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ब्रसेल्स। यूरोपीय संसद ने ताइवान की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विभिन्न देशों के साथ ताइवान के संपर्कों को सीमित करने की चीन की कोशिशों का विरोध किया गया है। इसके साथ ही यूरोपीय संघ और ताइवान के बीच आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने की मांग की गई है। प्रस्ताव में ताइवान को व्यापार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार बताया गया है।उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को मंजूर किए गए इस प्रस्ताव को यूरोपीय परिषद, यूरोपीय आयोग और यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास को भेजा गया। प्रस्ताव में यूरोपीय संघ और ताइवान के बीच करीबी संबंधों के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया गया है। साथ ही चीन की उन गतिविधियों पर आपत्ति जताई गई है, जिनके माध्यम से वह अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और अन्य देशों पर दबाव डालकर ताइवान की भागीदारी सीमित करने की कोशिश करता है।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों में ताइवान की भागीदारी का समर्थन
यूरोपीय संसद के प्रस्ताव में ताइवान की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों और संपर्कों को सीमित करने के प्रयासों का विरोध किया गया है। इसमें कहा गया है कि चीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों, तीसरे देशों और अन्य पक्षों पर दबाव डालकर ताइवान की भागीदारी प्रभावित करने की कोशिश करता है।प्रस्ताव के माध्यम से यूरोपीय संसद ने ताइवान के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को महत्व दिया है। यह मुद्दा लंबे समय से चीन और ताइवान के बीच विवाद का विषय रहा है।चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान की अपनी निर्वाचित सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ताइवान की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।यूरोपीय संसद का यह प्रस्ताव इसी व्यापक राजनीतिक और कूटनीतिक संदर्भ में सामने आया है।
आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने की मांग
प्रस्ताव में यूरोपीय संघ और ताइवान के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। ताइवान को व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए दोनों पक्षों के बीच करीबी सहयोग के रणनीतिक महत्व का उल्लेख किया गया है।ताइवान वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के क्षेत्र में उसकी औद्योगिक क्षमताएं अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।यूरोपीय संघ के लिए तकनीकी सहयोग, व्यापारिक संबंध और आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता महत्वपूर्ण विषय हैं। ऐसे में ताइवान के साथ आर्थिक तथा तकनीकी संबंधों को मजबूत करने की मांग व्यापक रणनीतिक हितों से जुड़ी हुई है।हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में किसी नए व्यापार समझौते, निवेश राशि या विशिष्ट तकनीकी परियोजना को मंजूरी दिए जाने का उल्लेख नहीं है।
सुरक्षा सहयोग पर भी दिया गया जोर
यूरोपीय संसद ने आर्थिक और तकनीकी सहयोग के साथ सुरक्षा क्षेत्र में भी ताइवान के साथ संबंध मजबूत करने की मांग की है।ताइवान की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल हैं। चीन और ताइवान के बीच लंबे समय से राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं, जिनका प्रभाव क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी चर्चाओं पर भी पड़ता हैप्रस्ताव में सुरक्षा सहयोग का उल्लेख इस बात को दर्शाता है कि यूरोपीय संसद ताइवान के साथ संबंधों को केवल व्यापार तक सीमित नहीं रखना चाहती।हालांकि, उपलब्ध विवरण में किसी विशेष सुरक्षा समझौते, सैन्य सहयोग या संयुक्त कार्यक्रम की घोषणा नहीं की गई है। इसलिए प्रस्ताव को किसी नई सैन्य साझेदारी की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
ताइवान की उपराष्ट्रपति की भागीदारी पर चीन के दबाव का उल्लेख
प्रस्ताव में ताइवान की उपराष्ट्रपति शियाओ बी-खिम की सितंबर में आयोजित स्वतंत्रता और लोकतंत्र संबंधी यूरोपीय सम्मेलन में भागीदारी का भी उल्लेख किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति को लेकर चीन की ओर से दबाव डाला गया था। यूरोपीय संसद ने इस घटना को ताइवान के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को सीमित करने के प्रयासों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है।प्रस्ताव में चीन की सीमा पार दमन संबंधी गतिविधियों पर भी आपत्ति जताई गई है। इसके साथ ही यूरोपीय संसद ने ताइवान के लोगों की इच्छा के विरुद्ध बल प्रयोग या दबाव के माध्यम से मौजूदा स्थिति बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध किया है।
वन चाइना नीति पर भी स्पष्ट किया रुख
यूरोपीय संसद की सिफारिश में यूरोपीय संघ की 'वन चाइना' नीति का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि यूरोपीय संघ की ताइवान संबंधी नीति इसी ढांचे के अंतर्गत संचालित होती है।साथ ही प्रस्ताव में यूरोपीय संघ की 'वन चाइना' नीति और चीन के 'वन चाइना' सिद्धांत के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है। यूरोपीय संसद ने कहा कि यूरोपीय संघ ने चीन के सिद्धांत को स्वीकार नहीं किया है।संसद ने ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा दोनों पक्षों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।
सेमीकंडक्टर और साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान
प्रस्ताव में सेमीकंडक्टर और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में ताइवान के साथ सहयोग बढ़ाने की मांग की गई है। इसके अलावा महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए द्विपक्षीय निवेश समझौते या किसी वैकल्पिक व्यवस्था पर बातचीत की तैयारी शुरू करने का सुझाव दिया गया है।यूरोपीय संसद ने महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं से संबंधित समझौता ज्ञापन की संभावना भी सामने रखी है। इसका उद्देश्य आर्थिक और तकनीकी सहयोग को अधिक व्यवस्थित रूप देना है।हालांकि, यह फिलहाल यूरोपीय संसद की सिफारिश है। इससे किसी नए निवेश समझौते के अंतिम रूप से लागू होने की पुष्टि नहीं होती।
चीन-ताइवान संबंधों के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम
सात अक्टूबर को मंजूर की गई इस सिफारिश में यूरोपीय संसद ने ताइवान की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का समर्थन करते हुए चीन के दबाव का विरोध किया है। साथ ही यूरोपीय संघ और ताइवान के बीच आर्थिक, तकनीकी तथा सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।यूरोपीय संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी सात अक्टूबर को इस सिफारिश को मंजूरी दिए जाने की पुष्टि होती है। यह सिफारिश यूरोपीय संघ की संबंधित संस्थाओं और विदेश नीति नेतृत्व को संबोधित है।इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि यूरोपीय संसद ताइवान के साथ सहयोग बढ़ाने और उसकी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी से संबंधित मुद्दों को महत्व दे रही है। हालांकि, प्रस्ताव में की गई सिफारिशों पर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह यूरोपीय संघ की संबंधित संस्थाओं के निर्णयों पर निर्भर करेगा।
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