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नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर शशि थरूर ने दी बधाई

Ratna Netam
9 Oct 2026 5:19 PM IST
नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर शशि थरूर ने दी बधाई
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नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद और मानवाधिकारों की प्रमुख पैरोकार नवनेथम 'नवी' पिल्लै को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर बधाई दी। उन्होंने पिल्लै के लंबे सार्वजनिक जीवन और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए इस सम्मान को पूरी तरह योग्य बताया। थरूर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय न्याय, मानवाधिकारों और कानून के शासन को मजबूत करने के प्रति पिल्लै का समर्पण दुनियाभर के लोगों के लिए प्रेरणादायक है।नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने वर्ष 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नवी पिल्लै के नाम की घोषणा की है। समिति ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों को सम्मान का प्रमुख आधार बताया। इस घोषणा के बाद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए पिल्लै को बधाई दी और उनके योगदान को याद किया।
शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर दी बधाई
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक्स पर अपने संदेश में नवी पिल्लै के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि नवनेथम नवी पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर उन्हें गर्व है और वह इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हैं।थरूर ने अपने संदेश में कहा कि मानवाधिकारों, अंतरराष्ट्रीय न्याय और दुनियाभर में कानून के शासन को मजबूत करने के प्रति पिल्लै का जीवनभर का समर्पण उन सभी लोगों को प्रेरित करता है, जिन्होंने उनकी तरह संयुक्त राष्ट्र में सेवाएं दी हैं।उन्होंने इस सम्मान को पिल्लै के लिए पूरी तरह योग्य बताया। थरूर के बयान में पिल्लै की उपलब्धियों के साथ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में उनके योगदान के प्रति सम्मान भी दिखाई दिया।
नोबेल समिति ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रयासों को सराहा
नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने नवी पिल्लै को शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए वर्ष 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार का विजेता घोषित किया।समिति की घोषणा में पिल्लै के कार्यों को अंतरराष्ट्रीय न्याय और मानवाधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना गया। उनका लंबा सार्वजनिक जीवन न्यायिक जिम्मेदारियों और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहा है।अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्व केवल देशों के बीच विवादों के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकारों की रक्षा और गंभीर उल्लंघनों के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने से भी जुड़ा है।पिल्लै का नाम ऐसे न्यायविदों में शामिल है, जिन्होंने अपने पेशेवर जीवन में इन विषयों पर लगातार काम किया है।
दक्षिण अफ्रीका से अंतरराष्ट्रीय न्यायपालिका तक का सफर
नवी पिल्लै का जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ था। उन्होंने रंगभेद के दौर में कानून के क्षेत्र में अपना करियर शुरू किया। वर्ष 1967 में उन्होंने अपनी लॉ फर्म स्थापित की और भेदभाव का सामना करने वाले लोगों के अधिकारों के लिए काम किया।वर्ष 1995 में वह दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट में न्यायाधीश बनीं। इसके बाद उन्होंने रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2008 से 2014 तक वह संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रहीं।
युद्ध अपराधों और मानवाधिकारों के मामलों में निभाई भूमिका
नवी पिल्लै ने अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं में काम करते हुए युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार जैसे गंभीर मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयासों में योगदान दिया।नोबेल समिति ने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय कानून के विकास और न्यायिक संस्थाओं को मजबूत करने में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना है। समिति के अनुसार, कानून के माध्यम से संघर्षों का समाधान और पीड़ितों को न्याय दिलाने की व्यवस्था विश्व शांति के लिए आवश्यक है।
10 दिसंबर को ओस्लो में मिलेगा सम्मान
वर्ष 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के तहत नवी पिल्लै को 1.20 करोड़ स्वीडिश क्रोनर की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित किया जाएगा।नवी पिल्लै को यह सम्मान मिलने पर शशि थरूर ने उनके जीवनभर के समर्पण को याद किया है। उन्होंने अपने संदेश के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय न्याय और मानवाधिकारों की रक्षा में पिल्लै के योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया।भारतीय मूल की इस दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद की उपलब्धि ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों, न्यायिक जवाबदेही और कानून के शासन के महत्व को सामने रखा है।
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