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ओजेम्पिक के नाम पर फर्जी दवा बेचने का मामला
वॉशिंगटन: अमेरिका में डायबिटीज और वजन घटाने के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा Ozempic के नकली संस्करण की तस्करी और बिक्री के मामले में दो भारतीय नागरिकों पर संघीय आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार 33 वर्षीय स्वप्नदीप रॉय और 37 वर्षीय विक्की रमांचा पर चीन से नकली Ozempic हासिल कर अमेरिका के वितरकों तक पहुंचाने का आरोप है।
अभियोग के मुताबिक यह कथित नेटवर्क जुलाई 2023 से अप्रैल 2024 तक सक्रिय रहा। आरोप है कि दोनों ने चीन में अनधिकृत स्रोतों से नकली Ozempic हासिल किया और उसे कम कीमत पर अमेरिकी वितरकों को बेचा। नकली उत्पादों के साथ ऐसी पैकेजिंग, पेन लेबल, नीडल और अन्य सामग्री भी इस्तेमाल की गई, जिससे ग्राहकों को यह वास्तविक दवा जैसी दिखाई दे।
Ozempic मूल रूप से टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रिस्क्रिप्शन दवा है। इसमें सेमाग्लूटाइड नामक सक्रिय तत्व होता है। यह दवा ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद करती है और इसके प्रभाव के कारण वजन घटाने के संदर्भ में भी व्यापक चर्चा में रही है। नकली संस्करण मरीजों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं क्योंकि उनकी सामग्री, गुणवत्ता और खुराक विश्वसनीय नहीं होती।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इस कथित योजना में नकली दवाओं को असली उत्पाद जैसा दिखाने के लिए पैकेजिंग और लेबलिंग की नकल की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इससे फार्मास्यूटिकल सप्लाई चेन में नकली दवाओं के प्रवेश का खतरा पैदा हुआ और मरीजों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती थी।
मामले की गंभीरता इस बात से भी बढ़ गई कि अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी FDA ने दिसंबर 2023 में कुछ नकली Ozempic जब्त किए थे और इनके बारे में सार्वजनिक चेतावनी भी जारी की थी। आरोप है कि इसके बावजूद नकली दवाओं की बिक्री से जुड़ी गतिविधियां अप्रैल 2024 तक जारी रहीं।
स्वप्नदीप रॉय को इटली से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया है। उन्होंने फ्लोरिडा के टाम्पा में अदालत के समक्ष पेश होकर आरोपों से इनकार किया है। दूसरी ओर विक्की रमांचा अभी फरार बताया गया है। अमेरिकी एजेंसियां उसकी तलाश कर रही हैं।
दोनों पर तस्करी की साजिश, अमेरिका को धोखा देने की साजिश, स्मगलिंग तथा नकली दवाओं की बिक्री और उन्हें बिक्री के लिए रखने जैसे कई आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार दोषी पाए जाने पर दोनों को अधिकतम 71 साल तक की जेल का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं और अमेरिकी कानून के तहत दोष सिद्ध होने तक आरोपियों को निर्दोष माना जाएगा।
मामले की जांच FDA के ऑफिस ऑफ क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशंस द्वारा की जा रही है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि नकली प्रिस्क्रिप्शन दवाओं का कारोबार केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। यह मामला अंतरराष्ट्रीय नकली दवा नेटवर्क की चुनौती को भी सामने लाता है। खासकर ऐसी लोकप्रिय दवाएं, जिनकी मांग दुनिया भर में तेजी से बढ़ी है, नकली उत्पाद बनाने वाले गिरोहों के निशाने पर रहती हैं। ऐसे मामलों में मरीजों को केवल अधिकृत और विश्वसनीय फार्मेसी या स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से ही दवाएं लेने की सलाह दी जाती है।
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