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स्पिनरों की नई खेप पर सवाल लक्ष्मण से जवाब तलब करेगा BCCI

nidhi
3 Sept 2026 8:58 AM IST
स्पिनरों की नई खेप पर सवाल लक्ष्मण से जवाब तलब करेगा BCCI
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अच्छे स्पिनरों की कमी ने बढ़ाई BCCI की टेंशन
भारतीय क्रिकेट में लंबे समय से स्पिन गेंदबाजी को सबसे मजबूत पक्षों में से एक माना जाता रहा है। बिशन सिंह बेदी, अनिल कुंबले, हरभजन सिंह और रविचंद्रन अश्विन जैसे गेंदबाजों की विरासत के बीच अब अगली पीढ़ी के उच्च स्तरीय स्पिनरों को तैयार करने को लेकर चिंता सामने आ रही है। घरेलू क्रिकेट और डेवलपमेंट सिस्टम से अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार स्पिनरों की संख्या को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI समीक्षा कर सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक बोर्ड भविष्य के लिए स्पिन गेंदबाजी विकल्पों की स्थिति को गंभीरता से देख रहा है। इस सिलसिले में बेंगलुरु स्थित BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की भूमिका भी समीक्षा के दायरे में आ सकती है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण से खिलाड़ियों, विशेष रूप से स्पिनरों के विकास से जुड़ी प्रक्रिया और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी मांगी जा सकती है।
स्पिन हमेशा से रही भारत की ताकत
भारतीय पिचों पर स्पिन गेंदबाजों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम ने लंबे समय तक अपने स्पिन आक्रमण के दम पर घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाया है। पिछले दशक में रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा की जोड़ी ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई।
लेकिन अश्विन के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद अगली पीढ़ी के ऐसे गेंदबाज तैयार करने की जरूरत और बढ़ गई है जो लंबे समय तक तीनों प्रारूपों या कम से कम टेस्ट क्रिकेट में भारत की जरूरतों को पूरा कर सकें।
घरेलू क्रिकेट पर भी नजर
भारत के पास रणजी ट्रॉफी और दूसरे घरेलू टूर्नामेंटों का विशाल ढांचा है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुरंत प्रभाव छोड़ने वाले स्पिनरों को तैयार करना आसान नहीं है। घरेलू क्रिकेट में विकेट लेने और अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाजों के खिलाफ सफल होने के बीच बड़ा अंतर होता है।
इसी कारण युवा स्पिनरों की तकनीक, गेंद पर नियंत्रण, विविधता और लंबे स्पैल करने की क्षमता पर काम करना महत्वपूर्ण है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में खिलाड़ियों की तकनीकी कमियों को पहचानकर विशेषज्ञ कोचिंग उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
लक्ष्मण की भूमिका क्यों अहम?
वीवीएस लक्ष्मण लंबे समय से भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी तैयार करने वाली व्यवस्था से जुड़े हैं। राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के पुनर्गठन के बाद सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। युवा और उभरते खिलाड़ियों के विकास से लेकर चोट के बाद खिलाड़ियों के पुनर्वास तक कई महत्वपूर्ण काम यहां किए जाते हैं।
यदि BCCI स्पिन गेंदबाजी की स्थिति की औपचारिक समीक्षा करता है तो लक्ष्मण और संबंधित कोचिंग स्टाफ से यह पूछा जा सकता है कि प्रतिभाशाली स्पिनरों की पहचान और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए किस तरह की योजना पर काम हो रहा है।
सिर्फ विकल्प नहीं गुणवत्ता भी जरूरी
भारत में स्पिन गेंदबाजों की संख्या कम नहीं है। घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में कई स्पिनर लगातार सामने आते हैं। लेकिन टेस्ट क्रिकेट के लिए गेंदबाज तैयार करने की जरूरत अलग होती है। पांच दिन के मुकाबले में बल्लेबाज को लगातार दबाव में रखना, अलग-अलग परिस्थितियों में विकेट निकालना और लंबे स्पैल में नियंत्रण बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है।
टी20 क्रिकेट में सफल स्पिनर का टेस्ट क्रिकेट में भी उसी तरह सफल होना जरूरी नहीं है। इसलिए बोर्ड के सामने चुनौती ऐसे गेंदबाजों को विकसित करने की है जो परिस्थितियों के अनुसार अपनी गेंदबाजी में बदलाव कर सकें।
भविष्य की तैयारी पर जोर
भारतीय क्रिकेट में बदलाव का दौर चल रहा है और अनुभवी खिलाड़ियों के बाद नई पीढ़ी को जिम्मेदारी संभालनी है। तेज गेंदबाजी में भारत ने पिछले वर्षों में मजबूत विकल्प तैयार किए हैं। अब स्पिन विभाग में भी उसी तरह की गहराई बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
आने वाले वर्षों में भारत को घरेलू और विदेशी दोनों परिस्थितियों में लगातार टेस्ट क्रिकेट खेलना है। ऐसे में एक या दो गेंदबाजों पर निर्भर रहने के बजाय मजबूत स्पिन बेंच तैयार करना जरूरी है।
BCCI की संभावित समीक्षा इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। यदि बोर्ड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जवाब मांगता है तो चर्चा केवल मौजूदा स्पिनरों के प्रदर्शन तक सीमित रहने के बजाय प्रतिभा की पहचान, प्रशिक्षण और भविष्य के लिए तैयार खिलाड़ियों की संख्या पर भी केंद्रित रह सकती है।
भारतीय क्रिकेट के लिए स्पिन गेंदबाजी ऐतिहासिक रूप से बड़ी ताकत रही है। इसलिए अगली पीढ़ी के विश्वस्तरीय स्पिनरों की कमी की आशंका को गंभीरता से लिया जाना स्वाभाविक है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि BCCI और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इस चुनौती से निपटने के लिए किस तरह की दीर्घकालिक रणनीति तैयार करते हैं।
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