विश्व
ताइवान की पूर्व राष्ट्रपति ने चीन की सैन्य गतिविधियों पर जताई चिंता
Ratna Netam
8 Oct 2026 3:28 PM IST

x
सैन फ्रांसिस्को। ताइवान की पूर्व राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और चीन की सैन्य गतिविधियों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ताइवान के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना केवल ताइवान की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और लोकतांत्रिक देशों की मजबूती के लिए भी आवश्यक है। त्साई ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य क्षमता तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी विकास, आर्थिक मजबूती और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था भी इससे गहराई से जुड़ी हुई हैं।
'फोकस ताइवान' की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने बुधवार, 7 अक्टूबर को अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित वार्षिक सम्मेलन 'स्टैनफोर्ड DEFCON 2026' को संबोधित किया। यह सम्मेलन प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित था। त्साई ने अपने भाषण में ताइवान की सुरक्षा स्थिति, चीन की गतिविधियों और वैश्विक अर्थव्यवस्था में ताइवान की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।त्साई इंग-वेन ने 'एक साथ सुरक्षा का निर्माण: वैश्विक स्थिरता में ताइवान की भूमिका' विषय पर संबोधन देते हुए कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति बनाए रखना दुनिया के सामने मौजूद सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में सैन्य शक्ति, आधुनिक प्रौद्योगिकी और आर्थिक सुरक्षा एक-दूसरे से सीधे जुड़े हुए हैं। इसलिए यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का प्रभाव केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार और तकनीकी आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
पूर्व राष्ट्रपति ने चीन की सैन्य गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि चीनी सैन्य विमान, युद्धपोत और तटरक्षक बल के जहाज नियमित रूप से ताइवान के आसपास सक्रिय रहते हैं। उनके अनुसार, ताइवान को केवल पारंपरिक सैन्य गतिविधियों से ही चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ रहा, बल्कि साइबर हमले, सूचना में हेरफेर, आर्थिक दबाव और संज्ञानात्मक युद्ध जैसी गतिविधियां भी लगातार सामने आ रही हैं।त्साई ने आरोप लगाया कि ताइवान के आसपास चीन की गतिविधियां ऐसी परिस्थितियां पैदा कर रही हैं, जिनमें सुरक्षा संबंधी दबाव लगातार बना रहता है। उन्होंने कहा कि साइबर हमले और सूचनाओं को प्रभावित करने के प्रयास लगभग रोजमर्रा की चुनौतियां बन चुके हैं। संज्ञानात्मक युद्ध से उनका आशय ऐसी गतिविधियों से था, जिनके माध्यम से लोगों की धारणाओं, निर्णयों और सामाजिक विश्वास को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है।
ताइवान की पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि इन परिस्थितियों में केवल किसी बड़े सैन्य संघर्ष की तैयारी करना पर्याप्त नहीं है। ताइवान को अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करने के साथ आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को भी सुरक्षित रखना होगा। उनके मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए समाज, उद्योग और महत्वपूर्ण आपूर्ति प्रणालियों की मजबूती भी आवश्यक है।त्साई ने वैश्विक व्यापार में ताइवान की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि ताइवान जलडमरूमध्य दुनिया के महत्वपूर्ण व्यापारिक और ऊर्जा परिवहन मार्गों में शामिल है। इसके अतिरिक्त ताइवान वैश्विक प्रौद्योगिकी और विनिर्माण नेटवर्क का प्रमुख हिस्सा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस क्षेत्र में किसी गंभीर व्यवधान का प्रभाव इंडो-पैसिफिक के साथ दुनिया के अन्य हिस्सों में भी महसूस किया जा सकता है।
अपने संबोधन में त्साई इंग-वेन ने ताइवान के सेमीकंडक्टर उद्योग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी विनिर्माण क्षमताओं पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ताइवान को अक्सर ऐसे क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिसे अपनी सुरक्षा के लिए दूसरे देशों के समर्थन की जरूरत है। लेकिन उनके अनुसार, यह पूरी तस्वीर नहीं है।उन्होंने कहा कि ताइवान के पास उन्नत विनिर्माण क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता और औद्योगिक ढांचा है, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। त्साई के मुताबिक, ताइवान उन लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जो वैश्विक सुरक्षा से जुड़ी आपूर्ति प्रणालियों को मजबूत करने की क्षमता रखती हैं।पूर्व राष्ट्रपति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में ताइवान की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि दुनिया की लगभग तीन-चौथाई AI कंप्यूटिंग क्षमता अमेरिका में केंद्रित है, जबकि इन प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश उन्नत एक्सेलेरेटर और लगभग 90 प्रतिशत AI सर्वर ताइवानी कंपनियों द्वारा निर्मित किए जाते हैं। ये आंकड़े त्साई ने अपने भाषण में प्रस्तुत किए।
त्साई इंग-वेन ने उपग्रह और संचार उद्योग में ताइवान की भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ताइवानी कंपनियां रेडियो फ्रीक्वेंसी चिप और सर्किट बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों के निर्माण में योगदान देती हैं। इन उत्पादों का उपयोग संचार और उपग्रह प्रणालियों में किया जाता है। उनके अनुसार, आधुनिक तकनीक में नागरिक और रक्षा उपयोग के बीच अंतर लगातार कम होता जा रहा है।ताइवान की भौगोलिक स्थिति को लेकर त्साई ने कहा कि प्रथम द्वीप शृंखला में उसकी स्थिति रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लोकतांत्रिक व्यवस्था, तकनीकी क्षमताओं और औद्योगिक मजबूती के कारण अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग में ताइवान की भूमिका अहम बनती है।
हालांकि, चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और उसके साथ औपचारिक विदेशी संबंधों का विरोध करता रहा है। दूसरी ओर, ताइवान में निर्वाचित सरकार अपनी लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा क्षमता बढ़ाने पर जोर देती है। दोनों पक्षों के बीच संप्रभुता और राजनीतिक भविष्य को लेकर लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं।त्साई इंग-वेन ने अपने संबोधन में कहा कि सुरक्षित और आर्थिक रूप से मजबूत ताइवान पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता में योगदान दे सकता है। उन्होंने लोकतांत्रिक देशों के बीच तकनीकी सहयोग, भरोसेमंद आपूर्ति शृंखला और सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित सम्मेलन के बाद त्साई ने एक संवाद सत्र में भी हिस्सा लिया। इस दौरान अमेरिका में अध्ययन कर रहे ताइवान के विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और वैश्विक राजनीति तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी में ताइवान की भूमिका पर चर्चा की।
गौरतलब है कि त्साई इंग-वेन वर्ष 2016 से 2024 तक ताइवान की राष्ट्रपति रहीं। मई 2024 में उनका दूसरा कार्यकाल समाप्त हुआ था। राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद यह उनकी पहली अमेरिका यात्रा है। उन्होंने इस दौरे के माध्यम से ताइवान की सुरक्षा चुनौतियों और वैश्विक तकनीकी अर्थव्यवस्था में उसकी भूमिका को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उठाया।त्साई का यह संबोधन ऐसे समय में सामने आया है, जब ताइवान जलडमरूमध्य की सुरक्षा और चीन-ताइवान संबंध अंतरराष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं। उनके बयान में सैन्य सुरक्षा के साथ तकनीकी विकास, आर्थिक मजबूती और लोकतांत्रिक देशों के सहयोग को वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक बताया गया है।
Next Story





