमजोर हो रही है और मौलिक मानवाधिकारों को नुकसान पहुंच रहा है।
'डॉन' के अनुसार, 'अंडर द बेंच: मैपिंग करप्शन रिस्क इन पाकिस्तान जस्टिस सिस्टम' (Under the Bench: Mapping Corruption Risks in Pakistan's Justice System) नाम की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की न्याय प्रणाली के कई स्तरों पर भ्रष्टाचार संस्थागत हो गया है, जिससे निष्पक्ष सुनवाई की गारंटी, कानून के समक्ष समानता और न्यायपालिका में जनता का भरोसा प्रभावित हो रहा है। ये निष्कर्ष 30 वकीलों, जजों, पत्रकारों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ किए गए साक्षात्कार पर आधारित हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भ्रष्टाचार केवल वित्तीय गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पक्षपात, भाई-भतीजावाद, राजनीतिक हस्तक्षेप और न्यायिक प्रशासन की कमियां भी शामिल हैं। इसमें दावा किया गया है कि इन तौर-तरीकों ने न्यायपालिका की स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता को कमजोर किया है और साथ ही उच्च न्यायालयों पर राज्य के प्रभाव का खतरा भी बढ़ा दिया है। अध्ययन का तर्क है कि पाकिस्तान में न्यायिक भ्रष्टाचार शायद 'सिस्टमिक' (प्रणालीगत) या 'ग्रैंड करप्शन' (बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार) के स्तर तक पहुंच गया है।
रिपोर्ट में पाकिस्तान के 26वें और 27वें संवैधानिक संशोधनों पर भी चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि इन बदलावों ने न्यायिक नियुक्तियों के तरीके को बदलकर और जजों को हटाने के आधारों का विस्तार करके न्यायिक स्वायत्तता को और कमजोर किया है। संगठनों का तर्क है कि मौजूदा जवाबदेही तंत्र न्याय प्रणाली के भीतर भ्रष्टाचार की प्रभावी ढंग से जांच करने या उसे रोकने में विफल रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार ने कमजोर समुदायों - जिनमें धार्मिक अल्पसंख्यक, कम आय वाले समूह और महिलाएं शामिल हैं - को बहुत अधिक प्रभावित किया है, क्योंकि इससे न्याय और उचित कानूनी प्रक्रिया तक उनकी पहुंच सीमित हो गई है। यह रिपोर्ट न्यायिक कमियों को यातना, मौत की सजा और कानूनी पेशे के भीतर लैंगिक असमानता जैसे व्यापक मुद्दों से भी जोड़ती है। 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, HRCP के महासचिव हैरिस खलीक ने कहा कि सार्थक सुधार के लिए केवल प्रशासनिक उपायों पर निर्भर रहने के बजाय न्यायिक स्वतंत्रता को बहाल करना आवश्यक होगा।
'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, रिपोर्ट में 26वें और 27वें संवैधानिक संशोधनों को रद्द करने, मामलों के आवंटन की पारदर्शी प्रक्रिया शुरू करने, जजों के लिए अपनी संपत्ति सार्वजनिक रूप से घोषित करने को अनिवार्य बनाने, जनहित के मामलों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की लाइव-स्ट्रीमिंग करने और स्वतंत्र निगरानी के माध्यम से न्यायिक जवाबदेही को मजबूत करने की सिफारिश की गई है।





