पाकिस्तान में निष्क्रिय कानूनों और व्यवस्था की विफलता के कारण बच्चों का बड़े पैमाने पर शोषण हो रहा

Rawalpindi : 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर 'बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस' मनाने के बावजूद, पाकिस्तान में बच्चों का बड़े पैमाने पर शोषण जारी है। इससे देश के कानूनों और उन्हें लागू करने के तरीकों की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के मुताबिक, देश भर में बाल श्रम की समस्या गहराई तक फैली हुई है। बच्चों को आर्थिक शोषण से बचाने के अंतरराष्ट्रीय वादों को पूरा करने की दिशा में बहुत कम प्रगति हुई है।
हालांकि इस मौके पर सरकारी कार्यक्रम और जागरूकता अभियान चलाए गए, लेकिन आलोचकों का कहना है कि बाल श्रम को खत्म करने के लिए व्यावहारिक कदम अभी भी नदारद हैं।रावलपिंडी और इस्लामाबाद में 10 से 15 साल की उम्र के बच्चे अभी भी मोटरसाइकिल रिपेयर शॉप, गाड़ियों की वर्कशॉप, सड़क किनारे बने खाने-पीने के स्टॉल, टायर पंचर की दुकानों और अन्य अनौपचारिक व्यवसायों में काम करते हुए आम तौर पर देखे जाते हैं।
इनमें से कई बच्चे स्कूल जाने के बजाय खतरनाक हालात में लंबे समय तक काम करते हैं।लड़कियों के लिए भी स्थिति उतनी ही चिंताजनक है।अक्सर आठ साल तक की छोटी लड़कियों को सड़कों से कार्डबोर्ड, प्लास्टिक की बोतलें, कबाड़ और हड्डियां जैसी दोबारा इस्तेमाल होने लायक चीजें इकट्ठा करते देखा जा सकता है, जबकि वे अपने वजन से कहीं ज्यादा भारी बोझ उठाए होती हैं।कई लड़कियां फटे-पुराने कपड़ों में काम करती हैं और उन्हें गंभीर सामाजिक और आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।घरेलू काम करने वाले बच्चों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें भी लगातार सामने आती रहती हैं।
घरों में काम करने वाली लड़कियों के साथ शारीरिक हिंसा, जबरन बाल काटने और यौन उत्पीड़न के मामलों में अक्सर पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई जाती हैं।
खबरों के मुताबिक, प्रभावशाली अधिकारियों और न्यायपालिका के सदस्यों के घरों में भी बाल श्रम होता है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।सरकार की पहलों - जिनमें बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानून, भीख मांगने के खिलाफ कानून और बाल कल्याण संस्थानों की स्थापना शामिल है - को भारी फंड मिलने के बावजूद सीमित नतीजे ही मिले हैं।
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार, बच्चों का भीख मांगना, कचरा बीनना और खतरनाक क्षेत्रों में काम करना अभी भी बड़े पैमाने पर जारी है।
इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) ने बार-बार बाल श्रम की वैश्विक चुनौती को उजागर किया है और इस संदेश को बढ़ावा दिया है कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है।
हालांकि, 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में लाखों बच्चे - जिनमें पाकिस्तान के भी काफी बच्चे शामिल हैं - अभी भी मुश्किल और अक्सर खतरनाक हालात में काम कर रहे हैं।





