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Waste Heat Electricity: जापानी वैज्ञानिकों ने एक ऐसी टेक्नोलॉजी डेवलप की है जो बेकार गर्मी को बिजली में बदल सकती है। अक्सर, फैक्ट्रियों और इंजनों से पैदा होने वाली 20-50% एनर्जी गर्मी के रूप में बर्बाद हो जाती है। यह नई खोज न सिर्फ इस बर्बाद गर्मी का इस्तेमाल करके एनर्जी बचाएगी, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा पहुंचाएगी।
गर्मी से बिजली: एक नई शुरुआत
वैज्ञानिकों ने मोलिब्डेनम डिसिलिसाइड नाम के एक खास मटीरियल का अध्ययन किया। यह एक थर्मोइलेक्ट्रिक मटीरियल है जिसमें तापमान के अंतर को बिजली में बदलने की क्षमता होती है। वैज्ञानिकों ने पाया कि यह मेटल बिना किसी बाहरी मैग्नेटिक फील्ड के भी बहुत सटीकता से काम कर सकता है, जो इसे भविष्य के डिवाइस के लिए खास तौर पर फायदेमंद बनाता है।
पुरानी टेक्नोलॉजी की कमियां और समाधान
अब तक, बिजली बनाने वाले डिवाइस कई लेयर्स के बने होते थे, जिससे बिजली के फ्लो में रुकावट आती थी और एनर्जी का नुकसान होता था। हालांकि, MoSi2 की पतली फिल्म का इस्तेमाल करके, एक बड़े एरिया को कवर किया जा सकता है। इससे एनर्जी का नुकसान कम होता है और कम लागत में ज़्यादा बिजली बनाई जा सकती है।
यह टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है?
वैज्ञानिक इस टेक्नोलॉजी का श्रेय ADCP (एनोमलस डिफ्यूजन ऑफ चार्ज कैरियर्स) नाम की प्रक्रिया को देते हैं। आसान शब्दों में, जब इस मटीरियल के एक सिरे को गर्म किया जाता है और दूसरे को ठंडा, तो इसके अंदर के इलेक्ट्रॉन गर्म सिरे से ठंडे सिरे की ओर जाते हैं। इस मूवमेंट से वोल्टेज पैदा होता है और बिजली बनती है।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इसके क्या फायदे हैं?
यह खोज सिर्फ फैक्ट्रियों तक ही सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल छोटे और पोर्टेबल सेंसर को पावर देने के लिए भी किया जा सकता है। दूरदराज के इलाकों में जहां बिजली पहुंचाना मुश्किल है, ये छोटे डिवाइस बेकार गर्मी का इस्तेमाल करके खुद को चार्ज रख पाएंगे। यह एक सस्टेनेबल और प्रदूषण-मुक्त एनर्जी सॉल्यूशन है।
जापानी वैज्ञानिकों का यह रिसर्च कम्युनिकेशंस मटीरियल्स जर्नल में पब्लिश हुआ है। यह स्टडी भविष्य में वेस्ट हीट रिकवरी सिस्टम में और सुधार की उम्मीद जगाती है। अगर हम फैक्ट्रियों से निकलने वाली बेकार गर्मी को बिजली में बदल पाते हैं, तो हम फॉसिल फ्यूल पर अपनी निर्भरता कम कर सकते हैं और एक साफ-सुथरी दुनिया की ओर बढ़ सकते हैं।
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