विश्व
अमेरिका ईरान टकराव के बीच भारत एक्टिव मोदी की दो बड़ी बैठकें
Ratna Netam
31 Aug 2026 6:14 PM IST

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बिश्केक : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक सक्रियता काफी अहम मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और दुनिया की नजरें इस क्षेत्र में होने वाले घटनाक्रमों पर टिकी हैं।
पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की यह मुलाकात भारत की संतुलित विदेश नीति को दिखाती है। भारत के ईरान के साथ पुराने ऐतिहासिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। वहीं, अमेरिका के साथ भी भारत के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। ऐसे में नई दिल्ली के लिए दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती है।
युद्ध के बीच क्यों अहम है मोदी-पेजेशकियन मुलाकात?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से वैश्विक राजनीति पर असर पड़ा है। पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े संघर्ष का सीधा प्रभाव ऊर्जा बाजार, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
भारत दुनिया के बड़े ऊर्जा आयातकों में शामिल है। ऐसे में ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत की प्राथमिकता क्षेत्रीय शांति और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना है।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय हालात और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। भारत लगातार यह संदेश देता रहा है कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से होना चाहिए।
ईरान के साथ भारत के पुराने रिश्ते
भारत और ईरान के संबंध कई दशकों पुराने हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, परिवहन और सांस्कृतिक क्षेत्र में सहयोग रहा है।
ईरान भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। चाबहार बंदरगाह परियोजना दोनों देशों के संबंधों का प्रमुख हिस्सा रही है। यह बंदरगाह भारत को मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच के लिए महत्वपूर्ण रास्ता उपलब्ध कराता है।
हालांकि, अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण ईरान के साथ व्यापार और ऊर्जा संबंधों में कई चुनौतियां भी सामने आती रही हैं।
पुतिन से आज शाम मुलाकात पर नजर
ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी की आज शाम रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। यह बैठक भी वैश्विक हालात के बीच काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत और रूस के संबंध रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में लंबे समय से मजबूत रहे हैं। रूस भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार रहा है और दोनों देश वैश्विक मुद्दों पर कई मंचों पर साथ काम करते हैं।
माना जा रहा है कि मोदी-पुतिन बैठक में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति, ऊर्जा सहयोग, व्यापार और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा हो सकती है।
भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा
मौजूदा वैश्विक माहौल में भारत को कई मोर्चों पर संतुलन बनाना पड़ रहा है। एक ओर अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर रूस और ईरान जैसे पुराने साझेदारों के साथ संबंध बनाए रखना भी जरूरी है।
भारत की नीति हमेशा से रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित रही है। यानी नई दिल्ली अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार अलग-अलग देशों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाती है।
ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान भी भारत ने किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय शांति और बातचीत का रास्ता अपनाने पर जोर दिया है।
तेल और व्यापार पर असर की चिंता
अगर अमेरिका-ईरान तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत जैसे आयातक देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
इसके अलावा समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। पश्चिम एशिया के समुद्री रास्ते वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
भारत के लिए यह जरूरी है कि ऊर्जा आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए और व्यापारिक गतिविधियां सामान्य बनी रहें।
SCO मंच पर भारत की भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी की ये मुलाकातें SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हो रही हैं। यह मंच भारत को रूस, चीन, ईरान और मध्य एशियाई देशों के साथ बातचीत का अवसर देता है।
भारत इस मंच का इस्तेमाल क्षेत्रीय सहयोग, आतंकवाद विरोधी प्रयासों और आर्थिक साझेदारी बढ़ाने के लिए करता है।
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