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तंजानिया में हरिवंश की अहम बैठक संसदीय सहयोग बढ़ाने पर जोर

Ratna Netam
6 Oct 2026 3:46 PM IST
तंजानिया में हरिवंश की अहम बैठक संसदीय सहयोग बढ़ाने पर जोर
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अरुशा। राज्यसभा के उप-सभापति हरिवंश ने मंगलवार को तंजानिया के अरुशा में आयोजित 153वीं इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) असेंबली के दौरान तंजानिया की नेशनल असेंबली के स्पीकर मूसा अज़ान ज़ुंगू से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच संसदीय सहयोग को और मजबूत करने, क्षमता निर्माण तथा कौशल विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। यह बैठक भारत और तंजानिया के बीच संसदीय संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।बैठक के दौरान राज्यसभा के उप-सभापति हरिवंश ने तंजानिया द्वारा 153वीं IPU असेंबली की सफल मेजबानी के लिए स्पीकर मूसा अज़ान ज़ुंगू को बधाई दी। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और तंजानिया के बीच संसदीय संस्थाओं के स्तर पर संवाद और अनुभवों के आदान-प्रदान को आगे बढ़ाया जा सकता है। विशेष रूप से सांसदों और संसदीय कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण, संस्थागत क्षमता निर्माण और कौशल विकास को सहयोग के अहम क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया गया।
तंजानिया में भारतीय उच्चायोग ने इस द्विपक्षीय बैठक की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। उच्चायोग ने बताया कि राज्यसभा के उप-सभापति हरिवंश ने 153वीं इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन के दौरान तंजानिया की नेशनल असेंबली के स्पीकर मूसा अज़ान ज़ुंगू के साथ बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच संसदीय सहयोग को और गहरा करने के साथ क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर विचार-विमर्श किया गया।153वीं IPU असेंबली का आयोजन 5 से 9 अक्टूबर 2026 तक तंजानिया के अरुशा में किया जा रहा है। इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन दुनिया की राष्ट्रीय संसदों का वैश्विक संगठन है और इसकी बैठकों में विभिन्न देशों के सांसद अंतरराष्ट्रीय और लोकतांत्रिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं। इस बार की असेंबली का मुख्य विषय समावेशिता, विश्वास और सभी के लिए अवसरों के जरिए सुशासन को मजबूत करना और समुदायों को सशक्त बनाना है।
IPU असेंबली के दौरान कई संसदीय समितियों और मंचों की बैठकें भी आयोजित हो रही हैं। इनमें गवर्निंग काउंसिल, लोकतंत्र और मानवाधिकार से जुड़ी स्थायी समितियां, सांसदों के मानवाधिकार संबंधी समिति, मध्य पूर्व से जुड़े मुद्दों पर समिति, महिला सांसदों का मंच और युवा सांसदों का मंच शामिल हैं। इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आतंकवाद से मुकाबला, मानसिक स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून जैसे विषयों पर भी अलग-अलग कार्यक्रम रखे गए हैं।हरिवंश इस असेंबली में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। वह रविवार को अरुशा पहुंचे थे। तंजानिया में भारत के उच्चायुक्त विश्वदीप डे ने उनका और राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा का स्वागत किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य IPU के विभिन्न सत्रों और द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेकर भारत के संसदीय दृष्टिकोण को साझा करना तथा दूसरे देशों के प्रतिनिधियों के साथ सहयोग बढ़ाना है।
भारत और तंजानिया के बीच लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक और विकास सहयोग के संबंध रहे हैं। संसदीय संपर्क इन संबंधों का एक अहम हिस्सा हैं। दोनों देशों के बीच क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर सहयोग पहले से विभिन्न क्षेत्रों में जारी है और अब संसदीय संस्थाओं के स्तर पर भी इसे मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
हरिवंश और ज़ुंगू की बैठक में विशेष रूप से इस बात पर चर्चा हुई कि दोनों देशों की संसदें एक-दूसरे के अनुभवों से कैसे सीख सकती हैं। संसदीय प्रक्रियाओं, समिति व्यवस्था, डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल और जनप्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं। इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच संपर्क बढ़ाने के साथ नीतिगत समझ और संसदीय कार्यप्रणाली में भी सहयोग बढ़ सकता है।IPU की 153वीं असेंबली इसलिए भी अहम है क्योंकि इस दौरान संगठन के नए अध्यक्ष का चुनाव होना है। IPU ने घोषणा की है कि 9 अक्टूबर 2026 को संगठन के 32वें अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। मौजूदा अध्यक्ष तुलिया ऐक्सन का तीन साल का कार्यकाल अक्टूबर में समाप्त हो रहा है।
इस असेंबली के दौरान नाओएरो की संसद भी IPU की 184वीं सदस्य संसद बन गई है। इसके साथ ही संगठन का वैश्विक दायरा और बढ़ गया है। IPU संसदों के बीच संवाद को बढ़ावा देने, लोकतंत्र को मजबूत करने, सतत विकास को आगे बढ़ाने और सांसदों के मानवाधिकारों की रक्षा जैसे क्षेत्रों में काम करता है।तंजानिया के लिए भी इस असेंबली की मेजबानी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दुनियाभर के सांसदों और संसदीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने अरुशा को इन दिनों वैश्विक संसदीय कूटनीति के केंद्र में ला दिया है। तंजानिया ने पहले ही इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संसदीय संवाद को बढ़ावा देने का अवसर बताया था।
भारत की ओर से हरिवंश की भागीदारी इस बात को दर्शाती है कि नई दिल्ली संसदीय कूटनीति को द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण माध्यम मानती है। अलग-अलग देशों के संसद प्रमुखों और प्रतिनिधियों के साथ ऐसी बैठकें केवल राजनीतिक संवाद तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि प्रशिक्षण, संस्थागत सुधार और नीतिगत अनुभवों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देती हैं।हरिवंश और मूसा अज़ान ज़ुंगू की बैठक इसी व्यापक संदर्भ का हिस्सा है। दोनों पक्षों ने संसदीय सहयोग को और गहरा करने की इच्छा जताई और क्षमता निर्माण तथा कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित किया। 153वीं IPU असेंबली के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अन्य देशों के नेताओं के साथ भी कई बैठकें होने की उम्मीद है।
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