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New Delhi नई दिल्ली : भारत के ऑटोमोबाइल बाजार में पिछले 3 से 4 महीनों के दौरान वैकल्पिक ईंधन वाली कारों की बिक्री में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है। खासकर CNG कारों के साथ-साथ हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में भी उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार, जून महीने में पैसेंजर व्हीकल (PV) की रिटेल बिक्री में ऑप्शनल फ्यूल यानी वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ियों की हिस्सेदारी 40.35 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो मई में लगभग 38 प्रतिशत थी। यह ऑटो सेक्टर में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बढ़ोतरी के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव और संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता देखने को मिली, जिसका असर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ा। इसी कारण उपभोक्ताओं ने कम ईंधन खर्च वाली गाड़ियों की ओर रुख करना शुरू किया।
मई महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी हुई, जिससे ग्राहकों की प्राथमिकताओं में बदलाव देखा गया। लोग अब अधिक माइलेज और कम खर्च वाली CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों को प्राथमिकता दे रहे हैं।फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन्स (Federation of Automobile Dealers Associations) के अध्यक्ष सीएस विग्नेश्वर ने इस बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह उपभोक्ताओं का अस्थायी निर्णय है या फिर यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि बाजार की स्थिति पर आने वाले महीनों में स्पष्टता मिलेगी।
ऑटो सेक्टर विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर वाहन खरीद पर पड़ता है। जैसे-जैसे पेट्रोल और डीजल महंगे होते हैं, ग्राहक वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों की ओर तेजी से आकर्षित होते हैं।CNG वाहनों की मांग शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है, जबकि इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारें भविष्य के विकल्प के रूप में मजबूत पकड़ बना रही हैं। कई ऑटो कंपनियां भी इस बढ़ती मांग को देखते हुए नए मॉडल और तकनीक पर निवेश बढ़ा रही हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता जारी रहती है, तो आने वाले समय में भारत में वैकल्पिक ईंधन वाहनों की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है। इससे ऑटो उद्योग में संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि यह रुझान स्थायी साबित होता है या फिर आने वाले महीनों में इसमें गिरावट देखने को मिलती है।





