WUC के वैश्विक अभियान को तेज़ करने के बीच, यूरोप और कनाडा ने उइगरों के दमन को लेकर चीन पर दबाव बढ़ाया

Munich : वर्ल्ड उइगर कांग्रेस ने अपनी मासिक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें चीन द्वारा उइगर लोगों के साथ किए जा रहे बर्ताव के खिलाफ चलाए जा रहे अपने अंतरराष्ट्रीय अभियान पर रोशनी डाली गई है। इस अभियान के तहत पूरे यूरोप और कनाडा में एक महीने तक जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसका मुख्य फोकस कथित नरसंहार, सीमा पार दमन और पूर्वी तुर्किस्तान से जुड़े जबरन श्रम के मुद्दों पर था।
बेल्जियम और जर्मनी में हुई बैठकों की एक श्रृंखला के दौरान, WUC के प्रतिनिधियों ने यूरोपीय संघ के अधिकारियों, यूरोपीय संसद के सदस्यों और EU सदस्य देशों के नीति निर्माताओं के साथ बातचीत की। उन्होंने चीन की उन नीतियों के खिलाफ और अधिक सख्त तथा समन्वित कार्रवाई करने की अपील की, जो उइगर लोगों को निशाना बनाती हैं।
WUC ने अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में प्रवेश करने वाले, जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों के खिलाफ और अधिक मजबूत सुरक्षा उपायों की मांग की। साथ ही, उसने यूरोपीय सरकारों पर इस बात के लिए दबाव डाला कि वे चीन द्वारा उइगर समुदायों के कथित व्यवस्थित उत्पीड़न का डटकर मुकाबला करें।
इस जागरूकता अभियान का समापन यूरोपीय संसद में एक प्रस्ताव पारित होने के साथ हुआ, जिसमें चीन के "जातीय एकता और प्रगति संवर्धन कानून" की कड़ी निंदा की गई। आलोचकों का तर्क है कि यह कानून उइगर और तिब्बती क्षेत्रों में जबरन आत्मसातीकरण और सांस्कृतिक पहचान को मिटाने की प्रक्रिया को संस्थागत रूप प्रदान करता है।
कनाडा में, WUC के उपाध्यक्ष ने 'अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों पर कनाडाई उप-समिति' के समक्ष पेश होकर चीन की कथित सीमा पार दमन की रणनीतियों के बारे में गवाही दी। इस गवाही में विदेशों में रह रहे उइगर प्रवासी समुदायों को झेलनी पड़ रही धमकियों, निगरानी और उत्पीड़न की घटनाओं को उजागर किया गया। साथ ही, ओटावा (कनाडा सरकार) से यह अपील की गई कि वह इन समुदायों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत करे तथा चीनी अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही तय करने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
WUC के वरिष्ठ अधिकारियों ने कनाडाई सांसदों से भी मुलाकात की, ताकि ऐसे कानून पर चर्चा की जा सके जो जबरन श्रम के माध्यम से उत्पादित वस्तुओं को कनाडाई बाजारों में प्रवेश करने से रोक सके। 'बिल C-251' पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान, WUC के प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि पूर्वी तुर्किस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े आयात को रोकने के लिए सख्त प्रवर्तन तंत्र (enforcement mechanisms) की आवश्यकता है।
इस बीच, WUC के पूर्व अध्यक्ष डोलकुन ईसा ने न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मंच को 'मानवाधिकार संवाद' के ढांचे के तहत संबोधित किया। बताया जाता है कि जब ईसा ने उइगर मुद्दे पर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं, तो वहां मौजूद चीनी प्रतिनिधियों ने उन्हें "अलगाववादी" और "आतंकवादी" कहकर उनकी कड़ी निंदा की।
बाद में बर्लिन में, ईसा ने 'हर्टी स्कूल' में चीन के विवादास्पद 'जातीय एकता कानून' पर अपने विचार रखे। उन्होंने चेतावनी दी कि यह कानून लंबे समय से चले आ रहे दमन को औपचारिक रूप देने और उइगर तथा तिब्बती लोगों के जबरन आत्मसातीकरण की प्रक्रिया को और तेज करने का प्रयास करता है। इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों, कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया, ताकि मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून के संदर्भ में बीजिंग की नीतियों के व्यापक प्रभावों का गहन विश्लेषण किया जा सके।





