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मौत के बाद आपके Aadhar card का क्या होता है? जानिए पूरी प्रक्रिया

टेक्नोलॉजी | आधार कार्ड हर भारतीय नागरिक की पहचान का अहम दस्तावेज बन चुका है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके आधार कार्ड का क्या होता है? क्या इसे कैंसिल किया जाता है या यह हमेशा एक्टिव रहता है? आइए जानते हैं इस प्रक्रिया के बारे में—
1. क्या मृत्यु के बाद आधार कार्ड डिएक्टिवेट होता है?
नहीं! फिलहाल भारत में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है, जिसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका आधार कार्ड अपने आप डिएक्टिवेट हो जाए। इसका मतलब यह है कि किसी मृत व्यक्ति का आधार रिकॉर्ड सरकार के डेटाबेस में बना रहता है।
2. आधार को कैंसिल या डिएक्टिवेट कैसे करें?
यदि परिवार चाहे तो UIDAI (यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) में आवेदन देकर मृत व्यक्ति का आधार कार्ड डिएक्टिवेट कर सकता है। इसके लिए—
- मृत व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) आवश्यक होता है।
- परिवार के किसी सदस्य को नजदीकी आधार सेवा केंद्र में जाना होगा।
- उचित फॉर्म भरकर आधार डिएक्टिवेशन का अनुरोध किया जा सकता है।
3. मृत्यु के बाद आधार का गलत इस्तेमाल?
अगर आधार कार्ड को डिएक्टिवेट नहीं किया जाता है, तो इसका गलत उपयोग होने की संभावना रहती है, जैसे—
- किसी धोखाधड़ी (Fraud) में इसका इस्तेमाल हो सकता है।
- बैंक खातों और सरकारी योजनाओं में इससे फर्जीवाड़ा किया जा सकता है।
- मृतक के नाम पर सिम कार्ड या लोन लेने का खतरा हो सकता है।
4. मृत्यु प्रमाण पत्र में आधार का उपयोग क्यों जरूरी?
भारत सरकार ने 2017 में एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए मृत व्यक्ति का आधार नंबर देना अनिवार्य किया जा सकता है। इससे सरकारी रिकॉर्ड में उस व्यक्ति का विवरण अपडेट हो जाएगा और फर्जीवाड़ा रुकेगा।
5. आधार डेटा और गोपनीयता?
UIDAI के अनुसार, मृतक का आधार डेटा गोपनीय रखा जाता है और इसे किसी को भी साझा नहीं किया जाता है।
निष्कर्ष:
मृत्यु के बाद आधार कार्ड स्वतः डिएक्टिवेट नहीं होता, लेकिन परिवार UIDAI को आवेदन देकर इसे निष्क्रिय कर सकता है। ऐसा करने से धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े से बचा जा सकता है।





