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Earthquake : भूकंप के झटके से रुका म्यांमार का युद्ध!

Uma Verma
3 April 2025 3:38 PM IST
Earthquake : भूकंप के झटके से रुका म्यांमार का युद्ध!
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म्यांमार | म्यांमार में पिछले कई वर्षों से जारी गृह युद्ध को रोकने के लिए न कोई कूटनीतिक डील हुई, न ही किसी वैश्विक ताकत ने दबाव डाला, बल्कि एक भूकंप के झटके ने हालात बदल दिए। 7.7 तीव्रता के खतरनाक भूकंप के बाद म्यांमार की सैन्य सरकार जुंटा ने 22 अप्रैल तक अस्थायी संघर्ष विराम की घोषणा कर दी है। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि राहत और बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए और लोगों को मदद पहुंचाई जा सके।

भूकंप के बाद लिया गया फैसला

म्यांमार के कई हिस्सों में आए भूकंप ने विनाशकारी असर डाला। कई घर तबाह हो गए, सड़कें बर्बाद हो गईं और हजारों लोग प्रभावित हुए। ऐसे में जुंटा सरकार ने फैसला किया कि सेना और विद्रोही गुटों के बीच चल रही लड़ाई को फिलहाल रोक दिया जाए ताकि राहत अभियान चलाने में दिक्कत न हो। यह फैसला अचानक लिया गया और किसी बाहरी दबाव या शांति वार्ता का नतीजा नहीं था।

कई सालों से जारी है गृह युद्ध

म्यांमार में 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद से गृह युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। सेना और विद्रोही गुटों के बीच लगातार झड़पें हो रही हैं, जिसमें हजारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों बेघर हो गए हैं। सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी है, लेकिन अब तक कोई ठोस शांति वार्ता नहीं हुई थी। ऐसे में अचानक संघर्ष विराम की घोषणा सबको चौंकाने वाली रही।

क्या शांति बनी रहेगी?

अस्थायी संघर्ष विराम की घोषणा से लोगों को राहत तो मिलेगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह युद्ध को स्थायी रूप से रोक पाएगा? म्यांमार के विद्रोही गुटों ने अब तक संघर्ष विराम पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। अगर राहत कार्यों के बाद सेना फिर से हमले शुरू करती है, तो यह केवल एक छोटा ब्रेक साबित होगा।

भूकंप के अलावा कोई और कारण?

कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि म्यांमार सरकार ने भूकंप को एक बहाने की तरह इस्तेमाल किया है। देश की अर्थव्यवस्था चरमरा चुकी है और सेना पर लगातार दबाव बढ़ रहा था। ऐसे में यह संघर्ष विराम एक रणनीतिक चाल भी हो सकता है ताकि सरकार को थोड़ा वक्त मिल सके।

आगे क्या होगा?

अब सबकी नजर इस पर है कि 22 अप्रैल के बाद क्या संघर्ष विराम बढ़ेगा या युद्ध फिर से शुरू होगा? अगर दोनों पक्ष इस मौके का इस्तेमाल शांति वार्ता के लिए करते हैं, तो यह म्यांमार में स्थायी शांति की ओर एक बड़ा कदम हो सकता है। वरना यह बस एक अस्थायी राहत बनकर रह जाएगा।

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