
Taipei : ताइवान, चीन की उस बदलती रणनीति का मुकाबला करने के लिए नागरिक एजेंसियों और सरकारी संस्थानों के बीच तालमेल को मज़बूत कर रहा है, जिसे अधिकारी ताइवान की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश बताते हैं। 'द ताइपे टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, उप गृह मंत्री मा शिह-युआन ने कहा कि चीन मनोवैज्ञानिक और कानूनी युद्ध जैसी पारंपरिक युक्तियों से आगे बढ़कर अब ऐसे नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है, जिनका मकसद शासन-प्रशासन को बाधित करना और समाज को कमज़ोर करना है।
'द ताइपे टाइम्स' के अनुसार, ताइपे में एक नागरिक सुरक्षा सम्मेलन में बोलते हुए मा ने कहा कि "विस्थापन युद्ध" (dislocation warfare) का मकसद सरकारी कामकाज को ठप करना है, जबकि "क्षरण युद्ध" (erosion warfare) में ताइवान के समाज के भीतर गुपचुप तरीके से प्रभाव डालना और दखल देना शामिल है। उन्होंने मौजूदा विधायी गतिरोध को ऐसी युक्तियों का एक संभावित उदाहरण बताया। मा ने कहा कि अगर ताइवान के सशस्त्र बल, पुलिस, अग्निशमन दल और नागरिक सुरक्षा इकाइयाँ बिना किसी उचित तालमेल के अलग-अलग (silos में) काम करती रहीं, तो ताइवान हमेशा खतरे में रहेगा। इसके जवाब में, गृह मंत्रालय ने रूस द्वारा 2022 में यूक्रेन पर किए गए आक्रमण से सबक लेते हुए और कीव के प्रतिरोध मॉडल से प्रेरणा लेकर, एकीकृत परिचालन ढाँचों को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है।
उपराष्ट्रपति शियाओ बी-खिम ने भी इन चिंताओं को दोहराते हुए कहा कि यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक व्यवस्था को मौलिक रूप से बदल दिया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए पूरे समाज के सामूहिक प्रयास की ज़रूरत होती है, न कि सिर्फ़ राजनीतिक बयानबाज़ी की। रक्षा खर्च के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि असली सुरक्षा उन्नत तकनीकों और ज़मीन, समुद्र, हवा, साइबर स्पेस और अंतरिक्ष जैसे सभी क्षेत्रों में बहु-आयामी क्षमताओं में निवेश पर निर्भर करती है।
ताइवान की व्यापक रणनीति में घरेलू तकनीकी क्षमता को मज़बूत करना भी शामिल है, जिसे अधिकारी लंबी अवधि की रक्षा तैयारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं। उन्होंने कहा कि पर्याप्त धन के बिना, ज़रूरी रक्षा प्रणालियों को हासिल करना मुश्किल बना रहेगा।
उप विदेश मंत्री फ्रांकोइस वू ने कहा कि ताइवान के रक्षात्मक उपाय किसी डर से प्रेरित नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को बनाए रखने की प्रतिबद्धता से प्रेरित हैं। 'द ताइपे टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यूक्रेन के प्रति ताइवान के समर्थन को दोहराया और तानाशाही खतरों का सामना करने के लिए लोकतांत्रिक देशों के बीच एकता का आह्वान किया।
नागरिक समाज के नेताओं ने भी ज़मीनी स्तर पर मज़बूती (grassroots resilience) के महत्व पर प्रकाश डाला। मारिया मकारोविच ने बताया कि कैसे रोज़मर्रा की नागरिक सुरक्षा आक्रामकता को रोक सकती है, जबकि 'कुमा नागरिक सुरक्षा शिक्षा संघ' के लियू वेन ने कहा कि 2021 से अब तक लगभग 100,000 नागरिकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला कि सामाजिक मज़बूती का निर्माण करना ही चीन के बढ़ते दबाव के खिलाफ ताइवान की सबसे मज़बूत रक्षा है, जैसा कि 'द ताइपे टाइम्स' ने रिपोर्ट किया है। (ANI)





