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नई दिल्ली। भारत के आर्मरेसलिंग खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का मान बढ़ाया है। 47वीं विश्व आर्मरेसलिंग और 28वीं विश्व पैरा आर्मरेसलिंग चैंपियनशिप 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का पदक जीतने का सिलसिला लगातार जारी है। प्रतियोगिता के तीसरे दिन शनिवार को जूनियर राइट-आर्म फाइनल में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 12 पदक अपने नाम किए। इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही चैंपियनशिप में भारत के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है। इसमें तीन स्वर्ण, सात रजत और दो कांस्य पदक जूनियर राइट-आर्म स्पर्धाओं से आए हैं। भारत अब कुल पदकों के मामले में रूस, तुर्किये और कजाकिस्तान के बाद चौथे स्थान पर है।नई दिल्ली के ईस्ट दिल्ली स्थित द लीला एंबियंस कन्वेंशन होटल में आयोजित इस विश्वस्तरीय प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग आयु वर्गों और भार वर्गों में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि भारतीय खिलाड़ियों ने कई मुकाबलों में अपने पिछले प्रदर्शन को पीछे छोड़ते हुए पदक हासिल किए। जूनियर और युवा खिलाड़ियों की सफलता ने भारतीय आर्मरेसलिंग के भविष्य को लेकर भी उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
रियूबेन ने दिलाया स्वर्ण, अजय कुमार रहे दूसरे स्थान पर
जूनियर राइट-आर्म फाइनल में भारत के रियूबेन लालहमंगाइहजुआला ने शानदार प्रदर्शन करते हुए यूथ पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसी स्पर्धा में भारत के अजय कुमार ने दूसरा स्थान प्राप्त कर रजत पदक अपने नाम किया। इस तरह भारत ने एक ही भार वर्ग में स्वर्ण और रजत दोनों पदक जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की।सब-जूनियर बालक 55 किलोग्राम वर्ग में लालपेखलुआ बी. ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत की सफलता में एक और इजाफा किया। वहीं जूनियर बालक 60 किलोग्राम वर्ग में आर. लालपेखलुआ ने बेहतरीन मुकाबला करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके अलावा यूथ पुरुष 85 किलोग्राम वर्ग में हरकोमल सिंह गिल ने रजत पदक जीतकर भारतीय अभियान को मजबूती दी।
रजत और कांस्य पदकों से भी चमका भारत
भारतीय खिलाड़ियों ने केवल स्वर्ण पदकों तक ही अपना प्रदर्शन सीमित नहीं रखा, बल्कि कई अन्य भार वर्गों में भी शानदार मुकाबले किए। यूथ पुरुष 55 किलोग्राम से कम भार वर्ग में लैतांसांगा ने रजत पदक हासिल किया। उन्होंने इससे पहले लेफ्ट-आर्म स्पर्धा में कांस्य पदक भी जीता था। वहीं यूथ पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग में अजय कुमार ने भी रजत पदक अपने नाम किया। इस तरह अजय कुमार ने लेफ्ट और राइट दोनों हाथों की स्पर्धाओं में पदक जीतने की उपलब्धि हासिल की।सब-जूनियर बालक 50 किलोग्राम वर्ग में मोहit कुमार ने रजत पदक जीता, जबकि इसी वर्ग में वीर गुर्जर ने कांस्य पदक हासिल किया। जूनियर बालक 50 किलोग्राम से कम भार वर्ग में उत्कर्ष परमार ने रजत पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया।महिला खिलाड़ियों ने भी इस प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। यूथ महिला 55 किलोग्राम वर्ग में तेजा पीजे ने रजत पदक हासिल किया। वहीं यूथ महिला 80 किलोग्राम वर्ग में श्रीन बोज्जा ने रजत पदक जीतकर भारत की पदक तालिका में योगदान दिया। यूथ महिला 50 किलोग्राम से कम भार वर्ग में अन्ना थेरेसा के. रॉय ने कांस्य पदक अपने नाम किया।
12 पदकों में तीन स्वर्ण और सात रजत शामिल
जूनियर राइट-आर्म फाइनल में भारत के प्रदर्शन को पदकों के लिहाज से देखें तो खिलाड़ियों ने तीन स्वर्ण, सात रजत और दो कांस्य पदक जीते। स्वर्ण पदक रियूबेन लालहमंगाइहजुआला, आर. लालपेखलुआ और लालपेखलुआ बी. ने हासिल किए।रजत पदक जीतने वाले खिलाड़ियों में हरकोमल सिंह गिल, अजय कुमार, लैतांसांगा, मोहित कुमार, उत्कर्ष परमार, तेजा पीजे और श्रीन बोज्जा शामिल हैं। वहीं वीर गुर्जर और अन्ना थेरेसा के. रॉय ने कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली में एक-एक पदक डाला।इस प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों ने 49 में से 48 राइट-आर्म फाइनल स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। कुल 82 भारतीय खिलाड़ियों ने मुकाबलों में भागीदारी की। इनमें से 12 खिलाड़ी अपने-अपने भार वर्ग में चौथे स्थान पर रहे। जूनियर बालक 65 किलोग्राम वर्ग में निकोलस थौनाओजम और यूथ पुरुष 75 किलोग्राम वर्ग में मोहम्मद रोशन एमके भी चौथे स्थान पर रहे।
पहले दो दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने जीते थे 20 पदक
इससे पहले प्रतियोगिता के शुरुआती दो दिनों में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 20 पदक हासिल किए थे। इनमें चार स्वर्ण, दो रजत और 14 कांस्य पदक शामिल थे। 29 अक्टूबर को मास्टर्स वर्ग के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 12 पदक जीते थे। इनमें चार स्वर्ण, एक रजत और सात कांस्य पदक शामिल थे।जिंसीमोल सेबेस्टियन ने ग्रैंड मास्टर महिला 80 किलोग्राम वर्ग में लेफ्ट और राइट दोनों हाथों की स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर विशेष उपलब्धि हासिल की थी। वह शुरुआती मुकाबलों में भारत की एकमात्र डबल गोल्ड मेडलिस्ट बनी थीं।योगेश चौधरी ने मास्टर महिला 80 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में राइट-आर्म स्पर्धा का स्वर्ण और लेफ्ट-आर्म स्पर्धा का कांस्य पदक जीता था। शौकत वीटी ने मास्टर पुरुष 60 किलोग्राम से कम भार वर्ग में राइट-आर्म में स्वर्ण और लेफ्ट-आर्म में कांस्य पदक हासिल किया था।30 अक्टूबर को युवा खिलाड़ियों ने लेफ्ट-आर्म स्पर्धाओं में आठ और पदक जीतकर भारत की पदक संख्या 20 तक पहुंचाई थी। जिम्मिसन मारवेन ने यूथ पुरुष 65 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता था। इसके अलावा आभास राणा, लैतांसांगा, अजय कुमार और विष्णुप्रिया पी. ने अलग-अलग भार वर्गों में कांस्य पदक हासिल किए थे। सब-जूनियर वर्ग में आर्यन सिंह, युमनाम चिंगखई सिंह और शेन सलीश ने भी कांस्य पदक जीते थे।
60 से अधिक देशों के खिलाड़ी ले रहे हिस्सा
47वीं विश्व आर्मरेसलिंग और 28वीं विश्व पैरा आर्मरेसलिंग चैंपियनशिप का आयोजन 26 अक्टूबर से 7 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली में किया जा रहा है। विश्व आर्मरेसलिंग फेडरेशन (WAF) और पीपुल्स आर्मरेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (PAFI) के तत्वावधान में आयोजित इस प्रतियोगिता में 60 से अधिक देशों के 1,700 से ज्यादा खिलाड़ियों, अधिकारियों और खेल प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।भारत में पहली बार आयोजित हो रही इस चैंपियनशिप में सब-जूनियर, जूनियर, यूथ, सीनियर, मास्टर्स और पैरा वर्गों के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिता का उद्देश्य आर्मरेसलिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के साथ ही उभरती प्रतिभाओं को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर प्रदान करना है।
प्रो पंजा लीग में भी दिखेगा भारतीय खिलाड़ियों का दम
विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए पेशेवर स्तर पर भी अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। प्रो पंजा लीग के माध्यम से भारतीय आर्मरेसलिंग खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिल रहा है।विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले योगेश चौधरी और आभास राणा के साथ हरकोमल सिंह गिल भी 28 नवंबर 2026 को पुणे में आयोजित होने वाले प्रो पंजा लीग पूनावाला गोल्ड एडिशन-दो में हिस्सा लेने वाले हैं।भारत के खाते में 32 पदकों का पहुंचना इस खेल के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। खासकर युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने यह साबित किया है कि देश में आर्मरेसलिंग की नई प्रतिभाएं तेजी से उभर रही हैं। प्रतियोगिता अभी जारी है और 7 नवंबर तक भारतीय खिलाड़ियों के पास अपनी पदक संख्या और बेहतर करने का अवसर रहेगा। ऐसे में भारतीय दल की नजरें आगामी मुकाबलों में और पदक जीतकर देश की स्थिति मजबूत करने पर टिकी हैं।
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