
विश्व की बड़ी खबर. बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने कहा कि उसने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर अपना पहला समुद्री हमला किया है और कोस्ट गार्ड के तीन सैनिकों को मार गिराया है. बलूच विद्रोहियों ने बलूचिस्तान के एक तटीय शहर, जिवानी के पास यह हमला किया. BLA के इस हमले में अरब सागर में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड की एक गश्ती नाव को निशाना बनाया गया, जो इस समूह की ऑपरेशनल रणनीति में एक अहम बदलाव का संकेत है.
BLA की मीडिया विंग, 'हक्कल' द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में बलूच विद्रोही एक स्पीड बोट पर सवार होकर पाकिस्तानी सैनिकों पर मशीन गन से ताबड़तोड़ गोलियां बरसाते हुए दिखाई दे रहे हैं. पाकिस्तान स्थित न्यूज पोर्टल 'The Balochistan Post' (TBA) के मुताबिक, BLA के हथियारबंद लड़ाकों ने रविवार को उस समय नाव पर गोलीबारी की, जब वह पाकिस्तान-ईरान समुद्री सीमा के पास नियमित गश्त पर थी. इस हमले में नाव पर सवार कोस्ट गार्ड के तीन जवान मारे गए. पाकिस्तानी खुफिया और पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जब हथियारबंद बलूच विद्रोहियों ने गोलीबारी शुरू की, तब वह नाव पाकिस्तान-ईरान सीमा के करीब तटीय इलाके में गश्त कर रही थी.
BLA ने दावा किया है कि नाव पर सवार तीनों जवान मारे गए और उनकी पहचान नायक अफजल, सिपाही जमील और सिपाही उमर के रूप में की गई है. 'TBA' ने रविवार को दो मिनट से ज्यादा लंबे इस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि करते हुए बताया कि इसे BLA की मीडिया विंग 'हक्कल' द्वारा शेयर किया गया था.
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने एक बयान में कहा कि उसने जिवानी के पास एक जहाज़ को निशाना बनाया है और इस ऑपरेशन को 'समुद्री इलाकों में अपनी ऑपरेशनल पहुंच का विस्तार' बताया. BLA ने इस हमले को अपने विद्रोह के एक नए दौर की शुरुआत बताया, जो ज़मीन पर होने वाले अपने पारंपरिक ऑपरेशनों से आगे बढ़कर समुद्री क्षेत्र में कदम रखने का संकेत है. TBA की रिपोर्ट के मुताबिक, BLA के प्रवक्ता जियांद बलूच ने इस कदम को ज़मीन पर हुए ऑपरेशनों के बाद, समूह की रणनीति में एक 'नया और अहम बदलाव' बताया. न्यूज़ आउटलेट ने यह भी बताया कि उन्होंने कहा कि इसका मकसद 'समुद्री रास्तों से बलूच संसाधनों की लूट को रोकना और दुश्मन को हर मोर्चे पर नुकसान पहुंचाना' है. यह हमला ग्वादर के पास हुआ, जो चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़ा एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह है. इस हमले से इलाके में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं.





