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आखिर क्यों तालिबान का समर्थन कर रहा चीन, परियोजनाओं को आतंकियों से खतरा

Gulabi
5 Sep 2021 12:05 PM GMT
आखिर क्यों तालिबान का समर्थन कर रहा चीन, परियोजनाओं को आतंकियों से खतरा
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तालिबान का समर्थन कर रहा चीन

Why Taliban is Dangerous for China: अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे को चीन बेशक अपने फायदे के तौर पर देख रहा है लेकिन उसे यहां की स्थिति से फायदा कम और नुकसान ज्यादा होगा. जब अमेरिका ने अप्रैल में अपने सैनिकों की वापसी का ऐलान किया था, तभी से दुनिया देख रही है कि कैसे चीन यहां अमेरिका की खाली होती जगह को खुद भरने की कोशिश कर रहा है. यहां तक कि काबुल पर कब्जे (Control on Kabul) से पहले ही चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने तालिबानी नेताओं के साथ बैठक भी की. तब वांग ने कहा कि तालिबान 'अफगानिस्तान में शांतिपूर्ण सुलह और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.'

चीन के लिए अफगानिस्तान में पर्याप्त निवेश के साथ ही, तालिबान की अचानक वापसी से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियां रणनीतिक हितों की तुलना में कहीं अधिक खतरे वाली नजर आती हैं (China Taliban Connection). सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीयन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के साथ एक साक्षात्कार में जर्मन मार्शल फंड से जुड़े एंड्रयू स्मॉल का कहना है, 'चीन अफगानिस्तान को अवसरों के चश्मे से नहीं देखता है, यह लगभग पूरी तरह से खतरों के प्रबंधन से जुड़ा लगता है.' उनका कहना है कि चीन तालिबान का साथ इसलिए दे रहा है क्योंकि वो इसके आने के बाद उत्पन्न खतरों से खुद को बचाना चाहता है.
शिंजियांग को लेकर डरा हुआ है चीन
चीन का शिंजियांग प्रांत अफगानिस्तान से करीब 80 किलोमीटर की सीमा साझा करता है. बेशक बीजिंग अफगानिस्तान में अमेरिका की मौजूदगी से खुश नहीं था लेकिन इस मौजूदगी के कारण देश में जारी स्थिरता से उसे भी फायदा हो रहा था. लेकिन अमेरिका की मौजूदगी 20 साल बाद खत्म हो गई है (China Taliban and Pakistan). चीन इससे चिंतित है कि अफगानिस्तान बड़े पैमाने पर मुस्लिम बहुल शिंजियांग की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे आतंकवादियों और चरमपंथियों के लिए एक आधार बन जाएगा. बीते महीने वांग ने तालिबान नेताओं के साथ बैठक में ये मुद्दा भी उठाया था. उस वक्त तालिबान ने कहा था कि वह किसी तीसरे देश के खिलाफ अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा.
परियोजनाओं को आतंकियों से खतरा
हाल के वर्षों में चीन ने अपने बेल्ट एंड रोड और बुनियादी ढांचा कार्यक्रम के माध्यम से मध्य एशिया में भारी निवेश किया है. तालिबान के सत्ता में आने से उसकी परियोजनाएं भी अधर में लटकी हुई हैं. पाकिस्तान में बीते महीने चीनी नागरिकों को निशाना बनाते हुए उनपर आतंकी हमला किया गया था, जिससे चीन सुरक्षा (Security Risks For China) को लेकर काफी डरा हुआ है. पाकिस्तान ने कहा कि ये हमला तहरीक-ए-तालिबान (पाकिस्तानी तालिबान) ने किया है. जिससे आतंकी बड़ी संख्या में अफगानिस्तान में हैं और तालिबान साफ कह चुका है कि पाकिस्तान को इस संगठन से खुद निपटना होगा. तालिबान के आने के बाद से अब तक टीटीपी के अलग-अलग हमलों में कम से 52 पाकिस्तानी सुरक्षाबल मारे गए हैं. ये संगठन पाकिस्तान में चीनी नागरिकों को भी निशाने पर ले रहा है.
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