
वर्ल्ड | संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत ने पाकिस्तान में हिंदू और ईसाई समुदाय के लोगों पर हो रहे अत्याचारों का मुद्दा उठाया है। भारत ने कड़े शब्दों में कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति बेहद चिंताजनक है, जहां जबरन धर्मांतरण, हिंसा और भेदभाव जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
भारत ने क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान में हिंदू, ईसाई, सिख और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ अत्याचार आम हो गया है। भारत ने यह भी आरोप लगाया कि वहां जबरन धर्म परिवर्तन, लड़कियों का अपहरण और धार्मिक स्थलों पर हमले जैसे गंभीर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं।
महिला और बच्चियों पर बढ़ते हमले
भारत ने विशेष रूप से उन मामलों को उजागर किया, जहां हिंदू और ईसाई लड़कियों का अपहरण कर जबरन निकाह और धर्मांतरण कराया जाता है। पाकिस्तान में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, लेकिन सरकार इन पर सख्त कार्रवाई करने में नाकाम रही है।
धार्मिक स्थलों पर हमले
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यह भी बताया कि पाकिस्तान में मंदिरों, चर्चों और गुरुद्वारों पर हमले बढ़ते जा रहे हैं। कई बार कट्टरपंथी समूह अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाते हैं, लेकिन प्रशासन इन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाता।
पाकिस्तान का क्या रहा रुख?
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान ने भारत के आरोपों को खारिज किया और कहा कि उनके देश में सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार दिए जाते हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे उलट है। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में भी पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की बदहाल स्थिति का खुलासा हो चुका है।
भारत का सख्त संदेश
भारत ने साफ कर दिया कि वह पाकिस्तान में हो रहे अल्पसंख्यकों के शोषण पर चुप नहीं बैठेगा और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाता रहेगा।





