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छत्तीसगढ़ उद्यानिकी विभाग में टेंडर घोटाला, मैनेज्ड टेंडर के खेल से स्थानीय व्यापारी बाहर
SHIDDHANT
10 Sept 2026 12:03 AM IST

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GeM पोर्टल पर भ्रष्टाचार चरम पर
Raipur रायपुर: छत्तीसगढ़ के कृषि और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (उद्यानिकी और फार्म फॉरेस्ट्री निदेशालय) द्वारा जारी किए गए बांस के पौधों के टेंडर (बिड नंबर: GEM/2026/B/7993670) में भ्रष्टाचार और पक्षपात का एक बड़ा मामला सामने आया है। टेंडर के दस्तावेजों से साफ पता चलता है कि इसमें जानबूझकर ऐसे कड़े और अजीबोगरीब नियम-कानून जबरदस्ती डाले गए हैं, जिससे बाकी सभी कंपनियां प्रतियोगिता से बाहर हो जाएं और केवल एक पहले से तय (चयनित) चहेती कंपनी या व्यक्ति को ही यह टेंडर मिल पाए।
यह सिर्फ एक बानगी, GeM पोर्टल पर चल रहा है बड़ा खेल:
शिकायतकर्ताओं और स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यह केवल एक विशेष टेंडर की कहानी नहीं है। हाल-फिलहाल में सरकारी खरीद के 'गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस' (GeM Portal) पर ऐसे कई टेंडर डाले गए हैं, जिनमें भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। विभाग के भीतर बैठे कुछ रसूखदार लोग और भ्रष्ट अधिकारी मिलकर लगातार ऐसे टेंडर 'मैनेज' कर रहे हैं, जिससे सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं।
जबरदस्ती थोपे गए नियम और भ्रष्टाचार के सबूत:
* सप्लाई क्षमता की असंभव शर्त: टेंडर के नियमों के मुताबिक, बोली लगाने वाली कंपनी के पास पिछले 3 सालों में कम से कम 1,75,000 (एक लाख पचहत्तर हजार) पौधों की सप्लाई करने का संचयी (Cumulative) अनुभव होना चाहिए। महज़ 10,000 पौधों की खरीदी के लिए इतनी बड़ी मात्रा (1.75 लाख पौधे) की शर्त रखना पूरी तरह अतार्किक है। यह नियम केवल और केवल छोटी और स्थानीय कंपनियों का पत्ता काटने के लिए डाला गया है।
* तकनीकी मूल्यांकन से पहले सैंपल मांगने पर बड़ा सवाल: टेंडर में सबसे संदिग्ध शर्त यह है कि टेंडर बंद होने की तारीख से पहले ही पौधों का सैंपल जमा करना अनिवार्य किया गया है। नियम के मुताबिक, सैंपल हमेशा 'टेक्निकल इवैल्यूएशन' (तकनीकी मूल्यांकन) के बाद केवल उन्हीं बिडर्स से मांगा जाना चाहिए जो शुरुआती शर्तों में क्वालिफाई (पास) होते हैं। टेंडर खुलने से पहले ही सैंपल मांगना यह साफ इशारा करता है कि अधिकारी पहले से तय किसी खास व्यक्ति के सैंपल को देखकर दूसरों को पहले ही बाहर करने की साजिश रच रहे हैं।
* एमएसएमई (MSME) और स्टार्टअप को पूरी तरह बैन करना: टेंडर में अनुभव और टर्नओवर के मामलों में नए स्टार्टअप या छोटे उद्योगों (MSE) को कोई भी छूट (No Relaxation) नहीं दी गई है। यह सरकारी नियमों के खिलाफ है और साफ करता है कि टेंडर का ढांचा किसी एक खास कंपनी की प्रोफाइल को देखकर ही तैयार किया गया है।
सरकार की नीयत और दोषियों पर कार्रवाई को लेकर बड़ा सवाल:
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सरकार की कार्यप्रणाली पर खड़ा होता है। जनता और छोटे व्यापारी यह पूछ रहे हैं कि क्या सरकार इस टेंडर घोटाले में शामिल भ्रष्ट अधिकारियों और आरोपियों के ऊपर कोई कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगी या नहीं? क्या पर्दे के पीछे बैठकर टेंडर मैनेज करने वाले इन रसूखदार आरोपियों को जेल भेजा जाएगा, या फिर इस पूरे मामले को दबाकर उन्हें ऐसे ही खुला छोड़ दिया जाएगा? अब देखना यह है कि विभाग के आला अधिकारी और सरकार इस विवादित टेंडर और इसके जैसे पहले हो चुके संदिग्ध टेंडरों को तुरंत निरस्त (Cancel) करके जांच बिठाते हैं या भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं।
हमारी मांगें:
1. किसी एक कंपनी या व्यक्ति को फायदा पहुंचाने की नीयत से बनाए गए इस टेंडर और GeM पोर्टल पर मौजूद ऐसे सभी संदिग्ध टेंडरों को तुरंत निरस्त (Cancel) किया जाए।
2. नियमों को आसान और पारदर्शी बनाकर दोबारा नया टेंडर जारी किया जाए, ताकि राज्य के छोटे व्यापारियों को भी मौका मिले।
3. टेंडर के नियमों में इस तरह की जबरदस्ती शर्तें जोड़ने वाले, भ्रष्टाचार करने वाले और पुराने टेंडरों में धांधली करने वाले सभी आरोपियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।
यदि सरकार और विभाग इस 'मैनेज्ड टेंडर' घोटाले पर तुरंत रोक नहीं लगाते हैं और दोषियों पर कार्रवाई नहीं करते हैं, तो इसके खिलाफ सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन किया जाएगा और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
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