
Geneva , जिनेवा : संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 62वें सत्र के दौरान जिनेवा प्रेस क्लब में "जबरन धर्म-परिवर्तन और अल्पसंख्यक महिलाएं" (Forced Conversions & Minority Women) नाम के एक कार्यक्रम में पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक महिलाओं की दयनीय स्थिति पर चिंता जताई गई। 'ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस' और 'CAP पोर ला लिबर्टे डे कॉन्शिएंस' (CAP Pour la Liberte de Conscience) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कानून बनाने वाले, मानवाधिकार कार्यकर्ता और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता के लगातार उल्लंघन पर चिंता जताई।
वक्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और जबरन धर्म-परिवर्तन व जबरन शादी की प्रथा को खत्म करने के लिए इस्लामाबाद पर दबाव बढ़ाएं। इस चर्चा में अल्पसंख्यक समुदायों के उत्पीड़न, खासकर हिंदू, ईसाई और बलूच महिलाओं और लड़कियों की असुरक्षित स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रतिभागियों ने जबरन धर्म-परिवर्तन और जबरन शादी को धार्मिक और जातीय उत्पीड़न का हथियार बताया। साथ ही, उन्होंने गरीबी, बिना नागरिकता के रहने और संघर्ष जैसी स्थितियों को भी उजागर किया, जो कमजोर समुदायों के लिए जोखिम को बढ़ाती हैं।
कार्यक्रम में बोलते हुए, यूरोपीय संसद के सदस्य बर्ट-जन रुइसेन ने कहा कि पाकिस्तान में धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता पर भारी दबाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के ईशनिंदा कानूनों का अक्सर दुरुपयोग किया जाता है। उन्होंने लड़कियों की जबरन शादी और उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर करने की खबरों पर चिंता व्यक्त की। "हमने ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग के बारे में बात की, और मुख्य रूप से इस बात पर चर्चा की कि लड़कियों को जबरन शादी और इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया जाता है। यह वास्तव में विश्वास की स्वतंत्रता और अंतरात्मा की स्वतंत्रता की पूरी अवधारणा को कमजोर कर रहा है।" रुइसेन ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा बेहतर करने और उनके अधिकारों का पूरा सम्मान सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सहयोग मजबूत करना चाहिए।
उन्होंने पाकिस्तान के साथ मौजूदा अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समर्थन तंत्र का भी जिक्र किया और कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों को प्रोत्साहित करने के लिए इनका प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए। 'फाउंडेशन फॉर द इम्प्रूवमेंट ऑफ लाइफ, कल्चर एंड सोसाइटी' के प्रतिनिधि इवान अर्जोना-पेलाडो ने कहा कि दुनिया में कहीं भी जबरन धार्मिक परिवर्तन नहीं होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि लोगों को बिना किसी दबाव के धर्म चुनने, बदलने या उसे न मानने की आजादी होनी चाहिए।
पेलाडो ने सरकारों और सार्वजनिक अधिकारियों से आग्रह किया कि वे हर व्यक्ति के अपनी अंतरात्मा के अनुसार जीने के अधिकार की रक्षा करके धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता को बनाए रखें। उन्होंने कहा कि इन आज़ादियों का सम्मान करना देशों की बुनियादी ज़िम्मेदारी है और अधिकारियों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी नागरिक बिना किसी डर या भेदभाव के अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें।
इस कार्यक्रम में यूरोपीय संसद के सदस्य टोमिस्लाव सोकोल और बलूच नेशनल मूवमेंट के चेयरमैन डॉ. नसीम बलोच भी शामिल हुए। वक्ताओं ने अल्पसंख्यक महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही और तत्काल उपायों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, साथ ही पाकिस्तान में ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन और ज़बरदस्ती शादी के ख़िलाफ़ मज़बूत सुरक्षा उपायों की मांग की।





