
वर्ल्ड | म्यांमार में आए भीषण भूकंप से हालात बेकाबू हो चुके हैं। अब तक इस प्राकृतिक आपदा में करीब 3,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग घायल बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता मलबे में फंसे लोगों को लेकर है, जो अभी भी बचाव कार्य का इंतजार कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, मलबे में फंसे लोग कितने दिनों तक जीवित रह सकते हैं, यह कई कारकों पर निर्भर करता है।
भूकंप के बाद कितना खतरनाक है मलबे में फंसना?
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी आपदा में मलबे में फंसे लोगों की पहली 72 घंटे सबसे अहम होती हैं। इस अवधि के बाद जीवित बचने की संभावना तेजी से कम होने लगती है। हालांकि, यह पूरी तरह से परिस्थितियों पर निर्भर करता है—अगर फंसे हुए व्यक्ति को ऑक्सीजन, पानी या खाने की थोड़ी भी आपूर्ति मिल जाए, तो वह 5 से 7 दिन तक भी जीवित रह सकता है।
मलबे में फंसे लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा
ऑक्सीजन की कमी: अगर मलबे में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाए, तो व्यक्ति कुछ ही घंटों में दम तोड़ सकता है।
पानी और खाना: बिना पानी के इंसान 3-5 दिन तक जीवित रह सकता है, लेकिन बिना खाने के कुछ लोग हफ्तों तक जिंदा रह सकते हैं।
घाव और संक्रमण: अगर किसी व्यक्ति को गंभीर चोट लगी हो, तो संक्रमण या ब्लड लॉस से उसकी मौत जल्दी हो सकती है।
बचाव कार्य की रफ्तार और मुश्किलें
म्यांमार में राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन खराब बुनियादी ढांचे और संसाधनों की कमी के कारण लोगों तक तेजी से मदद पहुंचाना चुनौती बना हुआ है। भूकंप के कारण कई सड़कें और पुल टूट गए हैं, जिससे बचाव दल को घटनास्थल तक पहुंचने में देरी हो रही है।
अब तक कितने लोगों को बचाया गया?
अधिकारियों के मुताबिक, अब तक सैकड़ों लोगों को जिंदा निकाला गया है, लेकिन अभी भी हजारों लोग मलबे के नीचे दबे हुए हैं। स्थानीय लोगों और बचाव कर्मियों के लिए हर मिनट कीमती है।
अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत
म्यांमार सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहायता की अपील की है। कई देशों ने राहत सामग्री भेजी है, लेकिन बचाव अभियान को तेज करने के लिए और संसाधनों की जरूरत है।
आगे क्या होगा?
अगर जल्द से जल्द मलबे में फंसे लोगों तक मदद नहीं पहुंची, तो मौत का आंकड़ा 3,000 से कहीं ज्यादा हो सकता है। अगले कुछ घंटे इस आपदा में फंसे लोगों के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।





