- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- विज्ञान
- /
- संवेदनशील शोध का...
विज्ञान
संवेदनशील शोध का खुलासा- रेत के टीले भी ले सकते हैं सांस
Gulabi Jagat
1 April 2022 6:32 PM IST

x
रेत के टीले भी ले सकते हैं सांस
रेगिस्तान (Desert) में हुए धीमे और लंबे अध्ययन से खुलासा हुआ है कि रेत के टीले (Sand Dune) में पानी की वाष्प सांस की तरह (Breathe) अंदर और बाहर जाती है. बहुत ही धीमी चलने वाली इस प्रक्रिया में हवा के बहाव, दिशा नमी आदि की भूमिका होती है. जिससे वायुमंडल से रेत के नीचे की ओर नमी का संचार या आदान प्रदान होता है. यह अध्ययन कृषि की भूमि को रेगिस्तान में बदलने से रोकने में काम आ सकता है.
फंतासी किताबों में अक्सर यह पढ़ने को मिल जाता है कि पत्थरों जैसी निर्जीव चीजों में भी जान होती है या वे सांस ले सकते हैं. कई जगह पर निर्जीव चीजें सांस लेती बताई जाती हैं. लेकिन क्या कोई वैज्ञानिक अध्ययन में ऐसे नतीजे निकाल सकता है? नए अध्ययन में ऐसा ही हुआ है .रेगिस्तान के भूभाग (Landscapes of Desert) जैसे दिखते हैं उतने निर्जीव नहीं होते हैं. रेत के टीले (Sand dunes) के टीलों का महासागर बढ़ता है, गतिमान होता है और इसमें टीले एक दूसरे से अंतरक्रिया करते हैं. अब यह अध्ययन कह रहा है कि रेत के टीले सांस (Sand dunes Can breathe) भी ले सकते हैं.
एक अतिसंवेदी पड़ताल में दशकों का समय लेकर शोधकर्ताओं ने दर्शाया है कि रेत के टीले (Sand Dunes) नियमित रूप से पानी की वाष्प (Water Vapour) को छोटी मात्रा में सांस अंदर लेते हैं और बाहर छोड़ते हैं. भाप को सांस के रूप में अंदर लेना मुश्किल काम होता है जब रेत ज्यादा सूखी होती है. लेकिन जब हवा टीले की सतह पर बहती है वह अपने साथ रेत की सबसे ऊपर की परत को उड़ा ले जाती है. इससे सतह की नमी और दबाव में बड़ा बदलाव आ जाता है. इसकी वजह से नमी का वायुमंडल (Atmoshpere) से ही टीले के अंदर नीचे की ओर संचार होने लगता है.
इस पड़ताल के लिए उपयोग में लाए जाना वाले उपकरण नमी (Moisture) के लिए बहुत संवेदनशील थे. यह एक रेत के दाने (Sand Grain) के ऊपर जमी पानी की परत को भी पहचान सकता है. जब इस उपकरण को कतर के रेगिस्तान में रेत के टीले (Sand Dune) में गाड़ा गया तो वह अपने आसापास मिलीमीटर पैमाने के विभेदन क्षमता के केवल 20 सेकेंड में ही तापमान, विकिरण और नमी को स्कैन करने में सक्षम था. उपकरण ने पूरे दो दिनों तक हर 2.7 मिनट में इस तरह के मापन किए और भारी मात्रा में आंकड़े जुटाए.
शोधकर्ता ऐसे किसी उपकरण के बारे में नहीं जानते हैं जो इस तरह से रेत के टीले (Sand Dune) के बारे में इतनी गहराई से जानकारी हासिल कर सके. इस उपकरण के आंकड़ों का साथ हवा की गति (Wind Speed) , दिशा, आसपास का तापमान और नमी (Moisture) सभी के आंकड़ों को मिलाकर शोधकर्ताओं न एक रेगिस्तान की रेत का एक सूक्ष्म बर्ताव की जानकारी हासिल करने में सफलता पाई है. जहां ऊष्मा रेत के दानों में संवहन होती है वहीं पानी की भाप दोनों के बीच में घुस जाते हैं.
रेत के दाने के छेद नमी (Moisture) को सतह से नीचे ले जाने का काम करते हैं. और इस तरह के रास्तों को बनाने और बिगाड़ने का काम हवा के प्रवाह (Flow of Wind) से होता है. कोर्नेल यूनिवर्सिटी के मैकेनिकल इंजीनियर माइकल लोग ने बताया कि हवा टीले (Sand Dunes) के ऊपर बहती है जिससे स्थानीय दबाव अस्थिर हो जाता है. इससे हवा रेत के अंदर और बाहर आती जाती है. इस तरह से रेत उसी तरह से सांस लेती है जैसे कोई जीव सांस लेता है. इसी सांस लेने की वजह से ही रेत के टीलों की गहराई में सूक्ष्मजीवी खुद को तब भी जिंदा रख पाते हैं जब कोई तरल पानी उपलब्ध नहीं होता.
रोचक बात यह है कि टीले (Sand Dunes) की सतह पर उपकरण ने वैज्ञानिकों ने वाष्पीकरण (Evaporation) की मात्रा उम्मीद से कम पाई. इस तरह के अतिशुष्क क्षेत्र में रेत के टीले से नमी का वायुमंडल (Atmosphere) में पहुंचना एक बहुत ही धीमी रासानियक प्रक्रिया है. लोग ने बताया कि यह पहली बार है जब इस तरह के कम स्तर की नमी का मापन हो सका है.
इस नए उपकरण की संवेदनशलीता तकनीकी की नई उपलब्धि है जिससे वैज्ञानिक कृषि भूमि (Agricultural Land) को रेगिस्तान (Desert) में बदलने से रोकने के लिए सटीक मापन कर सकते हैं. यह प्रकिया जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण और ज्यादा खराब होती जा रही है. कृषि योग्य भूमि का रेगिस्तान में तब्दील होने वैज्ञानिकों को खासा परेशान कर रहा है. लोग इसे इस तरह कहते हैं कि अगर ऐसा ही चलता रहा है तो पृथ्वी का ही भविष्य केवल रेगिस्तान रह जाएगा. इसलिए रेगिस्तान को ज्यादा जानना भी बहुत जरूरी है.
Next Story





