उत्तर प्रदेश

पानी बचाने आगे आए 263 किसान, ड्रिप-स्प्रिंकलर तकनीक अपनाई

Kavita2
9 Oct 2026 2:57 PM IST
पानी बचाने आगे आए 263 किसान, ड्रिप-स्प्रिंकलर तकनीक अपनाई
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मऊ। पानी की बचत और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जिले के किसान आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। खेतों में पानी के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से किसानों ने ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली की ओर कदम बढ़ाया है। अप्रैल महीने में खेत खाली होने और पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होने के बाद जिले के 263 किसानों ने अपने खेतों में ड्रिप और स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई करने के लिए पाइप लगवाए हैं। किसानों को इस तकनीक को अपनाने के लिए उद्यान विभाग की ओर से 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

धान की फसल की कटाई के बाद किसान दोबारा अपने खेतों में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के पाइप लगाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए किसानों ने उद्यान विभाग में पंजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। आधुनिक सिंचाई तकनीक के प्रति किसानों की बढ़ती रुचि को जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

263 किसानों ने खेतों में लगवाए ड्रिप और स्प्रिंकलर पाइप

जिले में पानी की बचत के उद्देश्य से किसानों ने ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को अपनाना शुरू किया है। अप्रैल महीने में खेत खाली होने के बाद किसानों ने अपने खेतों में इन तकनीकों के माध्यम से सिंचाई की व्यवस्था की।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक जिले के 263 किसानों ने ड्रिप और स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई के लिए पाइप लगवाए हैं। इन प्रणालियों का उद्देश्य खेतों में पानी का नियंत्रित और जरूरत के अनुसार उपयोग करना है।

कृषि क्षेत्र में पानी का उपयोग एक महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में सिंचाई की आधुनिक विधियों को अपनाकर किसान पानी के बेहतर प्रबंधन की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकों के माध्यम से फसलों को आवश्यकता के अनुसार पानी उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे परंपरागत सिंचाई की तुलना में कई परिस्थितियों में पानी की बचत संभव होती है।

उद्यान विभाग दे रहा 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान

किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणाली अपनाने के लिए उद्यान विभाग की ओर से आर्थिक सहायता दी जा रही है। विभाग ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई व्यवस्था लगाने के लिए किसानों को 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध करा रहा है।

इस सहायता का उद्देश्य किसानों पर सिंचाई उपकरण लगाने के खर्च का बोझ कम करना और जल संरक्षण से जुड़ी तकनीकों को बढ़ावा देना है।

ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली लगाने में पाइप, पानी वितरण से जुड़े उपकरण और अन्य आवश्यक सामग्री का उपयोग होता है। इन उपकरणों की लागत किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

ऐसी स्थिति में विभागीय अनुदान किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। हालांकि, अनुदान की वास्तविक राशि और पात्रता संबंधित योजना के नियमों पर निर्भर करती है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में अलग-अलग किसान श्रेणियों के लिए अनुदान की विस्तृत शर्तें नहीं बताई गई हैं।

धान कटाई के बाद फिर लगाए जाएंगे पाइप

जिले के किसानों ने धान की फसल कटाई के बाद दोबारा ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के पाइप लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, अप्रैल महीने में खेत खाली होने के दौरान किसानों ने सिंचाई के लिए पाइप लगवाए थे। अब धान की कटाई के बाद किसान फिर से अपने खेतों में इन पाइपों को लगाने की योजना बना रहे हैं।

इसके लिए उद्यान विभाग में पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। किसान विभाग के माध्यम से योजना से जुड़ने और सिंचाई प्रणाली का लाभ लेने के लिए आवेदन कर रहे हैं।

धान की कटाई के बाद खेतों में अगली फसल की तैयारी के दौरान सिंचाई की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। ऐसे समय में ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक किसानों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकती है।

क्या है ड्रिप सिंचाई प्रणाली?

ड्रिप सिंचाई को टपक सिंचाई भी कहा जाता है। इस तकनीक में पाइप और विशेष उपकरणों की सहायता से पानी को बूंद-बूंद करके पौधों की जड़ों के आसपास पहुंचाया जाता है।

इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य फसलों को नियंत्रित मात्रा में पानी उपलब्ध कराना है। इससे खेत के ऐसे हिस्सों में अनावश्यक पानी देने की जरूरत कम हो सकती है, जहां सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती।

ड्रिप सिंचाई विशेष रूप से कई प्रकार की बागवानी फसलों, सब्जियों और कतारों में लगाई जाने वाली फसलों के लिए उपयोगी मानी जाती है।

हालांकि, इसका लाभ फसल के प्रकार, मिट्टी, जल उपलब्धता और प्रणाली के सही संचालन पर निर्भर करता है।

स्प्रिंकलर सिंचाई से पानी का बेहतर उपयोग

स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली में पाइप और स्प्रिंकलर उपकरणों के माध्यम से पानी को बारिश की तरह खेत में फैलाया जाता है।

इस तकनीक में पानी छोटे-छोटे छिद्रों से निकलकर फसलों पर गिरता है। इससे खेत में पानी का अपेक्षाकृत समान वितरण करने में मदद मिल सकती है।

स्प्रिंकलर सिंचाई का उपयोग विभिन्न प्रकार की फसलों में किया जा सकता है। हालांकि, तेज हवा, पानी का दबाव और उपकरणों की स्थिति इसके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।

ड्रिप और स्प्रिंकलर दोनों प्रणालियों का उद्देश्य उपलब्ध जल संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग करना है।

जल संरक्षण और पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण पहल

खेती में पानी की आवश्यकता फसल, मौसम और मिट्टी की स्थिति के अनुसार अलग-अलग होती है। ऐसे में जल संरक्षण के लिए सिंचाई की उपयुक्त विधि का चयन महत्वपूर्ण है।

जिले के किसानों द्वारा ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक अपनाने की पहल जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से जुड़ी है।

यदि इन प्रणालियों का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो पानी की अनावश्यक बर्बादी कम की जा सकती है। इससे सिंचाई व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, जिले में इन प्रणालियों के इस्तेमाल से अब तक कितने पानी की वास्तविक बचत हुई है, इसका कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है।

पंजीकरण प्रक्रिया में किसान दिखा रहे रुचि

धान की कटाई के बाद सिंचाई पाइप दोबारा लगाने के लिए किसानों ने उद्यान विभाग में पंजीकरण शुरू कर दिया है।

विभाग की ओर से दिए जा रहे अनुदान के कारण किसानों को सिंचाई उपकरण लगाने में आर्थिक सहायता मिल रही है। इससे आधुनिक सिंचाई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा मिल सकता है।

फिलहाल जिले में 263 किसानों द्वारा ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणाली के लिए पाइप लगवाने की जानकारी सामने आई है। आगे पंजीकरण कराने वाले किसानों की संख्या और स्वीकृत आवेदनों के संबंध में विस्तृत आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

आधुनिक सिंचाई से खेती को मिलेगी मदद

जिले में किसानों की यह पहल जल संरक्षण और कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण है। अप्रैल महीने में खेत खाली होने के बाद 263 किसानों ने ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के लिए पाइप लगवाए थे।

अब धान की कटाई के बाद किसान फिर से इस व्यवस्था को अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए उद्यान विभाग में पंजीकरण भी शुरू हो गया है।

विभाग की ओर से 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराए जाने से किसानों को आर्थिक सहायता मिल रही है। आने वाले समय में इस तकनीक के उपयोग से पानी की वास्तविक बचत और खेती पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करना भी महत्वपूर्ण होगा।

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