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लाओस में चीन की बढ़ती मौजूदगी, 8 जेट दिखने से हलचल

Ashish verma
8 Oct 2026 4:06 PM IST
लाओस में चीन की बढ़ती मौजूदगी, 8 जेट दिखने से हलचल
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लाओस : दक्षिण पूर्व एशिया में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। चीन ने लाओस में एक नया संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया है, जहां आठ हल्के लड़ाकू विमान और दो दर्जन से अधिक सैन्य सहायता वाहन दिखाई दिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस स्थान पर चीन ने नया सैन्य केंद्र विकसित किया है, उसका इस्तेमाल वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए से जुड़ी गतिविधियों के लिए किया जाता था। सैटेलाइट तस्वीरों में चीनी निर्मित K-8 विमानों की मौजूदगी सामने आने के बाद सुरक्षा विशेषज्ञ इसे दक्षिण पूर्व एशिया में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव का संकेत मान रहे हैं। इस घटनाक्रम पर वियतनाम और थाईलैंड जैसे पड़ोसी देशों की भी नजर है। हालांकि, चीन का दावा है कि यह केंद्र केवल सैन्य प्रशिक्षण और सहयोग के लिए बनाया गया है तथा इसका उद्देश्य किसी तीसरे देश को निशाना बनाना नहीं है।
लाओस में चीन के नए ठिकाने की सैटेलाइट तस्वीरें आईं सामने
रिपोर्ट के मुताबिक, लाओस की राजधानी वियनतियाने से लगभग 50 किलोमीटर दूर बान क्यून क्षेत्र में चीन और लाओस ने संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण केंद्र बनाया है।चीन के रक्षा मंत्रालय ने 29 सितंबर 2026 को इस केंद्र की स्थापना की घोषणा की थी। इसके ठीक अगले दिन 30 सितंबर को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में वहां सैन्य विमान और वाहनों की मौजूदगी देखी गई।
व्यावसायिक सैटेलाइट कंपनी वैंटोर की तस्वीरों का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों ने आठ K-8 हल्के लड़ाकू और प्रशिक्षण विमानों की पहचान की है।तस्वीरों में दो दर्जन से अधिक सैन्य सहायता वाहन भी दिखाई दिए हैं। इसके अलावा रनवे और आसपास के इलाकों में निर्माण कार्य जारी होने के संकेत मिले हैं।
अमेरिका की खुफिया गतिविधियों से जुड़ा था यह इलाका
इस सैन्य केंद्र का इतिहास भी काफी दिलचस्प है। वियतनाम युद्ध के दौरान बान क्यून हवाई क्षेत्र को 'लीमा साइट 44' के नाम से जाना जाता था।उस समय अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए से जुड़ी एयर अमेरिका कंपनी इस हवाई पट्टी का इस्तेमाल करती थी।ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस क्षेत्र से हेलीकॉप्टरों और विमानों के जरिए अमेरिका समर्थित हमोंग लड़ाकों तथा सैन्य सामग्री को अलग-अलग इलाकों तक पहुंचाया जाता था।
साल 1968 से यहां अमेरिकी गतिविधियों के प्रमाण मिलते हैं। अब उसी ऐतिहासिक स्थान पर चीन और लाओस का नया सैन्य प्रशिक्षण केंद्र विकसित किया जा रहा है।हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि चीन ने किसी वर्तमान अमेरिकी सैन्य अड्डे पर कब्जा किया है। यह दशकों पहले इस्तेमाल किया गया हवाई क्षेत्र था।
आठ K-8 विमानों की मौजूदगी ने बढ़ाई हलचल
सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई देने वाले विमान चीनी निर्मित होंगडू JL-8 बताए जा रहे हैं, जिन्हें K-8 के नाम से भी जाना जाता है।इन विमानों का विकास चीन और पाकिस्तान के सहयोग से किया गया था। K-8 दो सीटों वाला विमान है, जिसका उपयोग सैन्य पायलटों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जाता है।
इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर इसे हल्के हमलावर विमान के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के विमान बम ले जाने में सक्षम हो सकते हैं।हालांकि, तस्वीरों से यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वहां मौजूद सभी विमान चीन की वायुसेना के हैं या लाओस की वायुसेना के। दोनों देश K-8 विमानों का इस्तेमाल करते हैं।
क्या चीन बना रहा है दक्षिण पूर्व एशिया में बड़ा सैन्य बेस?
चीन ने आधिकारिक तौर पर इस केंद्र को संयुक्त सहायता और प्रशिक्षण केंद्र बताया है।लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस ठिकाने का इस्तेमाल व्यापक सैन्य गतिविधियों के लिए भी किया जा सकता है।सिंगापुर स्थित सुरक्षा विशेषज्ञ कॉलिन कोह के अनुसार, यह केंद्र दक्षिण पूर्व एशिया में चीन का महत्वपूर्ण विदेशी सैन्य ठिकाना बन सकता है।
विशेषज्ञ अब यह देख रहे हैं कि यहां भविष्य में वायु रक्षा प्रणाली, हथियारों के भंडारण, ईंधन सुविधाओं और निगरानी उपकरणों का निर्माण होता है या नहीं।यदि ऐसी सुविधाएं विकसित की जाती हैं, तो केंद्र की भूमिका केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रह सकती।हालांकि, अभी इसे पूर्ण विकसित स्थायी चीनी सैन्य अड्डा घोषित करना जल्दबाजी होगी।
वियतनाम के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
लाओस की भौगोलिक स्थिति के कारण चीन का नया सैन्य केंद्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।लाओस की सीमा चीन, वियतनाम,
थाईलैंड
, कंबोडिया और म्यांमार से मिलती है।वियतनाम लंबे समय से दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर सतर्क रहा है।चीन ने दक्षिण चीन सागर में कई विवादित द्वीपों और समुद्री क्षेत्रों में सैन्य ढांचे विकसित किए हैं।अब लाओस में नया प्रशिक्षण केंद्र बनने से वियतनाम के पश्चिमी पड़ोस में भी चीन की सैन्य मौजूदगी बढ़ने की संभावना पर चर्चा हो रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वियतनाम के लिए लाओस एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पड़ोसी है। इसलिए चीन और लाओस के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग हनोई की सुरक्षा गणनाओं को प्रभावित कर सकता है।हालांकि, वियतनाम की ओर से इस नए केंद्र को लेकर किसी प्रत्यक्ष सैन्य खतरे की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
थाईलैंड भी रख रहा है गतिविधियों पर नजर
चीन के नए सैन्य केंद्र को लेकर थाईलैंड भी घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।थाईलैंड और लाओस के बीच लंबी सीमा है। ऐसे में लाओस में विदेशी सैन्य गतिविधियों का विस्तार बैंकॉक के लिए महत्वपूर्ण विषय है।हालांकि, थाईलैंड ने लाओस के फैसले को उसकी संप्रभुता से जुड़ा मामला माना है।
थाईलैंड का रुख यह संकेत देता है कि वह फिलहाल इस परियोजना को लेकर सीधे टकराव की स्थिति नहीं बनाना चाहता।सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, सैन्य केंद्र का भविष्य में किस तरह इस्तेमाल होता है, यह पड़ोसी देशों की प्रतिक्रिया तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
रनवे का विस्तार भी बना चर्चा का विषय
सैटेलाइट तस्वीरों में नए केंद्र पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य दिखाई दिया है।रिपोर्ट के अनुसार, यहां पक्का रनवे, टैक्सीवे और कई नई इमारतें बनाई गई हैं।विशेषज्ञों का अनुमान है कि भविष्य में रनवे का विस्तार किया जा सकता है, जिससे बड़े सैन्य विमानों के संचालन की क्षमता बढ़ सकती है।हालांकि, वर्तमान ढांचा किस प्रकार के विमानों और कितनी बड़ी सैन्य गतिविधियों को संभाल सकेगा, इसे लेकर अलग-अलग आकलन हैं।कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यहां निगरानी और सैन्य परिवहन विमानों के संचालन की संभावना बन सकती है।फिलहाल ऐसे उपयोग की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
चीन ने कहा, किसी देश के खिलाफ नहीं है सैन्य केंद्र
चीन के रक्षा मंत्रालय ने इस परियोजना को लाओस के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की पहल बताया है।बीजिंग का कहना है कि संयुक्त प्रशिक्षण केंद्र का उद्देश्य लाओस के वायुसेना पायलटों को प्रशिक्षण देना और सैन्य सहयोग को मजबूत करना है।चीन ने स्पष्ट किया है कि यह केंद्र किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं बनाया गया है।
लाओस और चीन के बीच पहले से आर्थिक, राजनीतिक और रक्षा संबंध हैं। दोनों देशों ने
संयुक्त
सैन्य अभ्यास भी किए हैं।अब नया प्रशिक्षण केंद्र उनके सैन्य सहयोग में एक महत्वपूर्ण विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिका और चीन की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पर नजर
दक्षिण पूर्व एशिया में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी अमेरिका के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।चीन पहले से अफ्रीकी देश जिबूती में सैन्य सहायता केंद्र संचालित करता है। इसके अलावा कंबोडिया के रीम नौसैनिक अड्डे पर भी उसका सहयोग और समर्थन केंद्र मौजूद है।लाओस में नया प्रशिक्षण केंद्र स्थापित होने से क्षेत्र में चीन की सैन्य पहुंच बढ़ सकती है।हालांकि, इस केंद्र की वास्तविक सैन्य क्षमता और भविष्य की भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है।
फिलहाल सैटेलाइट तस्वीरों ने इतना जरूर दिखाया है कि चीन और लाओस की संयुक्त सैन्य परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। अब इस बात पर नजर रहेगी कि इसका इस्तेमाल केवल प्रशिक्षण के लिए होता है या आने वाले समय में यहां व्यापक सैन्य सुविधाएं विकसित की जाती हैं।
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