
Geneva , जिनेवा : पश्तून मानवाधिकार कार्यकर्ता फजल-उर-रहमान अफरीदी ने पाकिस्तान पर पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK), बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) से इन आरोपों की अंतरराष्ट्रीय जांच शुरू करने की अपील की है। जिनेवा में चल रहे UN मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र के दौरान अफरीदी ने कहा कि 'जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JKJAAC) पर प्रतिबंध लगने के बाद PoJK में हालात "बेहद गंभीर" हो गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने हिंसक कार्रवाई की है, जिसमें दर्जनों आम नागरिकों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। अफरीदी ने यह भी दावा किया कि इस इलाके में खाने-पीने की चीजों और जीवन रक्षक दवाओं की आवाजाही पर रोक लगने से गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और पड़ोसी देशों से इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने और वैश्विक मीडिया से इन कथित अत्याचारों को उजागर करने की अपील की।
बलूचिस्तान का जिक्र करते हुए अफरीदी ने आरोप लगाया कि पूरे प्रांत में सैन्य अभियान और लोगों को जबरन गायब करने की घटनाएं जारी हैं। उन्होंने बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. महरंग बलूच को सुनाई गई कथित उम्रकैद की सजा की निंदा की। उन्होंने न्यायपालिका को समझौतावादी बताया और उनकी तत्काल रिहाई तथा उन पर लगे सभी आरोप वापस लेने की मांग की।
अफरीदी ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर खैबर पख्तूनख्वा में अभियानों के दौरान भारी हथियारों - जैसे मोर्टार शेल, हेलीकॉप्टर गनशिप और हवाई हमलों - का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि हिंसा का सबसे बुरा असर आम नागरिकों, खासकर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। उन्होंने लोगों को जबरन गायब करने की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी का आरोप लगाया और कहा कि PTM सदस्य फरीदुल्ला खान अफरीदी का मामला 'जबरन या अनैच्छिक रूप से गायब किए गए लोगों पर UN वर्किंग ग्रुप' को सौंपा गया है।
जवाबदेही की मांग करते हुए अफरीदी ने UNHRC से कथित उल्लंघनों की जांच करने और दोषी पाए जाने वाले सैन्य, खुफिया और पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा चलाने का आग्रह किया। उन्होंने संघर्ष प्रभावित इलाकों में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और पत्रकारों को बिना किसी रोक-टोक के जाने की अनुमति देने की भी मांग की।





