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BC आरक्षण पर SC का बड़ा फैसला: आंध्र सरकार की अर्जी खारिज

Tara Tandi
9 Oct 2026 5:06 PM IST
BC आरक्षण पर SC का बड़ा फैसला: आंध्र सरकार की अर्जी खारिज
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नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश सरकार को एक झटका देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उसकी उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसने स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों (BCs) के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण को रद्द कर दिया था।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने राज्य सरकार द्वारा BC कोटा बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए गए डेटा, खासकर 'यूनिफाइड फैमिली सर्वे' के नतीजों के कानूनी आधार पर सवाल उठाए।
आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से पेश सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि हाई कोर्ट के पास डेटा को अविश्वसनीय मानकर खारिज करने का कोई कारण नहीं था। हालांकि, जस्टिस दत्ता की अगुवाई वाली बेंच ने राज्य सरकार से यह दिखाने को कहा कि हाई कोर्ट ने यह मानने में कहां गलती की कि सर्वे का डेटा आरक्षण तय करने का आधार नहीं बन सकता।
याचिका खारिज करने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की, "आप हमें दिखाएं कि इस डेटा पर विचार किया जा सकता है। यह 'यूनिफाइड फैमिली सर्वे' है -- यह किस कानून के तहत किया जा रहा है?" कोर्ट ने बढ़े हुए आरक्षण को सही ठहराने के लिए सर्वे डेटा पर निर्भर रहने के कानूनी आधार पर सवाल उठाए।
1 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों में BCs के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण देने वाले दो सरकारी आदेशों को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि यह कोटा कुल आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा का उल्लंघन करता है।
हाई कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, स्थानीय निकायों में सभी श्रेणियों के लिए कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
यह फैसला चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार के लिए एक झटका था, क्योंकि स्थानीय निकायों में BC आरक्षण को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 34 प्रतिशत करना 2024 के विधानसभा चुनावों के दौरान उनके मुख्य वादों में से एक था।
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 18 अगस्त को बढ़े हुए कोटे की घोषणा की थी और कहा था कि BCs को ग्रामीण स्थानीय निकायों में 34 प्रतिशत और शहरी स्थानीय निकायों में 33.33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद, CM नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तुरंत सुप्रीम कोर्ट जाकर इस फैसले को चुनौती दें। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को छह हफ़्ते के अंदर स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश भी दिया था। कोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जिनमें मांग की गई थी कि चुनाव तभी कराए जाएं जब राज्य में मतदाता सूची का चल रहा 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) पूरा हो जाए।
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