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काबुल। पाकिस्तान के साथ तनाव और व्यापारिक रास्तों में बाधाओं के बीच अफगानिस्तान ईरान के चाबहार बंदरगाह के जरिए अपनी समुद्री पहुंच मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। ईरान और अफगानिस्तान के बीच हुई बातचीत में चाबहार में अफगान निवेश तथा व्यापारिक ढांचा विकसित करने के लिए जमीन उपलब्ध कराने पर शुरुआती सहमति की जानकारी सामने आई है। इस पहल का उद्देश्य अफगान कारोबारियों को समुद्र तक माल पहुंचाने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अतिरिक्त सुविधाएं देना है। हालांकि, इसे ईरान की जमीन अफगानिस्तान को सौंपने या वहां अफगान संप्रभु क्षेत्र बनाने का फैसला समझना सही नहीं होगा।
ईरानी सांसद मोहसिन जंगनेह ने शुरुआती बातचीत का उल्लेख करते हुए बताया था कि चाबहार बंदरगाह के तटीय हिस्से में लगभग 10 हेक्टेयर और उसके मुक्त आर्थिक क्षेत्र में करीब 100 हेक्टेयर जमीन अफगान निवेश के लिए उपलब्ध कराने की योजना है। उनके बयान के बाद जमीन हस्तांतरण को लेकर चर्चा शुरू हुई। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि मामला आर्थिक गतिविधियों और निवेश का है। ईरान की जमीन या संप्रभुता अफगानिस्तान को हस्तांतरित नहीं की गई है।
जंगनेह के स्पष्टीकरण के अनुसार, अफगानिस्तान संबंधित क्षेत्र में व्यापारिक बुनियादी ढांचा विकसित कर सकता है। इसमें माल के भंडारण और परिवहन से जुड़ी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। उन्होंने ड्राई पोर्ट जैसे ढांचे की संभावना का भी उल्लेख किया। तटीय जमीन की उपलब्धता सीमित होने के कारण अतिरिक्त क्षेत्र की मांग पर अंतिम सहमति नहीं होने की बात भी सामने आई है। इसलिए प्रस्ताव को पूरी तरह लागू हो चुकी व्यवस्था के बजाय शुरुआती आर्थिक समझ के रूप में देखना जरूरी है।
इस घटनाक्रम से पहले अफगानिस्तान के उद्योग और वाणिज्य मंत्री नूरुद्दीन अजीजी ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर बातचीत की थी। बैठक में चाबहार के जरिए सहयोग विस्तार, संयुक्त औद्योगिक कार्यक्रम, अफगानिस्तान में विशेष औद्योगिक पार्क और तेल उत्पादों की रिफाइनरी जैसे विषय शामिल थे। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार को 10 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर भी चर्चा की। यह लक्ष्य भविष्य की योजना है, वर्तमान व्यापार का आंकड़ा नहीं।
अजीजी ने बैठक में अफगानिस्तान के औद्योगिक विकास और घरेलू उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया। चर्चा में अफगान निर्यात बढ़ाने को भी महत्व दिया गया। इससे संकेत मिलता है कि चाबहार से जुड़ी पहल केवल माल उतारने और चढ़ाने तक सीमित नहीं है। दोनों देशों की बातचीत में उत्पादन, निवेश और व्यापारिक सुविधाओं का व्यापक विस्तार शामिल है। हालांकि, परियोजनाओं की लागत, समयसीमा और अंतिम अनुबंधों की पूरी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
अफगानिस्तान चारों ओर जमीन से घिरा देश है। समुद्री व्यापार के लिए उसे पड़ोसी देशों के बंदरगाहों और परिवहन मार्गों की जरूरत पड़ती है। पाकिस्तान के साथ सीमा बंद होने और आवाजाही प्रभावित होने से अफगान व्यापारियों को वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़े हैं। उपलब्ध व्यापारिक विवरण बताते हैं कि पाकिस्तान के मार्गों पर बाधाओं के दौरान माल की आवाजाही ईरान और मध्य एशियाई देशों की ओर बढ़ी। चाबहार इस वैकल्पिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
सीमा संबंधी रुकावटों का असर कृषि उत्पादों पर भी पड़ा है। अफगान फल उत्पादकों के लिए पाकिस्तान एक प्रमुख बाजार रहा है, लेकिन रास्ते बंद होने से निर्यात प्रभावित हुआ। अंगूर जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों को समय पर बाजार तक पहुंचाना विशेष चुनौती बन जाता है। ऐसी परिस्थितियों में अतिरिक्त व्यापारिक मार्ग उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है। फिर भी, नया बंदरगाह मार्ग उपयोगी होने के लिए परिवहन लागत, सुरक्षित आवाजाही और समय पर माल पहुंचने जैसी शर्तें पूरी करनी होंगी।
पाकिस्तान पर इस पहल के असर को लेकर फिलहाल निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। व्यापारिक दृष्टि से देखें तो यदि चाबहार के जरिए नियमित और सुविधाजनक आवाजाही बढ़ती है, तो अफगानिस्तान के पास पाकिस्तान से होकर जाने वाले रास्तों का विकल्प मजबूत होगा। यह उपलब्ध परिस्थितियों पर आधारित संभावित असर है। चाबहार की व्यवस्था पाकिस्तान के सभी मार्गों की जरूरत तुरंत समाप्त कर देगी, ऐसा कोई पुष्ट आधार नहीं है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच समस्याओं को बातचीत से सुलझाने की बात भी हाल में अफगान विदेश मंत्री ने कही है।
भारत के लिए चाबहार का महत्व अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक संपर्क से जुड़ा है। भारत ने मई 2024 में चाबहार के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास और संचालन संबंधी दीर्घकालिक अनुबंध किया था। उस समय बंदरगाह को अफगानिस्तान तथा व्यापक मध्य एशियाई क्षेत्र के साथ संपर्क बढ़ाने का प्रवेश द्वार बताया गया था। भारत पहले भी इस मार्ग से अफगानिस्तान को गेहूं और अन्य सहायता भेज चुका है।
अफगान कारोबारियों की चाबहार में सुविधाएं बढ़ने से भारत-अफगान व्यापार को अवसर मिल सकते हैं। यह संभावित लाभ वास्तविक माल ढुलाई, लागत और लागू व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा। अभी भारत को तत्काल आर्थिक फायदा होने का कोई नया पुष्ट आंकड़ा सामने नहीं आया है। फिलहाल मुख्य घटनाक्रम ईरान-अफगानिस्तान की निवेश संबंधी शुरुआती समझ है। इसकी वास्तविक अहमियत अंतिम समझौतों और व्यापारिक ढांचे के संचालन में आने के बाद स्पष्ट होगी।
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