
बेंगलुरु, पीटीआई। भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारियों को मजबूत करने के लिए एक अहम सीरीज खेलने जा रही है। भारत सात से 13 अगस्त तक बेंगलुरु स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के नेताजी सुभाष दक्षिणी केंद्र में मलेशिया की अंडर-21 पुरुष हॉकी टीम की मेजबानी करेगा। दोनों देशों के बीच होने वाली यह आठ मैचों की सीरीज युवा खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव हासिल करने का बड़ा अवसर मानी जा रही है।
इस सीरीज में मलेशिया की अंडर-21 टीम भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम के खिलाफ पांच मुकाबले खेलेगी, जबकि तीन मैच साई टीम के साथ खेले जाएंगे। भारतीय टीम के लिए यह सीरीज आने वाले बड़े टूर्नामेंटों की तैयारी के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। कोचिंग स्टाफ इस दौरान खिलाड़ियों की फिटनेस, रणनीति और मैदान पर प्रदर्शन को परखने का मौका मिलेगा।
भारतीय जूनियर टीम मलेशिया के खिलाफ सात, आठ, 10, 12 और 13 अगस्त को मुकाबले खेलेगी। वहीं मलेशियाई टीम साई टीम के खिलाफ तीन, पांच और 15 अगस्त को मैदान पर उतरेगी। लगातार होने वाले इन मुकाबलों से खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी माहौल में खेलने का अनुभव मिलेगा और टीम की कमजोरियों को सुधारने का अवसर भी प्राप्त होगा।
भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम के मुख्य कोच फ्रेडरिक सोयेज ने इस सीरीज को बेहद अहम बताया है। उन्होंने कहा कि मलेशिया के खिलाफ होने वाले मुकाबले आगामी एशिया कप की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कोच के अनुसार, टीम ने हाल ही में बेल्जियम दौरे के दौरान कई सकारात्मक पहलुओं पर काम किया था और अब इस सीरीज के जरिए उन सुधारों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
फ्रेडरिक सोयेज ने कहा कि बेल्जियम दौरे में टीम ने कई मुकाबले खेले थे, जिनसे खिलाड़ियों को अपनी तकनीक और रणनीति को बेहतर करने का मौका मिला। मलेशिया के खिलाफ सीरीज उसी प्रक्रिया की अगली कड़ी है। टीम का लक्ष्य लगातार सुधार करते हुए बड़े टूर्नामेंटों के लिए खुद को तैयार करना है।
भारतीय जूनियर हॉकी टीम के लिए यह सीरीज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय शैली की हॉकी खेलने का मौका मिलेगा। मलेशिया की टीम एशियाई हॉकी में एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी मानी जाती है और उसके खिलाफ मुकाबले भारतीय खिलाड़ियों की क्षमता की असली परीक्षा साबित होंगे।
इस सीरीज का एक उद्देश्य भारत और मलेशिया के बीच हॉकी संबंधों को और मजबूत करना भी है। दोनों देशों की युवा टीमें एक-दूसरे के खिलाफ खेलकर अनुभव साझा करेंगी और एशियाई हॉकी के स्तर को बढ़ावा मिलेगा। हॉकी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी द्विपक्षीय सीरीज युवा खिलाड़ियों के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं।
भारतीय टीम के लिए घरेलू मैदान का फायदा भी रहेगा। बेंगलुरु का SAI नेताजी सुभाष दक्षिणी केंद्र देश के प्रमुख प्रशिक्षण केंद्रों में शामिल है, जहां खिलाड़ियों को बेहतरीन सुविधाएं मिलती हैं। यहां होने वाले मुकाबलों से भारतीय खिलाड़ी घरेलू परिस्थितियों में अपनी तैयारियों को मजबूत कर सकेंगे।
आगामी एशिया कप और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखते हुए भारतीय जूनियर टीम प्रबंधन इस सीरीज में अधिक से अधिक खिलाड़ियों को मौका देने की कोशिश करेगा। युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर टीम संयोजन और रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।
भारत और मलेशिया के बीच होने वाली यह आठ मैचों की हॉकी सीरीज न केवल खिलाड़ियों की परीक्षा होगी, बल्कि दोनों देशों के लिए भविष्य की मजबूत टीम तैयार करने का महत्वपूर्ण कदम भी साबित होगी। भारतीय प्रशंसकों को उम्मीद है कि युवा खिलाड़ी इस अवसर का लाभ उठाकर शानदार प्रदर्शन करेंगे और देश का नाम रोशन करेंगे।





