प्रौद्योगिकी

मोबाइल PLI को मंजूरी, 62,500 करोड़ का निवेश

Kavita2
15 July 2026 4:11 PM IST
मोबाइल PLI को मंजूरी, 62,500 करोड़ का निवेश
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नई दिल्ली : भारत में मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा देने और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोबाइल फोन प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के दूसरे संस्करण को मंजूरी दे दी है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट ने मोबाइल PLI के दूसरे चरण के लिए 62,500 करोड़ रुपये के प्रावधान को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य भारत में मोबाइल फोन उत्पादन को और बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और देश को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाना है।

मंत्री की ओर से साझा किए गए प्रेजेंटेशन के अनुसार, सरकार इस योजना के जरिए घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ निर्यात को भी प्रोत्साहित करना चाहती है। इससे मोबाइल निर्माण क्षेत्र में नई कंपनियों के आने और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

भारत में पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल फोन निर्माण क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिला है। पहले देश बड़ी मात्रा में मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का आयात करता था, लेकिन सरकार की नीतियों और PLI जैसी योजनाओं के चलते भारत अब दुनिया के प्रमुख मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है।

मोबाइल फोन प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव योजना का पहला चरण भी इसी उद्देश्य से शुरू किया गया था। इसके तहत कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने और तय लक्ष्यों को हासिल करने पर प्रोत्साहन दिया जाता है। अब दूसरे चरण के जरिए इस क्षेत्र को और मजबूती देने की तैयारी है।

मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मोबाइल फोन अब भारत के सबसे बड़े निर्यात उत्पादों में शामिल हो चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत का सबसे अधिक निर्यात किया जाने वाला उत्पाद बनकर उभरा। इस दौरान देश ने करीब 2.62 लाख करोड़ रुपये के स्मार्टफोन का निर्यात किया।

स्मार्टफोन निर्यात में एप्पल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आईफोन बनाने वाली कंपनी Apple ने भारत से स्मार्टफोन निर्यात के क्षेत्र में बड़ी हिस्सेदारी हासिल की है। भारत में आईफोन का उत्पादन बढ़ने के साथ ही देश से होने वाले मोबाइल निर्यात में भी तेजी आई है।

सरकार का मानना है कि मोबाइल निर्माण क्षेत्र में बढ़ती क्षमता से भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण स्थान मिलेगा। इससे न केवल बड़े उद्योगों को फायदा होगा, बल्कि छोटे और मध्यम स्तर के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं को भी अवसर मिलेंगे।

PLI योजना के तहत कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है। इसके जरिए सरकार चाहती है कि कंपनियां भारत में अधिक निवेश करें, स्थानीय स्तर पर निर्माण इकाइयां स्थापित करें और रोजगार के नए अवसर पैदा करें।

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना केंद्र सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। मोबाइल फोन निर्माण में सफलता के बाद सरकार अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण को भी बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल निर्माण क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका से देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि होगी और वैश्विक कंपनियों का भरोसा भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर और मजबूत होगा।

मोबाइल PLI स्कीम के दूसरे संस्करण को मंजूरी मिलने के बाद उद्योग जगत में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद है। कंपनियां अब नई उत्पादन योजनाओं और निवेश विस्तार पर काम कर सकती हैं।

सरकार की इस पहल का लक्ष्य केवल मोबाइल फोन उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल करना है। मोबाइल निर्यात में मिली सफलता के बाद अब सरकार इस गति को बनाए रखने और आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

62,500 करोड़ रुपये के इस नए प्रावधान से मोबाइल निर्माण क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलने की संभावना है। आने वाले वर्षों में भारत से स्मार्टफोन उत्पादन और निर्यात में और वृद्धि देखने को मिल सकती है।

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