विज्ञान

वैज्ञानिकों ने ढूढ़ा अब तक का सबसे पुराना तारा, जानिए क्या है खास

Apurva Srivastav
28 May 2021 12:04 AM IST
वैज्ञानिकों ने ढूढ़ा अब तक का सबसे पुराना तारा, जानिए क्या है खास
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तारों का बनना और उनका नष्ट होना अंतरिक्ष की एक सामान्य प्रक्रिया है

तारों का बनना और उनका नष्ट होना अंतरिक्ष की एक सामान्य प्रक्रिया है. वैज्ञानिकों का दावा है कि अभी भी ब्रह्मांड में कुछ ऐसे खगोलीय पिंड मौजूद हैं जो अंतरिक्ष के निर्माण के समय से वजूद में है. खगोलविदों ने हमारी गैलेक्सी (Galaxy) के बाहरी हिस्से पर एक बहुत पुराने तारे की खोज की है जो लगता है कि बिग बैंग (Big Bang) के कुछ मिलियन साल बाद ही बना था. इससे उन्हें ब्रह्मांड (Space) के इतिहास को समझने में मदद मिल सकती है. पिछले हफ्ते प्रकाशित एक रिसर्च में शोधकर्ताओं ने दक्षिणी आकाश के एक खगोलीय सर्वे के दौरान नैरोबैंड फोटोमेट्री तकनीक की मदद से तारे की खोज की.

इसके बाद वैज्ञानिकों ने हाई-रिजॉल्यूशन स्पेक्ट्रोस्कोपी से तारे पर रिसर्च की, जिसे उसके रिसर्च नंबर SPLUS J210428.01−004934.2 या SPLUS J2104−0049 के नाम से जाना जा रहा है. वैज्ञानिकों ने यह निर्धारित किया है कि यह बहुत कम 'Ultra Metal Poor' वाले तारों में से एक है जो यह दिखाता है कि यह अब तक देखे गए सबसे पुराने तारों में से एक है.
कम से कम 10 बिलियन साल पुराना
एरिज़ोना के टक्सन में नेशनल साइंस फाउंडेशन की खगोलीय अनुसंधान प्रयोगशाला NOIRLab के खगोलशास्त्री विनीसियस प्लाको ने कहा कि यह बेहद दुर्लभ हैं. हम दशकों की खोज के बाद इनमें से सिर्फ 35 तारों के बारे में ही जान पाए हैं. उन्होंने कहा कि SPLUS J2104−0049 सूर्य के द्रव्यमान के लगभग 80 प्रतिशत के बराबर एक विशालकाय तारा है जो कम से कम 10 बिलियन साल पुराना है और संभवतः ब्रह्मांड से सिर्फ कुछ ही मिलियन साल नया है, जो कि खगोलविदों का अनुमान है कि 13.8 बिलियन साल पुराना है. वहीं हमारा सूर्य अनुमानित रूप से 4.6 अरब वर्ष पुराना है.
पृथ्वी से करीब 16,000 प्रकाश वर्ष की दूरी
बता दें कि प्लाको तारे के बारे में एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित अध्ययन के प्रमुख लेखक हैं. रिसर्चर्स ने उत्तरी चिली में सेरो टोलोलो में एक दूरबीन द्वारा किए गए खगोलीय सर्वे के डेटा का इस्तेमाल किया. इसने हमारी आकाशगंगा के हेलो में तारे का खुलासा किया. ये आकाशगंगा की मुख्य डिस्क से बेहद दूर और पृथ्वी से करीब 16,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है.


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