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फ्लाईदुबई घटना ने बढ़ाई सुरक्षा चिंता आतंकी एंगल की जांच पर जोर
Ratna Netam
1 Oct 2026 4:25 PM IST

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तेल अवीव। इज़राइल जाने वाली फ्लाईदुबई की उड़ान के कॉकपिट में हुए हिंसक हमले को लेकर इज़राइल की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की पूर्व निदेशक हेलिट बैरेल ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि घटना की पूरी जांच होने तक इसे संभावित आतंकी हमले के रूप में देखा जाना चाहिए। हालांकि हमलावर को-पायलट की वास्तविक मंशा को लेकर जांच अभी जारी है और संबंधित अधिकारियों ने अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया है। UAE ने भी घटना की जांच शुरू की है।
बैरेल ने कहा कि यह घटना केवल विमानन सुरक्षा से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इज़राइल की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद गंभीर है। उनके मुताबिक कॉकपिट के अंदर किसी चालक दल के सदस्य द्वारा हिंसक कार्रवाई ऐसी स्थिति पैदा कर सकती है, जिसमें विमान में सवार सभी लोगों की जान खतरे में पड़ जाए।
उन्होंने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमले के लिए इस्तेमाल किया गया हथियार कॉकपिट में मौजूद आपातकालीन उपकरण था या हमलावर अपने साथ कोई धारदार हथियार लेकर आया था। यही सवाल विमानन सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
घटना फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान FZ1073 में हुई थी। उड़ान के दौरान कॉकपिट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर उनके सह-पायलट ने हमला किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छर ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में मदद की, जिसके बाद यात्रियों और विमान में मौजूद अतिरिक्त फ्लाइट क्रू ने स्थिति को नियंत्रित किया। विमान को बाद में सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया। घटना के पीछे की मंशा अभी जांच का विषय है।
बैरेल ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले हमले के मकसद को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को सबसे खराब संभावित स्थिति को ध्यान में रखकर जांच करनी चाहिए।
उन्होंने आशंका जताई कि हमलावर का इरादा विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने का हो सकता था। बैरेल के अनुसार यह जांचना जरूरी है कि क्या हमला किसी बड़े आतंकी हमले की कोशिश थी या विमान को जानबूझकर गिराने का प्रयास किया गया था। यह उनका सुरक्षा आकलन है; सऊदी और UAE अधिकारियों की जांच में अभी हमले की अंतिम मंशा निर्धारित नहीं हुई है।
बैरेल ने कहा कि घटना पूरी तरह सफल नहीं हुई और इसके पीछे विमान में मौजूद लोगों की बहादुरी तथा कई परिस्थितियों की अहम भूमिका रही। उन्होंने विशेष रूप से अतिरिक्त फ्लाइट क्रू की मौजूदगी को महत्वपूर्ण बताया। कॉकपिट में स्थिति नियंत्रण से बाहर होने के बाद विमान में यात्रा कर रहे अन्य प्रशिक्षित पायलटों ने उसे सुरक्षित रूप से संभालने और आपात लैंडिंग में मदद की थी।
कैप्टन स्मित मच्छर की भूमिका को भी घटना के बाद व्यापक रूप से सराहा गया है। रिपोर्टों के अनुसार गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में मदद की। इसके बाद अन्य लोग अंदर पहुंच सके और हमलावर को काबू किया गया। विमान में मौजूद लोगों की त्वरित प्रतिक्रिया के कारण एक बड़ी दुर्घटना टल गई।
बैरेल ने इस घटना के जरिए कमर्शियल एविएशन की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक दूसरी चुनौती की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद दुनिया भर में विमान यात्रियों की सुरक्षा जांच को काफी मजबूत किया गया। यात्रियों की पहचान, सामान की जांच और संभावित खतरों को रोकने के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू की गईं।
उनके मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था का बड़ा हिस्सा इस धारणा पर आधारित रहा कि संभावित खतरा यात्रियों की ओर से आ सकता है। लेकिन फ्लाईदुबई की घटना इस सवाल को दोबारा सामने लाती है कि अगर खतरा विमान के चालक दल के भीतर से आए तो उससे निपटने की व्यवस्था कितनी मजबूत है।
बैरेल ने कहा कि एयरलाइन क्रू को विमान के संवेदनशील हिस्सों और संचालन प्रणाली तक ऐसी पहुंच होती है, जो किसी सामान्य यात्री के पास नहीं होती। इसलिए अगर कोई चालक दल का सदस्य नुकसान पहुंचाने के इरादे से काम करे तो वह गंभीर सुरक्षा खतरा पैदा कर सकता है।
उन्होंने कहा कि यह पहली ऐसी घटना नहीं है जिसने चालक दल के भीतर से आने वाले जोखिम पर सवाल उठाए हों, लेकिन ताजा घटना ने इस मुद्दे को फिर गंभीरता से सामने ला दिया है। उनके अनुसार विमानन कंपनियों और सुरक्षा एजेंसियों को यात्रियों की स्क्रीनिंग के साथ चालक दल से जुड़े संभावित जोखिमों के आकलन की व्यवस्था की भी समीक्षा करनी चाहिए।
फ्लाईदुबई की इस घटना के बाद इज़राइली अधिकारियों ने भी सुरक्षा संबंधी चिंता जताई है। इज़राइल के अधिकारियों ने इसे संभावित आतंकी घटना के नजरिए से जांचे जाने की बात कही है, जबकि UAE और सऊदी अरब की एजेंसियां परिस्थितियों और हमलावर की मंशा की जांच कर रही हैं। अभी तक किसी आतंकी संगठन से प्रत्यक्ष संबंध स्थापित होने की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है।
बैरेल के मुताबिक अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही निकल सकेगा, लेकिन घटना ने एयर-क्रू सुरक्षा, कॉकपिट एक्सेस और अंदरूनी खतरे से निपटने की तैयारियों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके अनुसार अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसियां हमले की मंशा, हथियार की उपलब्धता और सुरक्षा प्रक्रियाओं में संभावित कमियों को लेकर क्या निष्कर्ष निकालती हैं।
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