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China ने तिब्बती इलाके में सख्ती बढ़ाई, पवित्र स्थलों को तोड़ा

Gulabi Jagat
17 Jun 2026 7:03 PM IST
China ने तिब्बती इलाके में सख्ती बढ़ाई, पवित्र स्थलों को तोड़ा
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Dharamshala : 'तिब्बत टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी अधिकारियों ने तथाकथित हैनान तिब्बती स्वायत्त प्रान्त (Hainan Tibetan Autonomous Prefecture) में एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस अभियान में तिब्बती धार्मिक प्रतीकों, सांस्कृतिक परंपराओं और स्थानीय सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह तिब्बतियों को चीनी राज्य के ढांचे में शामिल करने की एक तेज़ कोशिश है।

'तिब्बत टाइम्स' के मुताबिक, अप्रैल 2026 में इस प्रान्त के कम्युनिस्ट पार्टी सचिव के तौर पर चीनी अधिकारी शियोंग युआनलाई (Xiong Yuanlai) की नियुक्ति के बाद यह कार्रवाई और तेज़ हो गई। तब से, अधिकारियों ने चाबचा, त्रिका, मंगरा, बा और ड्रैगकर जैसे इलाकों में कई कदम उठाए हैं, जिससे स्थानीय तिब्बतियों में भारी परेशानी और बेचैनी है। सूत्रों ने बताया कि तिब्बती बौद्ध धर्म के अहम प्रतीक माने जाने वाले सैकड़ों पवित्र 'मणि पत्थर के ढेर' (Mani stone mounds) को योजनाबद्ध तरीके से नष्ट कर दिया गया और ज़मीन में दबा दिया गया।

खबरों के अनुसार, अधिकारियों ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जातीय नीतियों को बढ़ावा देकर और धार्मिक परंपराओं पर राज्य के अधिकार पर ज़ोर देकर इस अभियान को सही ठहराया है। एक सूत्र ने दावा किया कि इस इलाके में 90 प्रतिशत से ज़्यादा 'मणि पत्थर' के ढांचे पहले ही हटा दिए गए हैं।

यह कार्रवाई निजी घरों तक भी पहुँच गई है। कई समुदायों में प्रार्थना के झंडे, विंड-हॉर्स (wind-horse) झंडे और दरवाज़ों पर लगने वाले पारंपरिक बैनर फाड़कर जला दिए गए हैं। आरोप है कि निवासियों को अपनी छतों पर चीनी राष्ट्रीय ध्वज लगाने के लिए मजबूर किया गया है, जिससे इलाके के पुराने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक हट गए हैं।

स्थानीय सूत्रों ने यह भी बताया कि कई तिब्बती सरकारी कर्मचारियों को इस आधार पर नौकरी से निकाल दिया गया है कि सरकारी दफ्तरों में तिब्बतियों की संख्या ज़रूरत से ज़्यादा है। 'तिब्बत टाइम्स' के अनुसार, कई पदों पर चीनी मूल के अधिकारियों को नियुक्त किया गया है।

एक निवासी ने माहौल को डर और निराशा से भरा बताया। उन्होंने कहा कि नए पार्टी सचिव के आने के बाद से लोग सरकारी आदेशों का विरोध करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। उस व्यक्ति ने मौजूदा हालात की तुलना 1950 के दशक के आखिर में हुए दमन से की—एक ऐसा दौर जिसे कई तिब्बती भारी राजनीतिक उथल-पुथल और राज्य के कड़े नियंत्रण के लिए याद करते हैं।

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