खेल

अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने रचा इतिहास, 2026 में जीते दो ग्रैंड स्लैम खिताब

Ratna Netam
2 Nov 2026 6:55 PM IST
अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने रचा इतिहास, 2026 में जीते दो ग्रैंड स्लैम खिताब
x
नई दिल्ली। जर्मनी के स्टार टेनिस खिलाड़ी अलेक्जेंडर ज्वेरेव के लिए साल 2026 किसी सपने के सच होने से कम नहीं रहा। बचपन से टाइप-1 डायबिटीज जैसी चुनौती का सामना करने वाले ज्वेरेव ने अपनी मेहनत, अनुशासन और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर टेनिस की दुनिया में नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने इस साल फ्रेंच ओपन और यूएस ओपन जैसे दो प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम खिताब अपने नाम किए। इसके साथ ही 2 नवंबर 2026 से जारी एटीपी रैंकिंग में वह दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी बन गए हैं। करीब 13 साल के पेशेवर करियर में लगातार संघर्ष करने के बाद हासिल हुई यह उपलब्धि उनके लिए बेहद खास है।29 वर्षीय ज्वेरेव ने अपने शानदार सीजन के दौरान साबित किया कि खेल में सफलता हासिल करने के लिए केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि धैर्य, निरंतरता और मुश्किल परिस्थितियों से लड़ने का जज्बा भी जरूरी है। उनकी कहानी उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है, जो किसी बीमारी या शारीरिक चुनौती के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।
चार साल की उम्र में हुई थी टाइप-1 डायबिटीज
अलेक्जेंडर ज्वेरेव को महज चार साल की उम्र में टाइप-1 डायबिटीज का पता चला था। यह ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता और मरीज को जीवनभर ब्लड शुगर की निगरानी तथा इंसुलिन की जरूरत पड़ती है। बचपन में इस बीमारी का पता चलने के बाद उनके परिवार के सामने भी कई चुनौतियां थीं।ज्वेरेव ने एक इंटरव्यू में बताया था कि डॉक्टरों ने शुरुआत में उनके माता-पिता को आगाह किया था कि इस बीमारी के कारण उनके जीवन और खेलकूद पर सीमाएं लग सकती हैं। हालांकि, उनकी मां इरीना ज्वेरेव ने कभी उन्हें अपने सपनों से पीछे हटने नहीं दिया। उनकी मां खुद भी पूर्व पेशेवर टेनिस खिलाड़ी रही हैं।यूएस ओपन जीतने के बाद ज्वेरेव ने अपनी मां को याद करते हुए कहा कि जब चार साल के बच्चे को डायबिटीज होने का पता चलता है और डॉक्टर बताते हैं कि उसकी जिंदगी तथा खेलकूद सीमित हो सकते हैं, तब मां का यह विश्वास रखना कि उसका बेटा जो चाहेगा, वह बन सकता है, बहुत बड़ी बात होती है। उन्होंने अपनी मां को अपनी जिंदगी की सबसे मजबूत और महत्वपूर्ण महिला बताया।
2026 में फ्रेंच ओपन जीतकर खत्म किया वर्षों का इंतजार
ज्वेरेव के करियर में 2026 का फ्रेंच ओपन सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। पेरिस में खेले गए इस टूर्नामेंट के फाइनल में उन्होंने इटली के फ्लावियो कोबोली को पांच सेट के मुकाबले में हराकर अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता।इस जीत के साथ उन्होंने वर्षों से चले आ रहे इंतजार को समाप्त कर दिया। इससे पहले वह कई बार ग्रैंड स्लैम के फाइनल तक पहुंचे थे, लेकिन खिताब जीतने में सफल नहीं हो सके थे।2020 के यूएस ओपन फाइनल की हार उनके करियर का सबसे दर्दनाक अनुभव रही थी। उस मुकाबले में वह डोमिनिक थिएम के खिलाफ दो सेट की बढ़त हासिल करने के बावजूद मैच हार गए थे। इसके बाद 2024 फ्रेंच ओपन और 2025 ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा।हालांकि, फ्रेंच ओपन 2026 की जीत ने उनके आत्मविश्वास को नई मजबूती दी। उन्होंने बताया कि पेरिस में खिताब जीतने के बाद 2020 के फाइनल से जुड़ी निराशा और मानसिक दबाव काफी हद तक समाप्त हो गया। अब बड़े मुकाबलों में उतरते समय उनके अंदर पहले की तुलना में अधिक खुशी और आत्मविश्वास रहता है।
यूएस ओपन जीतकर बने दो बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन
फ्रेंच ओपन के बाद ज्वेरेव ने अमेरिकी सरजमीं पर भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा। सितंबर में आयोजित यूएस ओपन के फाइनल में उनका सामना अमेरिका के बेन शेल्टन से हुआ। ज्वेरेव ने यह मुकाबला 6-3, 7-6 (2), 5-7, 6-2 से जीतकर अपने करियर का दूसरा ग्रैंड स्लैम खिताब हासिल किया।इस जीत के साथ उन्होंने एक ही साल में दो ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने की उपलब्धि हासिल की। जर्मनी के पुरुष टेनिस के लिए भी यह बड़ी सफलता रही। खास बात यह है कि ज्वेरेव से पहले जर्मनी के बोरिस बेकर ने 1996 में ग्रैंड स्लैम खिताब जीता था।यूएस ओपन के बाद ज्वेरेव ने अपने परिवार और टीम के सदस्यों को इस सफलता का श्रेय दिया। उनके पिता अलेक्जेंडर ज्वेरेव सीनियर और भाई मिशा ज्वेरेव उनके टेनिस करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि टीम ने लगभग 30 वर्षों तक ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के लिए मेहनत की और अब तीन महीने के भीतर दो बड़ी ट्रॉफियां हासिल की हैं।
विंबलडन फाइनल तक भी पहुंचे
ज्वेरेव का प्रदर्शन केवल फ्रेंच ओपन और यूएस ओपन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने 2026 में विंबलडन के फाइनल में भी जगह बनाई। हालांकि, खिताबी मुकाबले में उन्हें इटली के जैनिक सिनर के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा।इस मुकाबले के दौरान भी उनकी डायबिटीज चर्चा में रही। ज्वेरेव को अपने ब्लड ग्लूकोज स्तर पर लगातार नजर रखनी पड़ती है। जरूरत पड़ने पर वह मैच के दौरान ब्रेक के समय इंसुलिन भी लेते हैं। उनकी यह दिनचर्या बताती है कि पेशेवर टेनिस के उच्चतम स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के साथ उन्हें अपनी सेहत का भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है।
अब दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी बने ज्वेरेव
ज्वेरेव की उपलब्धियों का सबसे बड़ा परिणाम 2 नवंबर को सामने आया, जब वह एटीपी रैंकिंग में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी बन गए। उन्होंने इटली के जैनिक सिनर को शीर्ष स्थान से हटाकर यह उपलब्धि हासिल की। इसके साथ ही वह 1973 में एटीपी रैंकिंग शुरू होने के बाद दुनिया के नंबर-1 बनने वाले 30वें पुरुष खिलाड़ी बन गए।उनकी इस उपलब्धि के पीछे कई वर्षों का संघर्ष, चोटों से वापसी और लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश शामिल है। 2022 फ्रेंच ओपन के सेमीफाइनल में राफेल नडाल के खिलाफ मुकाबले के दौरान उन्हें टखने में गंभीर चोट लगी थी। इसके बाद उन्हें सर्जरी और लंबे रिहैबिलिटेशन से गुजरना पड़ा। बावजूद इसके उन्होंने वापसी की और अपने खेल को नए स्तर पर पहुंचाया।
डायबिटीज से जूझ रहे बच्चों के लिए बने प्रेरणा
ज्वेरेव अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों के अलावा डायबिटीज के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए भी काम कर रहे हैं। उन्होंने 2022 में अलेक्जेंडर ज्वेरेव फाउंडेशन की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य विशेष रूप से डायबिटीज से प्रभावित बच्चों की मदद करना और जरूरतमंद लोगों तक दवाइयां पहुंचाने में सहयोग करना है।उनका मानना है कि डायबिटीज किसी व्यक्ति के सपनों और क्षमताओं की सीमा तय नहीं करनी चाहिए। उन्होंने अपनी उपलब्धियों के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि उचित देखभाल, अनुशासन और निरंतर प्रयास से इस बीमारी के साथ भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।ज्वेरेव का 2026 सीजन इस बात का उदाहरण है कि लंबे समय तक असफलताओं का सामना करने के बाद भी सफलता हासिल की जा सकती है। दो ग्रैंड स्लैम खिताब और दुनिया का नंबर-1 स्थान उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गए हैं। अब टेनिस जगत की नजर इस बात पर रहेगी कि ज्वेरेव अपने इस प्रदर्शन को आने वाले सीजन में किस तरह बरकरार रखते हैं।
Next Story