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Ethanol फ्यूल की ओर दुनिया का रुख, कई देशों में E85 तक इस्तेमाल

Ratna Netam
10 July 2026 5:02 PM IST
Ethanol  फ्यूल की ओर दुनिया का रुख, कई देशों में E85 तक इस्तेमाल
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technological प्रौद्योगिकीय : भारत अपने फ्यूल सेक्टर में बड़ा बदलाव करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पारंपरिक पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल को अपनाने की शुरुआत कर दी है। इसकी पहली बड़ी सफलता E20 पेट्रोल के रूप में सामने आई है, जिसमें सामान्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जाता है।

अब सरकार का लक्ष्य भविष्य में E100 फ्यूल यानी शुद्ध इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। इथेनॉल एक रिन्यूएबल अल्कोहल है, जिसे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसे पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है।

दुनिया के कई देश अपना चुके हैं इथेनॉल फ्यूल

इथेनॉल आधारित फ्यूल का इस्तेमाल सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई देश पहले से ही इस तकनीक को अपना चुके हैं। ब्राजील, पैराग्वे, थाईलैंड, बोलिविया और जिम्बाब्वे जैसे देशों में E20 या इससे ज्यादा इथेनॉल मिश्रित फ्यूल का इस्तेमाल किया जा रहा है।

वहीं, अमेरिका ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 फ्यूल का बड़ा नेटवर्क तैयार किया है। E85 में 85 प्रतिशत तक इथेनॉल और बाकी पेट्रोल होता है। ऐसे वाहन अलग-अलग अनुपात वाले पेट्रोल-इथेनॉल मिश्रण पर चल सकते हैं।

भारत ने समय से पहले हासिल किया E20 लक्ष्य

भारत सरकार ने नेशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल के तहत साल 2030 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य तय किया था। हालांकि, देश ने इस लक्ष्य को तय समय सीमा से कई साल पहले ही हासिल कर लिया।

अब देशभर के पेट्रोल पंपों पर E20 स्टैंडर्ड पेट्रोल उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ाकर पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना और किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत उपलब्ध कराना है।

एक दशक में तेजी से बढ़ा इथेनॉल मिश्रण

भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग की दर पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ी है। कुछ साल पहले तक जहां पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की दर करीब 1.5 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

इसके साथ ही देश में इथेनॉल उत्पादन क्षमता में भी बड़ा विस्तार हुआ है। भारी ईंधन मांग को पूरा करने के लिए घरेलू इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग पांच गुना तक बढ़ाई गई है।

ऑटो सेक्टर भी दे रहा साथ

इथेनॉल आधारित फ्यूल को बढ़ावा देने में ऑटोमोबाइल कंपनियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं। कई कंपनियां अब फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों पर काम कर रही हैं, जो E20 से लेकर E85 जैसे ईंधन पर चल सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में इथेनॉल और अन्य वैकल्पिक ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ने से देश में ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

भारत अब E20 के बाद E85 और E100 जैसे फ्यूल विकल्पों की ओर बढ़ रहा है, जिससे आने वाले समय में देश के परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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