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गाले टेस्ट में देवदत्त पडिक्कल का शानदार शतक, नंबर-3 पर खत्म किया भारत का लंबा इंतजार

Kavita2
15 Aug 2026 5:59 PM IST
गाले टेस्ट में देवदत्त पडिक्कल का शानदार शतक, नंबर-3 पर खत्म किया भारत का लंबा इंतजार
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गाले। भारतीय बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने शनिवार को श्रीलंका के खिलाफ गाले में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच में शानदार शतक लगाकर भारतीय टेस्ट टीम में अपनी वापसी को यादगार बना दिया। नंबर-3 पर बल्लेबाजी करने उतरे बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने संयम और आक्रामकता का शानदार मिश्रण दिखाते हुए अपने टेस्ट करियर का पहला शतक पूरा किया। पडिक्कल ने अपने तीसरे ही टेस्ट मुकाबले में यह उपलब्धि हासिल कर भारतीय टीम में अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है।

लंबे समय बाद टेस्ट टीम में मौका मिलने के बावजूद पडिक्कल पर किसी तरह का दबाव नजर नहीं आया। उन्होंने शुरुआत से ही श्रीलंकाई गेंदबाजों का आत्मविश्वास के साथ सामना किया। गाले की पिच पर स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ बल्लेबाजी को चुनौतीपूर्ण माना जाता है, लेकिन पडिक्कल ने शानदार फुटवर्क और धैर्य का परिचय देते हुए बड़ी पारी खेली।

पडिक्कल के लिए यह शतक इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अपना पिछला टेस्ट मैच 2024-25 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान ऑस्ट्रेलिया में खेला था। इसके बाद उन्हें लंबे समय तक टेस्ट टीम की प्लेइंग इलेवन में खेलने का मौका नहीं मिला। श्रीलंका के खिलाफ अवसर मिलने पर उन्होंने इसे दोनों हाथों से भुनाया और शतक लगाकर चयनकर्ताओं तथा टीम मैनेजमेंट को मजबूत संदेश दिया।

नंबर-3 की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद पडिक्कल ने परिस्थितियों को समझने में जल्दबाजी नहीं दिखाई। उन्होंने शुरुआत में गेंदबाजों को परखा और क्रीज पर समय बिताया। एक बार लय हासिल करने के बाद उन्होंने मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट लगाए। उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया।

इस शतक के साथ पडिक्कल ने भारत के लिए नंबर-3 बल्लेबाजी क्रम से जुड़ा एक लंबा इंतजार भी समाप्त कर दिया। शुभमन गिल के बाद इस स्थान पर भारत के लिए टेस्ट शतक लगाने वाले वह पहले बल्लेबाज बन गए। गिल ने सितंबर 2024 में चेन्नई में बांग्लादेश के खिलाफ नंबर-3 पर बल्लेबाजी करते हुए शतक लगाया था।

इसके बाद भारत ने 19 टेस्ट मुकाबलों में वन-डाउन यानी नंबर-3 की भूमिका में सात अलग-अलग बल्लेबाजों को आजमाया, लेकिन कोई भी इस स्थान पर शतक नहीं लगा पाया था। ऐसे में पडिक्कल की यह पारी व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ भारतीय टीम के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।

टेस्ट क्रिकेट में नंबर-3 का स्थान बल्लेबाजी क्रम की सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक माना जाता है। सलामी बल्लेबाज के जल्दी आउट होने की स्थिति में नंबर-3 बल्लेबाज को नई गेंद का सामना करना पड़ सकता है, जबकि अच्छी शुरुआत मिलने पर उसे पारी को आगे बढ़ाने और बड़ी साझेदारी बनाने की जिम्मेदारी निभानी होती है। पडिक्कल ने गाले में इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।

पडिक्कल ने अपने तीसरे टेस्ट में ही पहला शतक लगाकर यह भी दिखाया कि लंबे प्रारूप में वह बड़ी पारी खेलने की क्षमता रखते हैं। घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाने के बाद उन्हें भारतीय टीम में अवसर मिला था। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शतक ने उनकी दावेदारी को और मजबूत कर दिया है।

भारतीय टेस्ट टीम में बल्लेबाजी स्थानों को लेकर लगातार प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। युवा खिलाड़ियों के सामने मिले हुए अवसरों का फायदा उठाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। पडिक्कल ने इस लिहाज से गाले टेस्ट में बेहद महत्वपूर्ण पारी खेली है। उनकी यह पारी आने वाले मुकाबलों में प्लेइंग इलेवन में उनकी स्थिति को मजबूत कर सकती है।

बाएं हाथ का बल्लेबाज होना भी पडिक्कल के पक्ष में जा सकता है। भारतीय बल्लेबाजी क्रम में दाएं और बाएं हाथ के बल्लेबाजों का संयोजन विपक्षी गेंदबाजों की लाइन और लेंथ बिगाड़ने में मददगार साबित हो सकता है। पडिक्कल ने श्रीलंका के गेंदबाजों के खिलाफ अपनी पहुंच और फुटवर्क का प्रभावी इस्तेमाल किया।

शतक के करीब पहुंचने के दौरान भी पडिक्कल ने धैर्य नहीं खोया। आम तौर पर पहला अंतरराष्ट्रीय शतक पूरा करने के करीब पहुंचने पर बल्लेबाज दबाव में आ सकते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी स्वाभाविक बल्लेबाजी जारी रखी और आखिरकार तीन अंकों का आंकड़ा हासिल किया।

जैसे ही पडिक्कल ने अपना शतक पूरा किया, भारतीय खेमे में खुशी का माहौल दिखाई दिया। टीम के सदस्यों ने उनकी उपलब्धि की सराहना की। मैदान पर मौजूद भारतीय समर्थकों ने भी तालियां बजाकर बाएं हाथ के बल्लेबाज का उत्साह बढ़ाया।

पडिक्कल की यह पारी उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। लंबे अंतराल के बाद टेस्ट टीम में लौटना और उसी मुकाबले में शतक बनाना किसी भी बल्लेबाज के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला प्रदर्शन है।

इस शतक ने टीम इंडिया की नंबर-3 की तलाश को भी फिलहाल एक मजबूत विकल्प दिया है। पिछले 19 टेस्ट मैचों में इस स्थान पर सात बल्लेबाजों को आजमाने के बाद पडिक्कल का शतक टीम प्रबंधन के लिए राहत की खबर माना जा सकता है।

अब पडिक्कल के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखने की होगी। गाले में उनके बल्ले से निकला पहला टेस्ट शतक न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय टेस्ट टीम में उनकी नई शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है।

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