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Ola Electric पर गिरी गाज, ग्राहक केस में कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

technological प्रौद्योगिकीय : आंध्र प्रदेश के अनंतपुरमु स्थित जिला कंज्यूमर कोर्ट ने ईवी कंपनी ओला इलेक्ट्रिक के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कंपनी पर 45,000 रुपये का जुर्माना लगाया है, जो उसकी सर्विस में लापरवाही के कारण लगाया गया है। यह मामला ग्राहक की लंबे समय से लंबित शिकायत से जुड़ा हुआ है, जिसमें स्कूटर के एक छोटे हिस्से की मरम्मत नहीं की गई थी।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने ओला इलेक्ट्रिक का S1 प्रो स्कूटर खरीदा था। इसके बाद स्कूटर की डिग्गी के लॉक में तकनीकी खराबी आ गई। ग्राहक ने इस समस्या के समाधान के लिए कई बार सर्विस सेंटर के चक्कर लगाए, ईमेल के जरिए शिकायत दर्ज कराई और यहां तक कि कानूनी नोटिस भी भेजा। इसके बावजूद दो साल से अधिक समय तक समस्या का समाधान नहीं किया गया।कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि कंपनी और उसके लोकल सर्विस सेंटर की ओर से ग्राहक की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे उपभोक्ता को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी आधार पर कंज्यूमर कोर्ट ने ओला इलेक्ट्रिक और संबंधित सर्विस सेंटर को जिम्मेदार ठहराते हुए जुर्माना लगाने का आदेश दिया।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि कंपनी शिकायतकर्ता के ओला S1 प्रो स्कूटर की डिग्गी का लॉक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के तुरंत ठीक करे। यह फैसला 9 जून 2026 को सुनाया गया, जैसा कि ईटी में प्रकाशित एक रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है।इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में कंपनियों की जवाबदेही तय होना जरूरी है, ताकि ग्राहकों को समय पर सही सेवा मिल सके और उन्हें लंबे समय तक परेशान न होना पड़े।
ओला इलेक्ट्रिक हाल के वर्षों में भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में तेजी से उभरती हुई कंपनियों में से एक रही है। हालांकि, इस तरह के मामलों ने उसकी सर्विस व्यवस्था और ग्राहक सहायता प्रणाली पर सवाल भी खड़े किए हैं।कुल मिलाकर यह मामला ईवी सेक्टर में सर्विस क्वालिटी और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि ग्राहकों की शिकायतों को नजरअंदाज करना कंपनियों के लिए भारी पड़ सकता है।





