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बांग्लादेश में एक और हिंदू मंदिर पर हमला, काली मूर्ति चोरी

Tara Tandi
21 Sept 2026 6:06 PM IST
बांग्लादेश में एक और हिंदू मंदिर पर हमला, काली मूर्ति चोरी
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ढाका: बांग्लादेश में हिंदुओं के पूजा-स्थलों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इसी बीच, सोमवार को मंदिर अधिकारियों के हवाले से स्थानीय मीडिया ने खबर दी कि फरीदपुर शहर के उत्तर कालीबाड़ी मंदिर से देवी काली की मूर्ति के साथ-साथ कई गहने और धार्मिक वस्तुएं चोरी हो गईं
मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार, यह चोरी शनिवार रात करीब 10:30 बजे से रविवार सुबह 5:45 बजे के बीच हुई।
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार 'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के मुताबिक, चोरी हुई कीमती चीजों में देवी काली की मूर्ति, उन्हें पहनाए गए करीब 7-8 तोले सोने के गहने, भगवान विष्णु, राधा-कृष्ण और मनसा की पीतल की छोटी मूर्तियां, और शिव लिंग पर लिपटे लगभग 8-10 तोले वजन वाले चांदी के सांप शामिल थे।
मंदिर के पुजारी देबी प्रसाद चक्रवर्ती के अनुसार, काली की मूर्ति शिव की सफेद संगमरमर की मूर्ति पर रखी हुई थी।
उन्होंने कहा, "सफेद संगमरमर की शिव की मूर्ति वहीं छोड़ दी गई, जबकि अज्ञात चोर या चोरों ने काली की मूर्ति चुरा ली।" उन्होंने आगे बताया कि पूरे ढांचे का वजन लगभग 40 किलोग्राम था, जिसमें अकेले काली की मूर्ति का वजन कम से कम 20 किलोग्राम था।
मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष कुशल चक्रवर्ती ने कहा कि सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे और चोरी हुई चीजें अभी तक बरामद नहीं हो पाई हैं।
'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार, घटना की पुष्टि करते हुए प्रभारी अधिकारी महमूदुल हसन ने कहा, "चोरी में शामिल लोगों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए कई पुलिस टीमें पहले ही काम शुरू कर चुकी हैं।"
इस ताजा घटना ने पूरे बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों और अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों में चिंताजनक वृद्धि को उजागर किया है। यह सिलसिला पूर्व में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान शुरू हुआ था और मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) प्रशासन के तहत भी जारी है।
इस महीने की शुरुआत में, 2001 से 2006 तक बीएनपी-जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के पांच साल के शासन को याद करते हुए, अवामी लीग ने आरोप लगाया कि उस दौरान देश भर में अल्पसंख्यक समुदायों पर जो अत्याचार हुए थे, वे अब 2026 में फिर से देखे जा रहे हैं।
पार्टी ने कहा, "मंदिरों पर हमले, घरों में आग लगाना, जमीन पर कब्जा, महिलाओं के खिलाफ क्रूर यौन हिंसा और अनगिनत हिंदुओं को बांग्लादेश छोड़ने के लिए मजबूर किया जाना - वह तस्वीर आज 2026 में फिर से हमारी आंखों के सामने आ रही है।" एक अलग बयान में, अवामी लीग ने कहा कि अगस्त 2024 से पूरे बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को बड़े पैमाने पर भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। इसमें नौकरी से निकालना, प्रमोशन न मिलना, सरकारी नौकरी पर रोक और घर, ज़मीन व कारोबार पर कब्ज़ा जैसी बातें शामिल हैं।
रंगपुर शहर में रिटायर्ड हिंदू टीचर गणपति चक्रवर्ती और उनके पूरे परिवार की हालिया हत्या का ज़िक्र करते हुए पार्टी ने कहा कि इस घटना के बाद सत्ताधारी BNP सरकार की निष्क्रियता धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के उस बड़े पैटर्न को दिखाती है, जो पिछली यूनुस-नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के समय से ही जारी है।
अवामी लीग ने कहा, "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि 5 अगस्त 2024 से पूरे देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को नौकरी से निकाले जाने, प्रमोशन न मिलने, सरकारी सेवा में आने पर अघोषित रोक और कई तरह के दमन व उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है, जिसमें घर, ज़मीन और कारोबार पर कब्ज़ा भी शामिल है।"
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