ताइवान के युवाओं के लिए China का ‘ऑल-एक्सपेंस फोरम’, प्रभाव अभियान को लेकर बढ़ी चिंता

Taipei , ताइपे : बीजिंग, ग्वांगडोंग प्रांत में चल रहे 'क्रॉस-स्ट्रेट सन यात-सेन फोरम' में ताइवान के युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए वह आने-जाने के हवाई किराए को छोड़कर यात्रा का लगभग सारा खर्च उठाने की पेशकश कर रहा है। 'ताइपे टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम ने चीन की "यूनाइटेड फ्रंट" रणनीति को लेकर ताइवान में चिंताएं बढ़ा दी हैं। 'ताइपे टाइम्स' के अनुसार, पिछले शनिवार को शुरू हुए इस फोरम में 16 से 45 साल की उम्र के ताइवानी प्रतिभागियों को यात्रा का पूरा खर्च उठाने वाली ट्रिप (all-expenses-paid trip) की पेशकश की जा रही है।
प्रतिभागियों को केवल मकाऊ आने-जाने का हवाई किराया देना होता है, जबकि रहने, स्थानीय परिवहन और गतिविधियों का खर्च आयोजक उठाते हैं। 45 साल से अधिक उम्र वालों से 600 TWD की भागीदारी फीस ली जाती है। चीन के "यूनाइटेड फ्रंट" के काम से वाकिफ एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर चेतावनी दी कि ऐसे दौरों में अक्सर "रेड प्रोपेगैंडा बेस" (चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रचार वाले केंद्र) का दौरा शामिल होता है और इनका मकसद प्रतिभागियों को प्रभावित करना होता है।
अधिकारी ने 'ताइपे टाइम्स' से कहा, "सबसे सस्ती चीजें ही सबसे महंगी पड़ती हैं," और कहा कि ऐसे आदान-प्रदान कार्यक्रमों में प्रतिभागी अक्सर गुमराह करने वाली बातों के संपर्क में आते हैं। 'ताइपे टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, यात्रा कार्यक्रम में झुहाई लवर्स रोड, योंगकिंग फांग, झोंगशान शहर में सन यात-सेन मेमोरियल हॉल, झोंगशान झान गार्डन और जिउलोंगमेन आर्चवे का दौरा शामिल है। साथ ही, इसमें चीनी क्रांतिकारी राजनीतिक नेता सन यात-सेन की 160वीं जयंती मनाने के कार्यक्रम भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन के ताइवान मामलों के कार्यालय ने इस कार्यक्रम को सांस्कृतिक आदान-प्रदान के तौर पर बढ़ावा दिया है। प्रवक्ता झांग हान ने सन यात-सेन को एक साझा ऐतिहासिक हस्ती बताया है, जिनकी विरासत ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) के दोनों ओर के लोगों की है। हालांकि, तुंगहाई यूनिवर्सिटी के 'सेंटर फॉर मेनलैंड चाइना एंड रीजनल डेवलपमेंट रिसर्च' के डिप्टी हेड हंग पु-चाओ ने 'ताइपे टाइम्स' को बताया कि इस पहल का मकसद ताइवानी युवाओं के लिए चीन आने की बाधाओं को कम करना और धीरे-धीरे व्यक्तिगत नेटवर्क और भावनात्मक संबंध बनाना है। इसे भले ही सांस्कृतिक कार्यक्रम के तौर पर पेश किया जा रहा हो, लेकिन इसका व्यापक मकसद ताइवान की युवा पीढ़ी के साथ बीजिंग के जुड़ाव को बढ़ाना और साझा चीनी राष्ट्रीय पहचान का समर्थन करने वाली बातों को बढ़ावा देना है।
इन चिंताओं के बावजूद, हंग ने कहा कि किसी एक आदान-प्रदान कार्यक्रम के असर को बहुत ज़्यादा नहीं आंकना चाहिए, क्योंकि एक यात्रा से ताइवानी युवाओं की राष्ट्रीय पहचान में कोई खास बदलाव आने की संभावना नहीं है। 'ताइपे टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने ताइवान सरकार से विदेश में एक्सचेंज के मौकों को बढ़ाने का आग्रह किया। उनका तर्क था कि इससे युवाओं को बेहतर अनुभव मिलेगा और साथ ही बीजिंग की तरफ से किए जा रहे संपर्क बढ़ाने के प्रयासों का मुकाबला करने में भी मदद मिलेगी।





