
पाकिस्तान में एक और बड़ा आतंकी मारा गया, लेकिन क्या यह सिर्फ एक हत्या है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी है? लश्कर-ए-तैयबा का खूंखार आतंकी अबू कताल, जो हाफिज सईद का करीबी माना जाता था, अब इस दुनिया में नहीं रहा। पाकिस्तान के रावलपिंडी में अज्ञात हमलावरों ने उसे मौत के घाट उतार दिया। यह वही अबू कताल था, जो जम्मू-कश्मीर में कई बड़े आतंकी हमलों को अंजाम दे चुका था। लेकिन उसकी मौत के पीछे कौन है? क्या यह आतंकी संगठनों के बीच आपसी दुश्मनी का नतीजा है, या फिर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने ही उसे रास्ते से हटा दिया?
क्या यह पाकिस्तान की रणनीति का हिस्सा है?
पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को समर्थन देने के आरोपों से घिरा रहा है, लेकिन अब वहां के ही आतंकी मारे जा रहे हैं। हाल के महीनों में कई आतंकियों की हत्या हुई है। क्या पाकिस्तान अब अपने ही बनाए आतंकियों को खत्म करने की रणनीति पर काम कर रहा है? यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि अबू कताल जैसे आतंकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि खराब कर रहे थे।
आतंकी गुटों में बढ़ते मतभेद?
अबू कताल की हत्या से यह भी संकेत मिलता है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के बीच टकराव बढ़ रहा है। लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और अन्य गुट आपसी वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, अबू कताल की हत्या किसी प्रतिद्वंद्वी गुट ने ही करवाई हो सकती है।
भारत पर क्या असर होगा?
अबू कताल की मौत भारत के लिए राहत की खबर हो सकती है, क्योंकि वह जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड था। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या उसकी मौत से आतंकवाद में कमी आएगी, या फिर उसकी जगह कोई और आतंकी लेगा? भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अब इस घटना के बाद सतर्क हो गई हैं और यह देखने में जुटी हैं कि इसका आतंकवादी नेटवर्क पर क्या असर पड़ता है।
निष्कर्ष
अबू कताल की हत्या पाकिस्तान में हो रहे बदलावों की ओर इशारा कर रही है। यह एक आतंकी की मौत से ज्यादा, पाकिस्तान में आतंकियों की बदलती स्थिति और रणनीति का संकेत है। अब देखना होगा कि यह सिर्फ एक घटना थी या फिर आतंकवाद के खिलाफ कोई बड़ा ऑपरेशन चलाया जा रहा है।





