
वर्ल्ड | अमेरिका में अवैध प्रवासियों पर बढ़ती कार्रवाई के चलते हजारों प्रवासी छिपकर रहने को मजबूर हो गए हैं। देश में आप्रवासन कानूनों को सख्त किए जाने के बाद, उन्हें निर्वासन (डिपोर्टेशन) का डर सता रहा है। कई लोग अब सार्वजनिक रूप से बाहर निकलने से भी बच रहे हैं। इस मुश्किल समय में WhatsApp जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म उनके लिए एक बड़ा सहारा बनकर उभरा है।
अमेरिका में रह रहे अवैध प्रवासी समुदायों के बीच WhatsApp अब संवाद और सुरक्षा का अहम जरिया बन चुका है। इसका इस्तेमाल कई तरीकों से किया जा रहा है—
सूचना और अलर्ट: प्रवासियों के समूह WhatsApp के जरिए एक-दूसरे को छापेमारी, गिरफ्तारियों और ICE (Immigration and Customs Enforcement) के ऑपरेशनों की जानकारी दे रहे हैं।
कानूनी सहायता: कई अप्रवासी अधिकार संगठनों और वकीलों ने WhatsApp ग्रुप बनाए हैं, जहां प्रवासियों को उनके अधिकारों और कानूनी रास्तों की जानकारी दी जाती है।
रहने और काम की जानकारी: कुछ ग्रुप ऐसे हैं जो छिपे हुए प्रवासियों को आश्रय और रोजगार के अवसरों की जानकारी दे रहे हैं। फैमिली कनेक्शन
: अमेरिका में रह रहे प्रवासी अपने परिवारों और दोस्तों से जुड़े रहने के लिए इस ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं।
प्रवासियों में बढ़ती चिंता
अमेरिकी सरकार ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इसके चलते, हजारों लोग जो कई वर्षों से अमेरिका में रह रहे थे, अब डर के साये में जी रहे हैं। कई लोग काम पर जाने से बच रहे हैं, तो कुछ ने अपना घर तक छोड़ दिया है।
सरकार की सख्ती क्यों?
अमेरिका में अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या को लेकर बाइडेन प्रशासन पर काफी दबाव है। इस वजह से सरकार ने बॉर्डर सिक्योरिटी और अप्रवासन कानूनों को कड़ा करने का फैसला किया।
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
आप्रवासन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार प्रवासियों पर इसी तरह दबाव बनाती रही, तो लाखों लोग अंडरग्राउंड जीवन जीने के लिए मजबूर हो जाएंगे। इसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कई उद्योग प्रवासियों पर निर्भर हैं।
क्या आगे हो सकता है?
अप्रवासी संगठनों ने बाइडेन प्रशासन से नरमी बरतने की अपील की है।
कई प्रवासी अब नागरिकता या वैधता के लिए कानूनी विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।
WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म्स आगे भी सूचना और सुरक्षा का अहम माध्यम बने रह सकते हैं।





