
वर्ल्ड | कनाडा में अगले महीने समय से पहले आम चुनाव होने जा रहे हैं। यह फैसला राजनीतिक परिस्थितियों और मौजूदा सरकार पर बढ़ते दबाव के कारण लिया गया है। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी के लिए यह चुनाव अहम होगा, क्योंकि उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई है और विपक्षी दलों ने सरकार की नीतियों को लेकर कड़ी चुनौती पेश की है।
समय से पहले चुनाव क्यों हो रहे हैं?
कनाडा में आम चुनाव 2025 में होने थे, लेकिन कई राजनीतिक और आर्थिक कारणों के चलते इसे पहले कराने का निर्णय लिया गया है। कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
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जनता में असंतोष – हाल के महीनों में ट्रूडो सरकार की नीतियों को लेकर जनता में असंतोष बढ़ा है। खासकर, महंगाई और आवास संकट को लेकर उनकी नीतियों की आलोचना हो रही है।
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विपक्ष का दबाव – कंजरवेटिव पार्टी के नेता पियरे पोइलीवर सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।
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भारत-कनाडा तनाव – भारत और कनाडा के बीच हाल ही में खालिस्तानी मुद्दे को लेकर रिश्ते तनावपूर्ण हुए हैं। ट्रूडो सरकार के रुख पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं।
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अल्पमत सरकार की चुनौती – लिबरल पार्टी अल्पमत सरकार चला रही है और उसे कानून पास कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में, ट्रूडो को उम्मीद है कि जल्दी चुनाव कराकर वे पूर्ण बहुमत हासिल कर सकते हैं।
भारत को लेकर क्या सोचते हैं चुनावी दावेदार?
भारत-कनाडा संबंध इस चुनाव का एक बड़ा मुद्दा बन सकता है, खासकर खालिस्तानी तत्वों को लेकर ट्रूडो सरकार के रवैये के कारण।
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जस्टिन ट्रूडो (लिबरल पार्टी) – ट्रूडो की सरकार ने भारत के खिलाफ कुछ कड़े बयान दिए हैं, जिससे दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हुए हैं। खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर उनका रवैया भारत को नाराज कर चुका है।
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पियरे पोइलीवर (कंजरवेटिव पार्टी) – पोइलीवर भारत के साथ मजबूत व्यापार और कूटनीतिक संबंधों के पक्ष में हैं। वे ट्रूडो की नीतियों की आलोचना कर चुके हैं और भारत को एक अहम साझेदार मानते हैं।
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जगमीत सिंह (एनडीपी) – सिंह का झुकाव खालिस्तानी समर्थकों की ओर देखा गया है, जिससे वे भारत सरकार की नजरों में विवादित बने हुए हैं।
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यवॉन ब्लैंशेट (ब्लॉक क्यूबेक पार्टी) – इनका फोकस मुख्य रूप से क्यूबेक प्रांत की राजनीति पर रहता है, लेकिन वे भी भारत-कनाडा संबंधों को लेकर ट्रूडो सरकार की नीतियों पर सवाल उठा चुके हैं।
क्या कहती हैं ताजा राजनीतिक समीकरण?
चुनाव में मुख्य मुकाबला ट्रूडो की लिबरल पार्टी और पोइलीवर की कंजरवेटिव पार्टी के बीच रहने की संभावना है। एनडीपी और अन्य छोटी पार्टियां सरकार बनाने में किंगमेकर की भूमिका निभा सकती हैं।
भारत-कनाडा संबंधों पर इस चुनाव का असर पड़ सकता है। अगर कंजरवेटिव पार्टी सत्ता में आती है, तो भारत के साथ संबंधों में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। वहीं, अगर ट्रूडो फिर से जीतते हैं, तो रिश्तों में तनाव बना रह सकता है





