विश्व
पाकिस्तान में कृषि संकट गहराया किसानों ने की आपातकाल लगाने की मांग
Ratna Netam
19 Oct 2026 9:39 PM IST

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान में बढ़ती कृषि लागत, फसलों के कम दाम और सरकारी नीतियों में देरी को लेकर किसानों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। पाकिस्तान किसान इत्तेहाद के अध्यक्ष खालिद महमूद खोखर ने सरकार से देश में तत्काल कृषि आपातकाल घोषित करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो कृषि क्षेत्र के साथ देश की खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। खोखर ने आरोप लगाया कि सरकारी फैसलों में लगातार देरी के कारण किसानों को बार-बार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मुल्तान में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए खालिद महमूद खोखर ने कहा कि देश का कृषि क्षेत्र लगातार पिछड़ रहा है। किसानों को उत्पादन लागत के मुकाबले फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। ऐसे में सरकार को कृषि क्षेत्र के लिए तत्काल प्रभावी नीतियां लागू करनी चाहिए।
एक फसल में नुकसान तो अगली तीन फसलों पर असर
खालिद महमूद खोखर ने कहा कि कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक फसल में होने वाला आर्थिक नुकसान आने वाले कई फसल चक्रों को प्रभावित करता है।उन्होंने बताया कि यदि किसान को एक सीजन में नुकसान होता है, तो उसका असर अगली तीन फसलों तक पड़ सकता है। इससे किसानों के लिए दोबारा आर्थिक रूप से मजबूत होना मुश्किल हो जाता है।उनके मुताबिक, खेती में बीज, खाद, सिंचाई, बिजली और अन्य संसाधनों पर लगातार खर्च बढ़ रहा है, लेकिन किसानों को उनकी उपज के बदले पर्याप्त पैसा नहीं मिल पा रहा है।
किसानों को 25 प्रतिशत मुनाफा देने की मांग
पाकिस्तान किसान इत्तेहाद ने सरकार से मांग की है कि किसानों को उनकी फसलों की उत्पादन लागत पर कम से कम 25 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित किया जाए।खोखर ने कहा कि किसान पूरे वर्ष मेहनत करके देश के लिए अनाज और अन्य कृषि उत्पाद तैयार करते हैं, लेकिन बिक्री के समय उन्हें उचित कीमत नहीं मिलती।उन्होंने कहा कि जब तक खेती किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं बनेगी, तब तक कृषि उत्पादन को स्थिर रखना मुश्किल होगा।किसान संगठन का कहना है कि फसलों की कीमत तय करते समय उत्पादन लागत के साथ किसानों के मुनाफे को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
IMF की शर्तों को लेकर सरकार पर सवाल
खालिद महमूद खोखर ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तों का हवाला देकर फसलों की बेहतर कीमत सुनिश्चित नहीं करने के लिए सरकार की आलोचना की।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को उचित मूल्य देने में अपनी असमर्थता को सही ठहराने के लिए आईएमएफ की शर्तों का इस्तेमाल कर रही है।हालांकि, यह किसान संगठन का आरोप है। इससे यह स्थापित नहीं होता कि आईएमएफ ने किसानों को लाभकारी कीमत देने पर सीधे प्रतिबंध लगाया है।उन्होंने कहा कि दूसरे देश अपने कृषि क्षेत्रों को मजबूत बनाने के लिए आर्थिक सहायता देते हैं, जबकि पाकिस्तान के किसानों को बढ़ती लागत और अपर्याप्त कीमतों से जूझना पड़ रहा है।
गेहूं की कीमत पर भी उठाए सवाल
किसान संगठन के अध्यक्ष ने गेहूं की कीमतों को लेकर भी सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की।उन्होंने कहा कि यदि किसानों को गेहूं का उचित मूल्य मिलेगा, तो वे इसकी खेती बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।खोखर ने बताया कि सरकार ने गेहूं की कीमत 4,500 पाकिस्तानी रुपये प्रति मन यानी लगभग 40 किलोग्राम निर्धारित करने की बात कही है।किसान संगठन ने इस स्तर के समर्थन मूल्य का स्वागत करते हुए प्रभावी खरीद और विपणन व्यवस्था लागू करने की जरूरत बताई है।
गन्ना किसानों को भी नहीं मिल रहा उचित मूल्य
खोखर ने गन्ना उत्पादकों की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि इस वर्ष पाकिस्तान में गन्ने के उत्पादन में लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।इसके बावजूद किसानों को उनकी फसल का पर्याप्त मूल्य नहीं मिल पा रहा है।उन्होंने वर्ष 2017 की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस समय चीनी निर्यात का फैसला देर से लेने के कारण गन्ना किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था।खोखर ने मांग की कि सरकार कृषि उत्पादों के विपणन और निर्यात से संबंधित फैसले समय रहते करे, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।
खाद्य सुरक्षा के लिए कृषि सुधार जरूरी
खालिद महमूद खोखर ने कहा कि दुनियाभर में खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है, लेकिन पाकिस्तान में गेहूं और आटे जैसे जरूरी कृषि उत्पाद राजनीतिक विवादों का हिस्सा बनते जा रहे हैं।उन्होंने कृषि क्षेत्र को राजनीति से अलग रखने और किसानों के हित में स्थायी नीतियां लागू करने पर जोर दिया।किसान संगठन ने चेतावनी दी कि उचित कीमतों और प्रभावी सरकारी हस्तक्षेप के अभाव में कृषि क्षेत्र की समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।फिलहाल पाकिस्तान किसान इत्तेहाद ने सरकार से कृषि आपातकाल घोषित करने, किसानों को उत्पादन लागत पर 25 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने और फसलों की खरीद व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग की है।
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