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खेल के साथ बिजनेस में भी सिंधु का जलवा, जानें सिंधु की नेटवर्थ

Rajeshwari Nishad
3 Nov 2026 3:48 PM IST
खेल के साथ बिजनेस में भी सिंधु का जलवा, जानें सिंधु की नेटवर्थ
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स्पोर्ट्स : भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उम्र और कठिन दौर किसी चैंपियन के इरादों को कमजोर नहीं कर सकते। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता सिंधु ने जर्मनी में आयोजित हाइलो ओपन 2026 का खिताब जीतकर शानदार वापसी की है। यह मौजूदा वर्ष में उनका दूसरा अंतरराष्ट्रीय खिताब है। इस जीत के बाद खेल विशेषज्ञ उनके प्रदर्शन को करियर की नई शुरुआत मान रहे हैं। वहीं, खेल के मैदान से बाहर उनकी करोड़ों रुपये की कमाई, ब्रांड एंडोर्समेंट और स्टार्टअप कंपनियों में निवेश भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।

जर्मनी में दिखा सिंधु का पुराना अंदाज
पीवी सिंधु ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को जर्मनी के सारब्रुकेन में आयोजित हाइलो ओपन सुपर 500 बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला एकल फाइनल में डेनमार्क की लाइन होजमार्क क्येरफेल्ट को सीधे गेमों में हराया। सिंधु ने मुकाबला 21-12 और 21-14 से अपने नाम किया।
फाइनल में भारतीय खिलाड़ी शुरुआत से ही आक्रामक दिखाई दीं। उन्होंने शानदार स्मैश, बेहतर कोर्ट कवरेज और सटीक नेट प्ले के दम पर प्रतिद्वंद्वी को वापसी का ज्यादा मौका नहीं दिया।इस जीत की सबसे खास बात सिंधु का आत्मविश्वास और खेल में दिखाई दिया बदलाव रहा। उन्होंने केवल ताकतवर शॉट्स पर निर्भर रहने के बजाय रणनीति और तकनीक का भी बेहतरीन इस्तेमाल किया। खेल विशेषज्ञों के मुताबिक, उनके खेल में आई यह परिपक्वता भविष्य के बड़े टूर्नामेंटों में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
2026 में जीता दूसरा बड़ा खिताब
सिंधु के लिए 2026 का साल अब तक उपलब्धियों से भरा रहा है। इससे पहले जुलाई में उन्होंने जापान ओपन सुपर 750 का खिताब जीता था। उस टूर्नामेंट के फाइनल में सिंधु ने जापान की अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से हराकर इतिहास रचा था।वह जापान ओपन महिला एकल खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी इस उपलब्धि पर बधाई दी थी।जापान ओपन के बाद सिंधु ने फ्रेंच ओपन में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि, वहां उन्हें खिताब नहीं मिल पाया। इसके तुरंत बाद जर्मनी में हाइलो ओपन जीतकर उन्होंने दिखाया कि उनकी फॉर्म लगातार बेहतर हो रही है।यह 2022 के बाद पहला सीजन है, जब सिंधु ने एक ही वर्ष में दो बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीते हैं।
ओलंपिक से विश्व चैंपियनशिप तक शानदार सफर
पीवी सिंधु भारतीय बैडमिंटन इतिहास की सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने 2016 के रियो ओलंपिक में रजत पदक जीता था। इसके बाद टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक हासिल करके वह दो व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
सिंधु ने 2019 में विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया था। विश्व चैंपियनशिप में उनके कुल पांच पदक हैं।हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में चोट, फिटनेस संबंधी चुनौतियों और लगातार बदलती प्रतिस्पर्धा के कारण उनके प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कई बड़े टूर्नामेंटों में शुरुआती हार के बाद उनकी वापसी को लेकर सवाल उठने लगे थे।लेकिन 2026 में दो खिताब जीतकर उन्होंने आलोचकों को अपने प्रदर्शन से जवाब दिया है।
पीवी सिंधु की कमाई भी करोड़ों में
मैदान पर शानदार सफलता हासिल करने वाली सिंधु व्यावसायिक दुनिया में भी बड़ा नाम हैं। उनकी आय का महत्वपूर्ण हिस्सा प्रायोजन समझौतों, विज्ञापनों और विभिन्न व्यावसायिक साझेदारियों से आता है।फोर्ब्स की दिसंबर 2024 की सूची के अनुसार, उस वर्ष सिंधु की अनुमानित कमाई 71 लाख अमेरिकी डॉलर थी। तत्कालीन विनिमय दर के हिसाब से यह लगभग 60 करोड़ रुपये के आसपास बैठती थी।
फोर्ब्स ने उनके प्रमुख प्रायोजकों में एशियन पेंट्स, बैंक ऑफ बड़ौदा, ब्रिजस्टोन, जॉनसन एंड
जॉनसन
, ली-निंग और वीजा जैसी कंपनियों का उल्लेख किया था।मीडिया रिपोर्टों में वर्ष 2025 के दौरान उनकी कमाई करीब 50 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने वाला अंतिम ऑडिटेड वित्तीय विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।यह समझना भी जरूरी है कि खिलाड़ी की सालाना कमाई और उसकी कुल संपत्ति अलग-अलग होती हैं। सालाना आय में विज्ञापनों और पुरस्कार राशि से होने वाली कमाई शामिल हो सकती है, जबकि कुल संपत्ति में निवेश, अचल संपत्ति तथा अन्य परिसंपत्तियों और देनदारियों का आकलन किया जाता है।
स्टार्टअप कंपनियों में भी किया निवेश
पीवी सिंधु केवल खेल और विज्ञापनों तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने कारोबारी दुनिया में भी अपनी पहचान बनाने की कोशिश की है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनका निवेश पोर्टफोलियो स्वास्थ्य, पोषण, टेक्नोलॉजी और उपभोक्ता सेवाओं से जुड़े कई कारोबारों तक फैला हुआ है।इनमें बेटर न्यूट्रिशन, हूप और किरानाप्रो जैसी कंपनियों के नाम सामने आए हैं। फरवरी 2025 में क्विक-कॉमर्स स्टार्टअप किरानाप्रो में उनके निवेश की खबर भी आई थी। हालांकि, इस निवेश की रकम सार्वजनिक नहीं की गई थी।कुछ रिपोर्टों में सिंधु के करीब 12 स्टार्टअप और कंपनियों से जुड़े निवेश का उल्लेख किया गया है, लेकिन सभी निवेशों में उनकी सटीक हिस्सेदारी और वर्तमान बाजार मूल्य की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।विशेषज्ञों के अनुसार, किसी स्टार्टअप में हिस्सेदारी होने का अर्थ यह नहीं है कि निवेशक उस रकम को तुरंत नकद प्राप्त कर सकता है। गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों की वास्तविक कीमत कंपनी के मूल्यांकन और भविष्य में उपलब्ध बिक्री के अवसरों पर निर्भर करती है।
ब्रांड वैल्यू बनी हुई है मजबूत
पीवी सिंधु की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए उनकी उपलब्धियां हैं। ओलंपिक पदकों और विश्व चैंपियनशिप में सफलता ने उन्हें देश की प्रमुख खेल हस्तियों में शामिल किया है।कंपनियां किसी खिलाड़ी के साथ विज्ञापन समझौते करते समय केवल मौजूदा प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि उसकी पहचान, विश्वसनीयता और प्रशंसकों के बीच लोकप्रियता को भी महत्व देती हैं।सिंधु की लगातार वापसी करने की क्षमता उनके ब्रांड को मजबूती देती है। यही वजह है कि मैदान पर कठिन दौर के बावजूद उनकी व्यावसायिक पहचान बनी हुई है।
अब अगला लक्ष्य विश्व टूर फाइनल्स
हाइलो ओपन की जीत से सिंधु की बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल्स में जगह बनाने की उम्मीदों को भी बल मिला है। हालांकि, अंतिम क्वालिफिकेशन संबंधित रैंकिंग और पात्रता नियमों पर निर्भर करेगा।हाइलो ओपन के बाद सिंधु ने अपने सहयोगी स्टाफ और कोचिंग टीम की मेहनत की सराहना की। उन्होंने संकेत दिया कि उम्र के साथ सही टूर्नामेंट चुनना और खेल में समझदारी से बदलाव करना महत्वपूर्ण हो गया है।
31 वर्षीय सिंधु की हालिया सफलता भारतीय बैडमिंटन के लिए सकारात्मक संकेत है। उनकी वापसी युवा खिलाड़ियों को भी यह संदेश देती है कि खराब फॉर्म या असफलता किसी करियर का अंत नहीं होती।दो अंतरराष्ट्रीय खिताब, लगातार बेहतर होता प्रदर्शन और मजबूत व्यावसायिक पहचान—इन उपलब्धियों के साथ पीवी सिंधु ने दिखाया है कि वह अभी भी विश्व बैडमिंटन में बड़ी चुनौती पेश करने का दम रखती हैं।
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