
वर्ल्ड | ट्रंप सरकार ने शिक्षक प्रशिक्षण फंड में कटौती करने के अपने फैसले पर अडिग रहते हुए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मांगी है। इससे पहले, एक संघीय जज ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिससे सरकार को झटका लगा था।
क्या है मामला?
ट्रंप प्रशासन ने शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए फंडिंग में भारी कटौती करने का प्रस्ताव दिया था। सरकार का तर्क है कि कई फंड गैर-जरूरी हैं और राज्य सरकारों को खुद शिक्षा का वित्तपोषण करना चाहिए।
हालांकि, शिक्षक संघों और शिक्षा विशेषज्ञों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम बताया और अदालत में चुनौती दी।
संघीय जज ने क्यों लगाई थी रोक?
पिछले महीने एक संघीय जज ने ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को गैर-कानूनी बताते हुए इस पर अस्थायी रोक लगा दी थी। अदालत ने कहा कि यह कटौती लाखों शिक्षकों और प्रशिक्षुओं पर सीधा असर डालेगी और इसे बिना व्यापक समीक्षा के लागू नहीं किया जा सकता।
ट्रंप प्रशासन का रुख
ट्रंप प्रशासन ने इस रोक को संविधान के खिलाफ बताया और सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी। सरकार का कहना है कि "कार्यपालिका को बजट तय करने का अधिकार है और अदालत इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।"
विरोध बढ़ा
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शिक्षक संघों ने कहा कि इस कटौती से शिक्षकों की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
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डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसे शिक्षा विरोधी नीति करार दिया।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर शिक्षा क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं।
आगे क्या?
अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला देती है, तो शिक्षा फंड में भारी कटौती हो सकती है, जिससे अमेरिका के कई राज्यों में शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभावित होंगे। वहीं, अगर अदालत फंडिंग बचाने का फैसला करती है, तो ट्रंप सरकार को बड़ा झटका लगेगा।





