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डरबन: कैंसर से उबरने के बाद ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम में वापसी करने वाले निक मैडिनसन के लिए दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहली पारी निराशाजनक रही। करीब दस साल बाद टेस्ट खेलने उतरे बाएं हाथ के बल्लेबाज ने 33 गेंदों का सामना किया, लेकिन खाता नहीं खोल सके। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को डरबन के किंग्समीड मैदान पर शुरू हुए पहले टेस्ट में तेज गेंदबाज मार्को यानसन ने उन्हें बोल्ड किया। मैडिनसन की वापसी अपनी व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी के कारण चर्चा में थी, लेकिन पहली पारी में वह इसे रन बनाने की उपलब्धि में नहीं बदल सके।
34 वर्षीय मैडिनसन को ट्रैविस हेड के साथ पारी की शुरुआत करने का मौका मिला। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी थी। मैडिनसन क्रीज पर टिके रहे और दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों की शुरुआती चुनौती का सामना किया, लेकिन उनके बल्ले से एक भी रन नहीं निकला। पारी के 11वें ओवर में यानसन की गेंद पर कट शॉट खेलने की कोशिश में गेंद उनके बल्ले से लगकर स्टंप्स पर चली गई। इसके साथ ही उनकी 33 गेंदों की पारी शून्य पर समाप्त हो गई।
मैडिनसन से पहले दूसरे सलामी बल्लेबाज ट्रैविस हेड भी अपना विकेट गंवा चुके थे। दोनों ओपनरों के जल्दी लौटने से ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत प्रभावित हुई। मैडिनसन का विकेट दक्षिण अफ्रीका के लिए शुरुआती सत्र की अहम सफलता रहा। हालांकि, उनकी यह पारी पहली गेंद पर आउट होने वाली ‘गोल्डन डक’ नहीं थी। उन्होंने 33 गेंदें खेलीं, लेकिन रन नहीं बना पाए। वापसी के लंबे इंतजार के बाद इतनी गेंदों तक क्रीज पर रहने और फिर बिना स्कोर किए लौटने के कारण उनका प्रदर्शन विशेष चर्चा में आ गया।
गेंदों का सामना करने से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, यह ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज की टेस्ट क्रिकेट में सबसे लंबी शून्य वाली पारी बताई गई है। इसे 21वीं सदी में किसी टेस्ट ओपनर की सर्वाधिक गेंदों वाली डक भी बताया गया है। यहां रिकॉर्ड का संबंध शून्य पर आउट होने से पहले खेली गई गेंदों से है। टेस्ट इतिहास के पुराने मुकाबलों में गेंदों के आंकड़े हर जगह उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए ऑस्ट्रेलियाई रिकॉर्ड को इसी सीमा के साथ देखा जाना चाहिए।
मैडिनसन ने इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के लिए वर्ष 2016 में तीन टेस्ट खेले थे। उनका पदार्पण दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एडिलेड में हुआ था। उस समय वह मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते थे। इसके बाद दिसंबर 2016 में पाकिस्तान के खिलाफ बॉक्सिंग डे टेस्ट उनका आखिरी टेस्ट मुकाबला रहा। डरबन में मैदान पर उतरने के साथ उन्होंने लगभग एक दशक बाद अपना चौथा टेस्ट खेला। इस बार उनकी भूमिका भी बदली हुई थी और उन्हें मध्यक्रम के बजाय नई गेंद का सामना करने के लिए भेजा गया।
इस वापसी का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तिगत पहलू उनकी बीमारी से उबरने की यात्रा है। मैडिनसन को वर्ष 2025 में टेस्टिकुलर कैंसर हुआ था और उन्हें कीमोथेरेपी से गुजरना पड़ा। उपचार के बाद उन्होंने क्रिकेट में वापसी की दिशा में कदम बढ़ाए। कैंसर को हराने के बाद राष्ट्रीय टेस्ट टीम में जगह मिलना उनके करियर का बड़ा पड़ाव बना। हालांकि, बीमारी से उबरने की उपलब्धि और मैदान पर बल्लेबाजी का परिणाम अलग पहलू हैं। डरबन की पहली पारी उनके लिए कठिन रही, जबकि टेस्ट टीम तक दोबारा पहुंचना अपने आप में उल्लेखनीय वापसी है।
मैडिनसन दक्षिण अफ्रीका दौरे की शुरुआती ऑस्ट्रेलियाई टीम में शामिल नहीं थे। जोश इंग्लिस की उंगली में फ्रैक्चर होने के बाद उन्हें टीम में बुलाया गया। इंग्लिस पहले टेस्ट से बाहर हो गए थे। वहीं, कैमरन ग्रीन की पेट की मांसपेशियों में चोट के कारण बल्लेबाजी क्रम में बदलाव हुआ। मैडिनसन को ओपनिंग की जिम्मेदारी मिली और मैथ्यू रेनशॉ को पांचवें स्थान पर भेजा गया। इस तरह चोटों से प्रभावित बल्लेबाजी संयोजन में मैडिनसन के अनुभव और अलग-अलग स्थानों पर खेलने की क्षमता को महत्व दिया गया।
उनके चयन से पहले सवाल भी उठे थे। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई ओपनर मैथ्यू हेडन ने चयनकर्ताओं के फैसले की आलोचना की थी। दूसरी ओर, ट्रैविस हेड ने मैडिनसन का समर्थन किया और अनुभवी खिलाड़ियों की उपयोगिता पर जोर दिया। मैडिनसन मार्च 2025 के बाद से प्रथम श्रेणी मुकाबला नहीं खेले थे। इसके बावजूद टीम प्रबंधन ने उन्हें मौका दिया। कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने उनकी शीर्ष और मध्यक्रम में बल्लेबाजी करने की क्षमता तथा स्पिन और तेज गेंदबाजी के खिलाफ कौशल को चयन का कारण बताया था।
ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच यह तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला है। पहला मुकाबला डरबन में खेला जा रहा है। दूसरा टेस्ट 18 अक्टूबर से गकेबरहा के सेंट जॉर्ज पार्क में और तीसरा 27 अक्टूबर से केपटाउन के न्यूलैंड्स मैदान पर निर्धारित है। मैडिनसन की पहली पारी शून्य पर समाप्त हुई है और शुरुआती मौका उनके पक्ष में नहीं रहा। फिलहाल उनकी वापसी की खबर में दो तथ्य प्रमुख हैं—कैंसर से उबरकर करीब दस साल बाद टेस्ट टीम में स्थान हासिल करना और उस वापसी की पहली पारी में 33 गेंदों पर बिना रन बनाए आउट होना।
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