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हरियाणा में बंदर से क्रूरता, वायरल वीडियो पर फूटा गुस्सा

nidhi
23 Oct 2026 12:43 PM IST
हरियाणा में बंदर से क्रूरता, वायरल वीडियो पर फूटा गुस्सा
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बंदर से बदसलूकी कैमरे में कैद, देखकर भड़के लोग
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक बंदर को पकड़े जाने, पीटे जाने और कैद किए जाने के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। इन वीडियो ने जानवरों के प्रति क्रूरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं और इंसान-बंदर संघर्ष के मामलों में प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इन वीडियो ने लोगों का ध्यान इस बात की ओर खींचा है कि जानवर के साथ कैसा बर्ताव किया गया। अब मांग उठ रही है कि बंदर को पकड़े जाने और उसके साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की पूरी घटना की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। यह वायरल वीडियो हरियाणा के फरीदाबाद का है। पकड़े गए जानवर के साथ किए गए इस अमानवीय बर्ताव को लेकर ऑनलाइन काफी गुस्सा और विरोध देखने को मिल रहा है।
हालांकि, रीसस मकाक (बंदरों की एक प्रजाति) द्वारा लोगों पर हमला करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की खबरें सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा करती हैं, लेकिन पशु कल्याण समर्थकों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए कानूनी और मानवीय तरीकों का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
वायरल वीडियो ने बंदर के साथ हुए बर्ताव पर सवाल खड़े किए
वीडियो में से एक में एक व्यक्ति को रिपोर्टर से बंदर से जुड़ी चिंताओं के बारे में बात करते हुए देखा जा सकता है। अन्य क्लिप्स में जानवर को पकड़े जाने, उसके साथ मारपीट किए जाने और उसे एक पिंजरे में कैद किए जाने के दृश्य दिखाई दे रहे हैं।
इस घटना से जुड़े कई अहम सवाल अभी भी बने हुए हैं—जैसे कि बंदर को पकड़ने का आदेश किसने दिया और क्या उसे पकड़ते समय सही तरीके अपनाए गए थे? साथ ही, यह मांग भी की जा रही है कि प्रशासन पता लगाए कि अभी वह बंदर कहां है और उसकी हालत कैसी है।
इंटरनेट उपयोगकर्ताओं और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कथित मारपीट की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जो भी व्यक्ति इस क्रूरता के लिए जिम्मेदार पाया जाए, उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
'पशु क्रूरता निवारण अधिनियम' (Prevention of Cruelty to Animals Act) क्या कहता है?
'पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960' की धारा 11 के तहत कई ऐसी गतिविधियों को क्रूरता माना गया है, जिनमें किसी जानवर को पीटना या उसे बेवजह दर्द और तकलीफ पहुंचाना शामिल है।
बंदर को पकड़ने और कैद करने की कार्रवाई वन्यजीव कानूनों और नियमों के दायरे में कितनी वैध है, इसकी भी जांच होनी चाहिए। इसमें यह भी देखा जाना चाहिए कि क्या ऐसा करने के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं।
किसी भी तरह के कानूनी उल्लंघन का पता लगाने से पहले, प्रशासन को इस मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच करनी चाहिए।
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