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पाकिस्तान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में दवाओं का संकट

Ratna Netam
8 Oct 2026 3:23 PM IST
पाकिस्तान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में दवाओं का संकट
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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) में दवाओं और आवश्यक चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। अस्पताल में खरीद प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी के कारण मरीजों को मुफ्त उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं और इंजेक्शन की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। पिछले छह सप्ताह से अस्पताल में कोई नया टेंडर हस्ताक्षरित नहीं होने के कारण मौजूदा स्टॉक के समाप्त होने का खतरा पैदा हो गया है। इस स्थिति ने अस्पताल प्रशासन की खरीद प्रक्रिया और मरीजों के लिए आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
पाकिस्तानी समाचार पत्र 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में पिछले छह सप्ताह के दौरान एक भी खरीद टेंडर पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं। इसके कारण अस्पताल में दवाओं, इंजेक्शन और अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्रियों की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो रही है। अस्पताल से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खरीद से संबंधित फाइलें लंबित रहने के कारण स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, PIMS में भर्ती सभी मरीजों को दवाएं और इंजेक्शन मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं। अस्पताल की यह व्यवस्था उन मरीजों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो इलाज के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में आवश्यक दवाओं की नियमित खरीद और पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना अस्पताल के दैनिक संचालन की प्रमुख जरूरतों में शामिल है।अस्पताल में खरीद प्रक्रिया बाधित होने से दवाओं की उपलब्धता पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। चिकित्सा संस्थानों में नियमित रूप से इस्तेमाल होने वाली दवाओं और इंजेक्शन की लगातार आवश्यकता होती है। इसलिए खरीद प्रक्रिया में लंबे समय तक देरी होने पर उपलब्ध भंडार पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।
PIMS के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, खरीद संबंधी फाइलें लंबित होने से समस्या और गंभीर हो गई है। मंजूर किए गए टेंडरों के अभाव में नई आपूर्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसके परिणामस्वरूप अस्पताल में पहले से मौजूद दवाओं और आवश्यक सामग्रियों के स्टॉक में लगातार कमी आ रही है। हालांकि, किन-किन दवाओं का स्टॉक सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।सरकारी अस्पतालों में दवाओं की खरीद एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया होती है। इसके अंतर्गत अस्पताल की आवश्यकताओं का आकलन, खरीद प्रस्ताव तैयार करना, टेंडर प्रक्रिया पूरी करना और आपूर्तिकर्ताओं के माध्यम से सामग्री उपलब्ध कराना शामिल होता है। इन चरणों में देरी होने से अस्पतालों को समय पर जरूरी सामग्री प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में यह समस्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां भर्ती मरीजों के उपचार के लिए मुफ्त दवाओं और इंजेक्शन की व्यवस्था की जाती है। नियमित आपूर्ति बनी रहने से डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को उपचार संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलती है।इस व्यवस्था में बाधा उत्पन्न होने पर अस्पताल को उपलब्ध संसाधनों के प्रबंधन में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, मौजूदा जानकारी में किसी विशेष मरीज का उपचार रुकने या मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किए जाने की पुष्टि नहीं की गई है।
'डॉन' की 7 अक्टूबर की रिपोर्ट में अस्पताल प्रशासन से जुड़ी कुछ और महत्वपूर्ण जानकारियां भी सामने आई हैं। एक वरिष्ठ डॉक्टर ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि पिछले छह महीने से कई खरीद टेंडरों को मंजूरी नहीं मिल सकी। वहीं, पिछले छह सप्ताह में किसी नए टेंडर पर हस्ताक्षर नहीं हुए। डॉक्टर के मुताबिक, खरीद समिति के कई सदस्य अन्य विभागों के प्रमुख भी हैं, जिससे खरीद संबंधी कार्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा सका। अस्पताल में कार्यकारी निदेशक के पद से जुड़ी प्रशासनिक अनिश्चितता ने भी समस्या को बढ़ाया।रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल के वित्त विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि खरीद प्रक्रिया में देरी के पीछे प्रशासनिक और वित्तीय कारण भी हैं। फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू द्वारा अधिकृत हस्ताक्षरों की स्वीकृति जरूरी होती है। अधिकारियों के बदलने पर नए हस्ताक्षरों को अधिकृत करने की प्रक्रिया में लगभग दो सप्ताह लग सकते हैं। वित्तीय लेनदेन के लिए कार्यकारी निदेशक की मंजूरी से जुड़े दस्तावेज भी आवश्यक होते हैं।
इस बीच अस्पताल के नए कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. तनवीर खालिक ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने मंगलवार को पदभार संभालने के बाद संबंधित अधिकारियों को खरीद प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों का काम तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नए निदेशक ने समस्या का जल्द समाधान करने का भरोसा भी दिलाया है।फिलहाल अस्पताल में कुछ दवाओं का स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन आपूर्ति बाधित रहने के कारण उसके लगातार कम होने की चिंता बनी हुई है। अस्पताल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबित खरीद प्रक्रियाओं को पूरा करना और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
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