- Home
- /
- प्रौद्योगिकी
- /
- वित्त वर्ष 2026 में...
प्रौद्योगिकी
वित्त वर्ष 2026 में दिसंबर तक खुले 2.35 करोड़ नए डीमैट खाते: आर्थिक सर्वेक्षण
SHIDDHANT
29 Jan 2026 8:19 PM IST

x
Delhi दिल्ली। गुरुवार को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत के पूंजी बाजारों में खुदरा निवेशकों की भागीदारी में भारी उछाल देखने को मिला है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक कुल 2.35 करोड़ नए डीमैट खाते जोड़े गए हैं। यह उपलब्धि दिखाती है कि भारतीय परिवारों में वित्तीय समझ और निवेश को लेकर भरोसा बढ़ रहा है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया भर में व्यापार को लेकर अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव बाजारों को प्रभावित कर रहे हैं।
इकोनॉमिक सर्वे में बताया गया है कि विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव के बावजूद अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन संतुलित और मजबूत रहा। घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी, कंपनियों के बेहतर नतीजे और टैक्स में राहत, महंगाई में कमी और उदार मौद्रिक नीति जैसे सहायक नीतिगत उपायों के चलते निफ्टी में करीब 11.1 प्रतिशत और सेंसेक्स में लगभग 10.1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
वर्ष की एक बड़ी उपलब्धि सितंबर 2025 में सामने आई, जब देश में 12 करोड़ से ज्यादा यूनिक डीमैट निवेशक हो गए, जिनमें से करीब एक-चौथाई निवेशक महिलाएं हैं। निवेशकों की बढ़ती संख्या सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। दिसंबर 2025 तक म्यूचुअल फंड उद्योग में 5.9 करोड़ यूनिक निवेशक दर्ज किए गए, जिनमें से 3.5 करोड़ निवेशक टियर-1 और टियर-2 शहरों के बाहर के हैं।
सर्वे में यह बात सामने आई कि घरेलू बचत धीरे-धीरे शेयर और म्यूचुअल फंड की ओर बढ़ रही है। सालाना घरेलू वित्तीय बचत में इन साधनों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2011-12 में सिर्फ 2 प्रतिशत थी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 15 प्रतिशत से ज्यादा हो गई।
इस बदलाव की एक बड़ी वजह सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में तेज बढ़ोतरी है। एसआईपी के जरिए औसत मासिक निवेश वित्त वर्ष 2016-17 में 4,000 करोड़ रुपए से भी कम था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक बढ़कर 28,000 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है।
सर्वे के अनुसार, इस साल आईपीओ की संख्या पिछले साल की तुलना में 20 प्रतिशत ज्यादा रही, जबकि इनके जरिए जुटाई गई रकम में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, लुख एवं मध्यम उद्यमों यानी एसएमई की लिस्टिंग भी लगातार बढ़ रही है। इस साल अब तक 217 कंपनियां सूचीबद्ध हुई हैं, जिनके जरिए 9,600 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि जुटाई गई।
कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में भी बीते एक दशक में सालाना करीब 12 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल कॉरपोरेट बॉन्ड जारी राशि 53.6 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जबकि उसी साल नए बॉन्ड जारी कर रिकॉर्ड 9.9 लाख करोड़ रुपए जुटाए गए।
यह रिपोर्ट साफ दिखाती है कि भारत में निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है और आम लोग भी अब बचत के साथ-साथ निवेश की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।
Tagsआर्थिक सर्वेक्षण 2025-26डीमैट खातेखुदरा निवेशकम्यूचुअल फंडएसआईपीआईपीओकॉरपोरेट बॉन्डनिफ्टीसेंसेक्सभारतीय पूंजी बाजारजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi news
Next Story





