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GST कलेक्शन में बड़ा उछाल, 2.31 लाख करोड़ पहुंचा आंकड़ा
Rajeshwari Nishad
1 Nov 2026 3:27 PM IST

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बिज़नेस : देश की आर्थिक गतिविधियों के बीच अक्टूबर 2026 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन में शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। त्योहारी सीजन, घरेलू बाजार में खरीदारी और आयात से मिलने वाले टैक्स राजस्व में उछाल के बीच सरकार का खजाना भर गया है। वित्त मंत्रालय की ओर से 1 नवंबर 2026 को जारी अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में सकल जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर 22.9 प्रतिशत बढ़कर 2,31,290 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल अक्टूबर 2025 में यह आंकड़ा 1,88,000 करोड़ रुपये के आसपास था। खास बात यह है कि रिफंड को समायोजित करने के बाद शुद्ध जीएसटी राजस्व में इससे भी ज्यादा 25.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। नेट जीएसटी कलेक्शन बढ़कर 2,03,356 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1,61,000 करोड़ रुपये था।
अक्टूबर के ये आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था में कारोबारी गतिविधियों और टैक्स संग्रह की मजबूती को दर्शाते हैं। इस दौरान घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशों से होने वाले आयात पर भी टैक्स वसूली में तेजी आई। खासतौर पर आयात से प्राप्त जीएसटी राजस्व में 42.2 प्रतिशत की वृद्धि ने कुल कलेक्शन को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। अक्टूबर में जीएसटी संग्रह में आई तेजी को पिछले चार वर्षों से अधिक समय की सबसे तेज सालाना वृद्धि भी बताया जा रहा है।
चार साल से ज्यादा समय की सबसे तेज ग्रोथ
अक्टूबर 2026 में सकल जीएसटी कलेक्शन में 22.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह सितंबर 2026 में दर्ज 14.7 प्रतिशत की सालाना वृद्धि से काफी अधिक है। लगातार चौथे महीने जीएसटी कलेक्शन 2 लाख करोड़ रुपये के स्तर से ऊपर बना हुआ है।
इससे पहले अप्रैल 2026 में 2.43 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन दर्ज किया गया था। इसके बाद अक्टूबर का आंकड़ा चालू वित्त वर्ष का दूसरा सबसे बड़ा मासिक संग्रह है। कारोबारियों की बिक्री, उपभोक्ताओं की खरीदारी और आयात से जुड़ी गतिविधियों में तेजी को इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है।
अक्टूबर में नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण बाजारों में रौनक रही। इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, कपड़े, घरेलू सामान और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की खरीदारी में तेजी देखने को मिली। त्योहारी मांग का असर कारोबार और टैक्स संग्रह के आंकड़ों में भी दिखाई दिया। हालांकि, कुल वृद्धि में आयात से मिलने वाले टैक्स का योगदान भी काफी महत्वपूर्ण रहा।
आयात से टैक्स कमाई में 42.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी
अक्टूबर के जीएसटी आंकड़ों में सबसे बड़ी बात आयात से मिलने वाले राजस्व में आई तेजी है। आंकड़ों के मुताबिक, आयात से होने वाली जीएसटी वसूली सालाना आधार पर 42.2 प्रतिशत बढ़कर 72,246 करोड़ रुपये पहुंच गई। अक्टूबर 2025 में यह राशि 50,796 करोड़ रुपये थी।
दूसरी ओर, घरेलू गतिविधियों से मिलने वाला सकल जीएसटी राजस्व 15.8 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.59 लाख करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी अवधि में घरेलू जीएसटी संग्रह लगभग 1.37 लाख करोड़ रुपये था।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन की वृद्धि में घरेलू कारोबार के साथ आयात से जुड़े कर राजस्व का भी बड़ा योगदान रहा। आयात पर जीएसटी संग्रह में तेजी को देश में आयात आधारित व्यापारिक गतिविधियों के बढ़ने का संकेत माना जा सकता है। हालांकि, केवल आयात कर बढ़ने से घरेलू उत्पादन में समान अनुपात में वृद्धि का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
केंद्र और राज्यों को कितना मिला राजस्व?
अक्टूबर 2026 के कुल जीएसटी संग्रह में केंद्र और राज्यों की हिस्सेदारी भी महत्वपूर्ण रही। जारी आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) के रूप में 42,935 करोड़ रुपये जमा हुए। वहीं, राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) का संग्रह 51,340 करोड़ रुपये रहा।
एकीकृत जीएसटी (IGST) के तहत कुल संग्रह लगभग 1.37 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसमें घरेलू लेनदेन से प्राप्त आईजीएसटी की राशि 64,769 करोड़ रुपये रही, जबकि आयात से जुड़े आईजीएसटी का आंकड़ा 72,246 करोड़ रुपये था।
इस प्रकार अक्टूबर में केंद्र और राज्य सरकारों के लिए जीएसटी राजस्व का मजबूत आधार तैयार हुआ। जीएसटी व्यवस्था के तहत अलग-अलग मदों में मिलने वाला राजस्व केंद्र और राज्यों के बीच निर्धारित नियमों के अनुसार बांटा जाता है। इससे राज्यों को विकास कार्यों, सार्वजनिक सेवाओं और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
रिफंड बढ़ने के बावजूद नेट कलेक्शन में जोरदार उछाल
अक्टूबर के आंकड़ों में जीएसटी रिफंड की स्थिति भी महत्वपूर्ण रही। सरकार ने इस महीने कुल 27,934 करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड जारी किया। यह पिछले साल अक्टूबर के मुकाबले 6.5 प्रतिशत अधिक है। अक्टूबर 2025 में जीएसटी रिफंड की राशि 26,225 करोड़ रुपये थी।
रिफंड घटाने के बाद सरकार के पास बचने वाला शुद्ध जीएसटी राजस्व 2,03,356 करोड़ रुपये रहा। इसमें सालाना आधार पर 25.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सकल कलेक्शन की तुलना में नेट कलेक्शन की वृद्धि अधिक रहने से पता चलता है कि रिफंड के समायोजन के बाद भी सरकार की टैक्स प्राप्तियां मजबूत बनी हुई हैं।
कारोबारियों को निर्यात और अन्य निर्धारित श्रेणियों में नियमों के अनुसार जीएसटी रिफंड मिलता है। इसलिए सकल और शुद्ध जीएसटी संग्रह के बीच अंतर समझना जरूरी है।
अप्रैल से अक्टूबर तक 14.77 लाख करोड़ का कलेक्शन
चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती सात महीनों में भी जीएसटी संग्रह की स्थिति मजबूत बनी हुई है। अप्रैल से अक्टूबर 2026 के बीच कुल सकल जीएसटी कलेक्शन 14,77,569 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 13.2 प्रतिशत अधिक है।
वहीं, इसी अवधि में नेट जीएसटी कलेक्शन लगभग 12.69 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें सालाना आधार पर करीब 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि केवल अक्टूबर में ही नहीं, बल्कि पूरे वित्त वर्ष के दौरान टैक्स संग्रह की रफ्तार सकारात्मक बनी हुई है।
अर्थव्यवस्था के लिए क्या हैं इन आंकड़ों के मायने?
जीएसटी कलेक्शन में लगातार बढ़ोतरी सरकार की राजस्व स्थिति के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे केंद्र और राज्य सरकारों को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और विकास से जुड़ी योजनाओं पर खर्च करने के लिए वित्तीय संसाधन मिलते हैं।
हालांकि, जीएसटी संग्रह में बढ़ोतरी को ही अर्थव्यवस्था की संपूर्ण सेहत का पैमाना नहीं माना जा सकता। इसके साथ औद्योगिक उत्पादन, रोजगार, महंगाई, घरेलू खपत और निवेश के आंकड़ों को भी देखना जरूरी है।
फिलहाल अक्टूबर 2026 के जीएसटी आंकड़ों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कारोबारी गतिविधियों और टैक्स संग्रह को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश की है। अब आने वाले महीनों के आंकड़े बताएंगे कि त्योहारी सीजन में मिली यह तेजी आगे भी बरकरार रहती है या नहीं।
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